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Showing posts from February 15, 2026

खुशीयां

खुशियां पायी नहीं जाती खुशियों को ढूढना पङता हैं  खुशी भीतर की एक सुन्दर अवस्था है  माना की जीवन में बहुत  व्यवस्ता है  खुशियों को खोजना पङता है  मिल ही जाती है खुशी मदमस्त हवाओं में  बगीचों की क्यारियों में मुस्कराती कलियों में  फूलों की महकती हवाओं में   सच्ची खुशी पाने की चाह में   निकल पङे तलाश में  मन बहलाने को बहुत कुछ मिला  दिल बहला पर टिकाऊ खुशी ना मिला   बिखर गये संसार में  पाने को बहुत कुछ  बंट गये बाजार में  कीमत कौडियों की ना रही  ठोकरों ने  दिया तोङ खण्डित भी हुए इस कदर  कोई हकीम ना मिला इलाज को  तेवर हमेशा ज्यों के त्यों  टस से मस ना हुई ऐठ   कुछ लचीलापन होता तो कहीं  जगह बना पाते अकङे रहे  बांस की तरह तो खोखले से  सूखते रहे सूख कर मुरझा गये 

ऐ जिन्दगी ठहर जरा

 ए जिन्दगी जरा और ठहर  कुछ और पहर  थोङा और जी लूं जरा. मन का कहा कुछ  कर लूं जरा  कुछ और सुन लूं जरा  मनमानी सी मस्तियां कर लूं मैं भी आज मेरे हक में है हवा चली है दिल में मची खलबली है  फुर्सतों की घङियां मिली हैं  जुल्फों को समेट लूं मैं भी जरा मीठी हवा की मीठी कोशिश में  चहलकदमी कर लूं मैं भी जरा सी  पंख फैलाकर आसमान की ऊचांइयों में  बन पंछी उङ लूं मैं भी मुस्करा कर नील गगन से वसुंधरा की छवि निहारूं  प्रकृति की खूबसूरती पर वारि जाऊं  फूलों सी महक लूं मैं भी जरा सी  गुजरूं  जिधर से एक हलचल मचा दूं  एक हुनर अपने में निखार लूं जरा सा  अपनी खूशबू हवाओं में बिखेर एक खूबसूरत  कहानी लिख दूं ,जो सबके दिल के करीब हो पङे जो कहे सब ऐसे ही खुशनसीब हो ।