मैने अपने जीवनकाल में सबसे अच्छे से अगर किसी रिश्ते को निभाया है तो वो है मां की भूमिका जो मैने सबसे अच्छे से निभाई है । यूं तो लगभग हर माता-पिता इस रिश्ते को अच्छे से निभाते हैं और अपनी और से बेहतरीन से बेहतरीन परवरिश करते हैं । जब हम परिवार में रहते हैं तो हमारा एक रिश्ता नहीं होता ,हम कई रिश्तों में बंधे होते हैं , मां -बच्चों का रिश्ता,पिता का रिश्ता,दादा-दादी, नाना नानी, चाची ,मामा-मामी ,बुआ मौसी आदि का रिश्ता। हम हर रिशते का उसकी मर्यादा सम्मान, स्नेह से निभाते हैं। परिवार से ही हममें संगठन,और अनुशासन की भावना जागृत होती है। लेकिन जब एक लङकी मां बनती है ,तब वह अपना सर्वस्व लुटा देती है ,अपने बच्चों की परवरिश में ।