तिजोरियां तो हैं ! सही बात है सब कहते हैं कई युगों से यह तिजोरियां बंद पङी हैं खुली नहीं हैं तिजोरियां हैं तो कुछ ना कुछ कीमती भी जरुर होगा जानना तो हर कोई चाहता होगा तिजोरियों में क्या छिपा होगा तो फिर ढूढिये कूंजी मानचित्र की जो बता सके सही दिशा । कहां जा रहे हो सच्ची खुशी की तलाश में एक राज की बात बताऊं ! बाहर मत जाओ ,बाहर जाओगे तो भटक जाओगे क्योंकि ? कीमती मूल्यवान वस्तुऐं अक्सर तिजोरियों में छिपाकर रखी जाती हैं । भीतर की यात्रा पर निकल जाओ अमूल्य रत्नों की भरमार मिलेगी । कई रहस्यमय शक्तियों से पहचान होगी चमत्कारों की खान मिलेगी । तिजोरियों की रहस्यमयी दिशाऐं भीतर गहरी गुफाऐं अद्भुत अदृश्य अकथनीय, अवर्णनीय तिजोरियां । अंतहीन यात्रा रास्ता सही पकड़ लिया तो निकल जाओगे मंजिल की ओर एक से एक अजूबों से मुलाकात होगी। कई असीम शक्तियों से साक्षात्कार होगा कई विचित्र परिस्थितयां समक्ष आयेंगी घबराना मत विचलित मत होना
स्वागत की परम्परा तो हम इस.कदर निभाते हैं की गुलाब ना भी मिले अगर राहों में बिछाने के लिए हम अपनी पलकों के कमल बिछाते हैं। आवभगत में तो.हम आसमान से तारे भी तोङ.लाते हैं आज कोई हमारा मेहमान है, तो कल हम भी किसी के मेहमान हो सकते हैं स्वागत की चाह हर कोई रखता है फिर हम जो चाहते हैं वो हम देना भी सीखें मन में जज्बा लिये कुछ कर दिखाने का बस कुछ ना कुछ करते रहे,करते रहे और आगे निकल गये करते रहे ,पर यूं ही नहीं कुछ भी करते रहे माना की राहें अंजानी थीं मन की ना मेहमान थीं फिर भी अतिथि सम्मान में स्वागत की परम्परा निभाते रहे खुशीयां देकर खुशियों से दामन भरते रहे बेमतलब में नहीं यूं ही सफर करते रहे सफर में तजुर्बों से झोली भरते रहे नजर लक्ष्य पर थी,मन में उम्मीद थी मंजिलों की राहों से अंजान थे पर दिल में ठसक थी ,उम्मीद की किरण की चमक थी कहते हैं ना जहां चाह वहां राह बस राहों में चाहों का रंग भरते रहे जीवन में खुशियों के रंग भरने थे एक उम्मीद एक किर...