थोडा सा प्रोत्साहन""""" थोङा सा प्रोत्साहन टानिक का काम करता है । सफलता और असफ़लता जीवन के दो पहलू हैं। एक ने अपने जीवन में सफलता का भरपूर स्वाद चखा है उसकी सफलता का श्रेय सच्ची लगन ,मेहनत ,दृढ़ -इचछाशक्ति ,उसका अपने कार्य के प्रति पूर्ण- निष्ठां व् उसके विषय का पूर्ण ज्ञान का होना था। और उसके व्यक्तित्व में उसकी सफलता के आत्मविश्वास की छाप भर -पूर थी। वहीं दूसरी तरफ़ दूसरा वयक्ति जो हर बार सफलता से कुछ ही कदम दूरी पर रह जाता है ,उसके आत्म विश्वास के तो क्या कहने, परिवार व् समाज के ताने अपशब्द निक्क्मा ,नक्कारा ,न जाने कितने शब्द जो कानों चीरते हुए आत्मा में चोट करते हुए ,नासूर बन दुःख के सिवा कुछ नहीं देते। उसे कोई चाहिये था जो उसके आत्म विशवास को बड़ा सके, उसे उसके विषय का पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने में सहायता करवाये । जीवन में आने वाले उतार -चढ़ाव कि पूरी जानकारी दें ,और सचेत रहने की भी पूरी जानकारी दे। उसे सरलता का भी महत्व भी समझाया गया, सरलता का मतलब मूर्खता कदापि नहीं है। ...