Skip to main content

कहानी

आकाश ने सुनाई अपनी कहानी 

घिर आया मेघों का घेरा काले घने ‌‌ 

मेघों से छाया घोर अंधेरा लुप्त हुआ सवेरा 

रौद्र रुप धारण किया मेघों ने फिर घर्षण हुआ 

दामिनी जब चमकी भय से कितनों का दिल ‌‌‌‌‌दहला   

फिर बरसा आकाश से पानी अंतहीन अश्रुओं का सैलाब‌ 

वसुन्धरा हुई पानी -पानी ,प्यासी थी मानों कब से 

समा गई  स्वयं में, आकाश से बरसता जल अमृत 

हरी-भरी समृद्ध हुई वसुन्धरा ओढ़ी हरियाली की ओढ़नी 

जलाशयों में भरा पानी , वृक्षों की ऊंची शाखाएं 

शीतल समीर का झोंका पत्ता -पत्ता बजाता ताली

मन हर्षाता , वृक्षों की डालियों पर पड़ गई पींगे 

झूला झूलन को सखियों का मन रीझे ‌‌

आओ हरियाली का उत्सव आया 

खुशहाली का सावन‌ आया मौसम यह मनभावन आया 

देख वसुन्धरा पर हरियाली आकाश ने सतरंगी इन्द्रधनुष सजाया , नील गगन में उमड़ -घुमड़ कर फिर मेघों का समूह बनाया ‌,बरस-बरस‌कर सावन में सुख-समृद्धि की हरियाली ‌‌‌‌‌लाया। 


वसुन्धरा पर आ गया था हरियाली उत्सव 

आकाश से बरसता जल अमृत ‌


मौसम वर्षा का था

नील गगन में मेघों

का राज था

मेघों का समूह गगन

में उमड़-घुमड़ कर रहा था

विभिन्न आकृतियां बना-बना

कर मानों अठखेलियां

कर रहा था जी भर के

अपनी मनमर्जीयां कर रहा था

मेघों का राज था

श्वेत मखमली मेघों का टुकड़ा

आचनक धरती पर उतर आया

मुझे अपने संग

श्वेत मखमली पालकी में बिठाकर

सुन्दर सपनों की दुनियां में

विहार करने को ले गया

मेघों की गोद और मैं रोमांचित

हृदय की धड़कने प्रफुल्लित

स्वर्ग सी अनुभूति

जादुई एहसास सिर्फ

प्रसन्नता ही प्रसन्नता

अक्लपनिय ,अद्भुत दुनियां

क्षण भर की सही

बेहतरीन बस बेहतरीन

फरिश्तों से मिलन की

अतुलनीय अद्वितीय कहानियां *







 



 













 

आकाश में गरजे मेघ 

धरा को तपते देख ,काली घटाओं का घेरा 

खूब बरसा,वर्षा बनकर मानों बेअंत अश्रु धाराओं का‌ डेरा 


प्रकृति के अद्भुत नजारे 

नज़र के सामने हो पर‌ तुम

एक किनारे ,हम दूसरे किनारे 

नज़र ‌‌‌‌भर कर देखूं तुम्हें 

पर ना दूर कर सकूं कष्ट तुम्हारे ‌‌




Comments

Popular posts from this blog

प्रेम जगत की रीत है

 निसर्ग के लावण्य पर, व्योम की मंत्रमुग्धता श्रृंगार रस से पूरित ,अम्बर और धरा  दिवाकर की रश्मियां और तारामंडल की प्रभा  धरा के श्रृंगार में समृद्ध मंजरी सहज चारूता प्रेम जगत की रीत है, प्रेम मधुर संगीत है  सात सुरों के राग पर प्रेम गाता गीत है प्रेम के अमृत कलश से सृष्टि का निर्माण हुआ  श्रृंगार के दिव्य रस से प्रकृति ने अद्भूत रुप धरा भाव भीतर जगत में प्रेम का अमृत भरा प्रेम से सृष्टि रची है, प्रेम से जग चल रहा प्रेम बिन कल्पना ना,सृष्टि के संचार की  प्रेम ने हमको रचा है, प्रेम में हैं सब यहां  प्रेम की हम सब हैं मूरत प्रेम में हम सब पले  प्रेम के व्यवहार से, जगत रोशन हो रहा प्रेम के सागर में गागर भर-भर जगत है चल रहा प्रेम के रुप अनेक,प्रेम में श्रृंगार का  महत्व है सबसे बड़ा - श्रृंगार ही सौन्दर्य है -  सौन्दर्य पर हर कोई फिदा - - नयन कमल,  मचलती झील, अधर गुलाब अमृत रस बरसे  उलझती जुल्फें, मानों काली घटायें, पतली करघनी  मानों विचरती हों अप्सराएँ...  उफ्फ यह अदायें दिल को रिझायें  प्रेम का ना अंत है प्रेम तो अन...

धुएं की गुलामी

मार्डन कहलाने की लत जो लगी  धिक्कार .... शर्मसार ...गुलाम होते विचार  स्वयं का स्वयं पर ही नहीं अधिकार .... स्वयं के नाश का अंधा बाजार  झूठी गुलामी की बेड़ियां   मौत के सामान का अंधा बाजार  ना कोई अपना ना पराया  धुएं में ढूंढते खुशियों का संसार  क्या बनाओगे अपनी तकदीर  जब गिरफ्त में हो धुएं की गुलामी की जंजीर  लौट आओ ... धुएं के गुबार से वरना एक दिन आयेगा  धुएं की गिरफ्त में फंसे नौजवानों  आज तुम धुएं को स्वयं में समाते हो  कल जब धुआं तुममें  अपना घर बना लेगा  फिर कुछ ना बच पायेगा  पछतावे के सिवा कुछ भी हाथ ना आयेगा  मार्डन कहलाने का सारा भूत उतर जायेगा  धुएं में सब स्वाहा हो जायेगा ...

जेब खर्च

 आज फिर जेब खर्च की खनक ने ली अंगड़ाई है   सारे जहां की दौलत जेब  खर्च  में समायी है   मन की उमंगों ने की दौङ लगाई है  किसी ने मेहनताना तो, किसी ने नेक कमाया है   चेहरे पर  खुशियों की चमक रंग लाई  है   मानों खरीद  लेगें सारा जहां  सारा आसमान ही सिर पर उठाया है जेब खर्च का सरुर जो मन में छाया है   मन में बेफिक्र सा गरुर है  गरुर में अपनत्व  का एहसास  है  मेहनताने में से बांटा जो जेब खर्च है उसमें में  अपनेपन का एहसास है देकर खुशियां वो भी मुस्कराया  दोनों का दिल भर - भर आया है  जिसने जेब खर्च दिया है ,वही तो अपना खास है  मेरे चेहरे की रौनक  देख वो सूकून  पाता है  मुझे मुस्काते देख वो मन ही मन हर्षाता है  जेब खर्च तो बहाना है ,वो मुझे और मैं उसे  खुशियों रहने के देते बहाने  हैं  . वो मेरा अपना है यही मेरा सबसे बङा खजाना है  .. जेब खर्च  किसी अपने का दिया हुआ सबसे बङा तोहफा  है  उसी में तो छिपा सारे जहां के ...