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Showing posts from March 24, 2025

पतंग

 सपनों के पंख लगाकर    परियों के देश चली  उङी - उङी रे पतंग मेरी  बादलों के संग चली  चांदी की पालकी पर  चंदा मामा के घर  चली  ऊंची-ऊंची उङान भरी  उडी- उङी रे पतंग मेरी  सपनों के जहां चली  ढील देते मैं ढील देते चली  पतंग स्वतंत्रता से जाने कौन  से  जहां चली .. उङी- उङी पतंग मेरी  एक जहां से दूजे जहां चली  विदाई  की घङी में  डोर टूटी और पतंग मेरी नये जहां चली।