हे परमात्मा मुझे जीने का ढंग दो खुशियों के रंगों को भरने की तरकीब दो वाणी में संयम दो,विचारों में दिव्यता का प्रकाश दो भावों में खूबसूरती का वर दो सुमधुर भावों का संग दो नयनों से भरकर जो मस्तिष्क में उतर जाये मनोहारी पुष्प वाटिका बना दो ब्रह्मांड के आचरण की सौम्यता दो माधुर्य रस का सरस क्षीर बना दो मुस्कराहट का सबब बन दिलों को हर्षोल्लास से भाता जाऊं ऐसा अमृत कुंभ बना दो हे परमात्मा मुझे जीने का ढंग दो
सपनों में सोचा था, सपना तो सपना ही होता है एक दिन अपना भी सपना सच हो गया परमात्मा का इशारा हुआ, आंखों को दीदार हो गया हम सबका सपना साकार हो गया एक दिन वो हकीकत में मिल गयी सादगी उसकी दिल को भा गयी एक बिटिया हमको पसंद आ गयी दिल की सच्ची वो आंखों में मस्ती भरी सुनहरी तितली सी उडती वो नजर आ गयी हम सब के दिलों में वो घर कर गयी एक बिटिया - - हमने जीवन में उसको घर कर लिया मानों जन्मों का बंधन हमने तय कर लिया। कोमल रिश्तों से बंधन बांधने को वो मायके से ससुराल की हो गयी लाडली वो गोस्वामी परिवार की कली बागों में महकती रहे खिली-खिली हमने फूलों का उसे गूलदस्ता कर लिया असूजा परिवार की रौनक वो बनकर रहेगी हम सब प्रेम से उसकी बागवानी करेगें अपने गुणों से वो सबका नाम रोशन करेगी एक घर में वो पली दूजे घर में राज करेगी। हे परमात्मा तुम हम पर कृपा रखना सुन्दर माला में हमको पिरोये रखना - -कमी एक दूजे की हम माफ करेगें, होठों पर सदा मुस्कान रखेगें श्रीराम ...