ए जिन्दगी जरा और ठहर कुछ और पहर थोङा और जी लूं जरा. मन का कहा कुछ कर लूं जरा कुछ और सुन लूं जरा मनमानी सी मस्तियां कर लूं मैं भी आज मेरे हक में है हवा चली है जुल्फों को समेट लूं मैं भी जरा मीठी हवा की मीठी कोशिश में चहलकदमी कर लूं मैं भी जरा सी पंख फैलाकर आसमान की ऊचांइयों में बन पंछी उङ लूं मैं भी मुस्करा कर नील गगन से वसुंधरा की छवि निहारूं प्रकृति की खूबसूरती पर वारि जाऊं फूलों सी महक लूं मैं भी जरा सी गुजरूं जिधर से एक हलचल मचा दूं एक हुनर अपने में निखार लूं जरा सा अपनी खूशबू हवाओं में बिखेर एक खूबसूरत कहानी लिख दूं अपने
पङ लिखकर गया है लंदन बेटा मेरा बङा ही हैंडसम बचपन से उसके सपने ऊंचे ऊँचा पद ऊंची शान बङी जाब बङी पहचान डालर में वो income पाता पिज्जा बर्गर का वो फेन बारह घंटे आनलाईन रहता Busy हूं वो हरपल कहता समय व्यवस्था इतनी खाना भी काम के टेबल पर मंगवाता तरक्की हो बच्चों की इसमें हमारी भी खुशी देश हो या विदेश बच्चे रहें खुशहाल भेजें हम दूर रहकर ही उनको दुआएं कट जायेगीं हमारे जीवन की बाधाऐं आधा जीवन बीत गया हमारा बाकी बचा भी कट जायेगा । पङोसी हमारे बङे ही अच्छे आकर रोज हालचाल वो पूछते दवा,राशन ,फल,सब्जी का रखते ध्यान पङोसी हमारे बङे ही दयावान करते वो दिल से सम्मान प्रभु भक्ति में मन लगाते हैं सादा भोजन हम पाते हैं