आओ चरित्रवान बने गुणवान बने,विद्ध्यावान बने आओ कुछ अच्छा सोचें अच्छा बने,अच्छा करे अच्छा बनने का संकल्प करे,आगे बढे सरिता के जल की भांति सर्वस्व उद्धार करें, विकारों को किनारे करें अपने अस्तितव में जियें अंहकार के आवरण से स्वयं को दूषित ना करें आप स्वयं सिद्धा हैं स्वयं की छवि ना खराब करें आत्ममंथन से स्वयं की पहचान करें ।
चल रहा हूं ,बङ रहा हूं वर्ष पर वर्ष उम्र का सफर तय कर रहा हूं कुछ चला हूं,कुछ.रुका हूं,कुछ छला हूं अपने कर्मों का कारवां लेकर चला हूं । रास्तों का मैं भूला हूं अपनों को छोङकर अपना जहां बनाने निकला हूं अपनी जिन्दगी अपने ढंग से जीने चला हूं कुछ चला हूं ,कुछ रुका हूं कुछ छला हूं क्यों कहूं जमाने से डरा हूं मैं अपने ही कर्मों का पला हूं कौन डरा सकता है मुझे मैं डर को धकेल पीछे आगे की और बङा हूं माना की बहुत कुछ पाया है मैने फिर भी बहुत कुछ पीछे छोङ आगे बङा हूं खुश हूं बहुत कुछ पाया मैने कौन कहता है कि मैं अकेले चला हूं अपने कर्मों का कारवां लेकर चला हूं चल रहा हूं ,बङ रहा हूं, जीवन का चक्र पूरा कर रहा हूं जीवन बढने का नाम है धीमे-धीमे से ही सही पर रुकूगा नहीं रूक गया तो तालाब हो जाऊंगा बहता रहा चलते रहा तो मंजिल पर पहुंच जाओगे दरिया से सागर ,फिर महासागर हो जाऊंगा ।