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Showing posts from April 10, 2026

बुद्ध होते तो युद्ध ना होता

  बुद्ध होते तो युद्ध ना होता  कारण बुद्ध को हमने मंदिरों में  पूजाघरों में सीमित कर दिया  जीवन में नहीं उतारा ,द्वंदों ने - अंहकार में अपना कद बङा कर लिया  शक्तियों का वर्चस्व चला  युद्ध  तो अवश्यभावी हो गया  निर्बल,असहाय, बलि चढे  विवेक की आंखों पर पर्दा पङ गया  युद्ध ने दस्तक दी ,विनाश का तांडव चला  अंहकार-अंहकार से टकराया मासूमियत झूलस-झूलस कर अंतहीन  दर्द की कहानी लिख रही थी  गोले ,बारूद ने शहर के शहर विनाश किये  सभ्यता को एक युग पीछे की ओर धकेल दिया  अशोका ने भी बहुत युद्ध लङे और कंलीगा बने  दर्द की आह से जब कराहा निकली ,तब आह की कोख से बुद्ध जागा विनाश की अंतहीन लीला ने मन विचलित हुआ । शक्ति युद्ध में भी थी, पर विनाश की लीला चली  अंत में शक्ति के रुप में जब बुद्ध जागा  जीत तो बुद्ध की ही हुई  .