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खुशीयां

खुशियां पायी नहीं जाती खुशियों को ढूढना पङता हैं 

खुशी भीतर की एक सुन्दर अवस्था है 

माना की जीवन में बहुत  व्यवस्ता है 

खुशियों को खोजना पङता है 

मिल ही जाती है खुशी मदमस्त हवाओं में 

बगीचों की क्यारियों में मुस्कराती कलियों में 

फूलों की महकती हवाओं में 

 सच्ची खुशी पाने की चाह में 

 निकल पङे तलाश में 

मन बहलाने को बहुत कुछ मिला 

दिल बहला पर टिकाऊ खुशी ना मिला 

 बिखर गये संसार में 

पाने को बहुत कुछ

 बंट गये बाजार में 

कीमत कौडियों की ना रही 

ठोकरों ने  दिया तोङ

खण्डित भी हुए इस कदर 

कोई हकीम ना मिला इलाज को 

तेवर हमेशा ज्यों के त्यों 

टस से मस ना हुई ऐठ  

कुछ लचीलापन होता तो कहीं 

जगह बना पाते अकङे रहे 

बांस की तरह तो खोखले से 

सूखते रहे सूख कर मुरझा गये 


Comments

  1. खुशी भीतर मिलेगी बाजार में नही ,बहुत सच लिखा ।

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