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शहनाईयां

अप्सराओं की वादियां  प्रकृति की शहनाईयां  पहाङों की ऊचाईयां  भरपूर आजादियां  कायनात की सरगम  भूमि संग तरूवर के गहरे रिश्ते  धरती मां की गोद में जङों की मजबूती का विशालकाय संसार मिट्टी से जुडे  ऊचांइयों पर लिखते कहानियां  हमारी भव्यता की सच्चाईयां  भूमि से सम्बन्धों की गहराईयां  हमारी जङों से ही हमारी उचांइयां  हवाओं की सरगम पर पत्तों की शहनाई  जब बजती हैं,प्रकृति भी झूमती है  और धरती पर सजते हैं हरियाली के ग्रन्थ  वृक्षों के बीजों की भव्यता अपने अस्तित्व का  के अंकुर से निरंतर युगों-युगों से पोषित होती वसुंधरा    
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एहसास

मैं मनुष्य जीवन हूं  मैं एहसासों की लहर हूं कैसे ठहर जाऊं  कर्मों की उडान भरने को आजाद  माया के पिजरें में कैद होकर स्वयं ही फंस जाता हूं  मैं खूशबू हूं किसी के हाथ नहीं आती   मैं ठंडी हवा की लहर हूं छूकर उङ जाती हूं  मैं एक मीठा सा एहसास हूं  जो दिल को छू जाती हूं  मैं एक आवाज हूं, दिल के तारों  की सरगम वाणी की झंकार  का एक एहसास जो शब्दों  से बयां करके कर्ण द्वारों से गहराई में  उतर भावों की नौका को पार लगाती हूं । नजरों से छिपकर रहती हूं  पर हर दिल को छू जाती हूं  मैं छिपकर एहसास दिलाती हूं  मैं दिखती नहीं हवाओं में बिखर जाती हूं   मैं पुष्पों में सुगन्ध हूं किसी हाथ नहीं आती हूं   मैं भावों में कैद एक खूबसूरत एहसास हूं  फितरत है उङने की ,पंख नहीं फिर भी उडती हूं  मेरी नजरें जमीं पर आसमां पर विचारों के पंखों से  उडान भर सदूर गगन की अंतहीन ऊचाइयों में  रहस्यमयी दुनियां में लुप्त हो जाती हूं । मैं भावों हूं एहसासों की खूबसूरत बात हूं ।

प्रार्थना

नमस्कार, मंच पर उपस्थित मेरे सह मित्रोॅ को एवं  समस्त माननीय अतिथियों को ..  मेरी राम राम जी सबको । कहते हैं किसी भी अच्छे काम की शुरुआत प्रार्थना से होनी चाहिए ।  अतः मैं आपके समक्ष स्वरचित प्रार्थना प्रस्तुत करने.जा रही हूं ।   मन में लिए शुभ भावना ,परमार्थ हमारी अराधना  सेवा हमारा संकल्प है,परहित हमारा उद्देश्य  मानवता का संग है,जन कल्याण हमारा लक्ष्य है।  व्याधि पीड़ा बन उपचार ,करना है सदा ही परोपकार -2 उपकारी जीवन सद्व्यवहार, परस्पर प्रेम की फसल उगानी . गंगा जल सम अमृत बनकर जन परोपकार ही  करना है  । इनरव्हील ऋषिकेश ने लिया है प्रण निष्काम सेवा का संग्राम स्वच्छंद .. इनरव्हील ऋषिकेश के हौसले है बुलंद .. सेवा के पथ पर डटे रहेगें । -2  परहित हमको प्यारा है  -2  

रोशनी ही सत्य है

रोशनी ही सत्य है  रोशनी में ही गूढ रहस्य है  रोशनी की अठखेलियाँ हैं  अनकही सी पहेलियां हैं रोशनी है तो जिन्दगी है , जिन्दगी है तो रोशनी है रोशनी की सब कहानी  चल रही जिन्दगानी है  तुझ में रोशनी,मुझमें रोशनी  समस्त संसार की रोशनी  ये ब्रह्मांड कायनात की रोशनी  रोशनी से रोशनी में नहाता यह संसार  रोशनी ने लिखी जीवन की कहानी  रोशनी से चल रही सृष्टि सारी कहानी 

जीने के ढंग

 हे परमात्मा हमें जीने का ढंग दो   खुशियों के रंगों को भरने की कूची दो  वाणी में संयम दो,विचारों में दिव्यता का प्रकाश दो   भावों में खूबसूरती का वर दो   सुमधुर भावों का संग दो   नयनों से भरकर जो मस्तिष्क   में उतर जाये मनोहारी पुष्प वाटिका बना दो  ब्रह्मांड के आचरण की सौम्यता दो  माधुर्य रस का सरस क्षीर बना दो  मुस्कराहट का सबब बन दिलों को  हर्षोल्लास से भाता जाऊं  ऐसा अमृत कुंभ बना दो  हे परमात्मा मुझे जीने का ढंग दो 

लङकी

 सपनों में सोचा था, सपना तो सपना ही होता है एक दिन अपना भी सपना सच हो गया  परमात्मा का इशारा हुआ,  आंखों को दीदार हो गया  हम सबका सपना साकार हो गया  एक दिन वो हकीकत में मिल गयी  सादगी उसकी  दिल को भा गयी  एक बिटिया हमको पसंद आ गयी  दिल की सच्ची वो आंखों में मस्ती भरी सुनहरी तितली सी उडती वो नजर आ गयी  हम सब के दिलों में वो घर कर गयी  एक बिटिया - -  हमने जीवन में उसको घर कर लिया  मानों जन्मों का बंधन हमने तय कर लिया।  कोमल रिश्तों से बंधन बांधने को वो मायके से ससुराल की हो गयी  लाडली वो गोस्वामी परिवार की  कली बागों में महकती रहे खिली-खिली  हमने फूलों का उसे गूलदस्ता कर लिया  असूजा परिवार की रौनक वो बनकर रहेगी  हम सब प्रेम से उसकी बागवानी करेगें  अपने गुणों से वो सबका नाम रोशन करेगी  एक घर में वो पली दूजे घर में राज करेगी।   हे परमात्मा तुम हम पर कृपा रखना सुन्दर माला  में हमको पिरोये रखना - -कमी एक दूजे की हम  माफ करेगें, होठों पर सदा मुस्कान रखेगें  श्रीराम ...

खुशीयां

खुशियां पायी नहीं जाती खुशियों को ढूढना पङता हैं  खुशी भीतर की एक सुन्दर अवस्था है  माना की जीवन में बहुत  व्यवस्ता है  खुशियों को खोजना पङता है  मिल ही जाती है खुशी मदमस्त हवाओं में  बगीचों की क्यारियों में मुस्कराती कलियों में  फूलों की महकती हवाओं में   सच्ची खुशी पाने की चाह में   निकल पङे तलाश में  मन बहलाने को बहुत कुछ मिला  दिल बहला पर टिकाऊ खुशी ना मिला   बिखर गये संसार में  पाने को बहुत कुछ  बंट गये बाजार में  कीमत कौडियों की ना रही  ठोकरों ने  दिया तोङ खण्डित भी हुए इस कदर  कोई हकीम ना मिला इलाज को  तेवर हमेशा ज्यों के त्यों  टस से मस ना हुई ऐठ   कुछ लचीलापन होता तो कहीं  जगह बना पाते अकङे रहे  बांस की तरह तो खोखले से  सूखते रहे सूख कर मुरझा गये