बुद्ध होते तो युद्ध ना होता कारण बुद्ध को हमने मंदिरों में पूजाघरों में सीमित कर दिया जीवन में नहीं उतारा ,द्वंदों ने - अंहकार में अपना कद बङा कर लिया युद्ध तो अवश्यभावीथहो गया विवेक की आंखों पर पर्दा पङ गया युद्ध ने दस्तक दी ,विनाश का तांडव चला अंहकार-अंहकार से टकराया मासूमियत झूलस-झूलस कर अंतहीन दर्द की कहानी लिख रही थी गोले ,बारूद ने शहर के शहर विनाश किये सभ्यता को एक युग पीछे की ओर धकेल दिया अशोका ने भी बहुत युद्ध लङे और कंलीगा बने दर्द की आह से जब कराहा निकली ,तब आह की कोख से बुद्ध जागा विनाश की अंतहीन लीला ने मन विचलित हुआ । शक्ति युद्ध में भी थी, पर विनाश की लीला चली अंत में शक्ति के रुप में जब बुद्ध जागा जीत तो बुद्ध की ही हुई
मैं मोहब्बत हूं मैं हर रिश्ते की आत्मा हूं भावनाओं में रहती हूं ,जज्बातों की कहानी हूं मैं दिलों में बसती हूं, संसार को सुन्दर बनाती हूं मैं मोहब्बत हूं ,कोई कुछ भी कहे ,मेरी जङें बहुत गहरी हैं हंसती हूं ,गुनगुनाती हूं चेहरे पर मुस्कराहट लिए हर गम छिपाती हूं , मैं मोहब्बत हूं हर हाल में मुस्कराती हूं कभी - कभी दुनियां के झमेलों में उलझ जाती हूं उदासी की चादर ओढ़े दुखी हो जाती हूं मैं मोहब्बत हूं फिर गुनगुनाती हूं हवाओं में ठहर रिमझिम बरसात बन जाती हूं मन के सारे द्वंद मिटा खिली.धूप बन जाती हूं पुष्पों में सुगन्ध बन हवाओं में घुलमिल इतराती हूं ।