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Showing posts from 2026
 Club - IWC Rishikesh  District-308  Date -15 -8-26  Project title  Independent day celebration distributed sweets  One more important project- done by Iwc Rishikesh-- बेटी बचाओ बेटी पड़ाओ के tehat   yearly fees of four (4) student decided to give Iwc Rishikesh  One student fees from:- Iwc fund 3,student fees was  given club members individually 🥰 Beneficiary -4  Money spent -3100
 IWC Club Rishikesh District-308 Independence Day eve  NashaMukti Awareness CommunityService Service Humanity Money spent -4,000  Beneficial -40  स्वतंत्रता दिवस की शाम — जागरूकता एवं सेवा आज नीरजा देवभूमि चैरिटेबल trust द्वारा स्वतंत्रता दिवस की शाम एक सुंदर एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें Inner Wheel Club Rishikesh को भी आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में Iwc ki past president member रेखा गर्ग ने बच्चों एवं अभिभावकों को नशा मुक्ति एवं नशे से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया। इस अवसर पर IWC द्वारा अपने बैनर,तले स्टेशनरी सामग्री, खाद्य सामग्री एवं मिठाई का वितरण किया। Member present   President  Ritu Asooja, Secretary Seema Singh, Treasurer Nalini Sharma एवं  Rekha Garg की गरिमामयी उपस्थिति रही।  🇮🇳
IWC Rishikesh –  Distric -308  Charter -2202  Date -15 august  Beneficiary - community  Money spent - Nil sponsor  Project - Promotion of Outdoor Games Project Inner Wheel Club Rishikesh द्वारा Aam Bagh में बच्चों एवं युवाओं को outdoor games के लिए प्रोत्साहित करने हेतु एक विशेष “Promotion of Outdoor Games” Project planned किया गया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों एवं युवाओं में खेल भावना, teamwork, discipline और healthy lifestyle को बढ़ावा देना है। खेलों के माध्यम से उन्हें शारीरिक रूप से सक्रिय रहने तथा टीम भावना के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस project को हमारे Club Secretary, Seema Singh Ji द्वारा generously sponsor किया जा रहा है। Inner Wheel Club Rishikesh का यह प्रयास बच्चों और युवाओं को खेलों से जोड़ने तथा समाज में एक स्वस्थ एवं सकारात्मक वातावरण बनाने की दिशा में एक सुंदर पहल है। 🏏🏆🌿 “Play Together • Grow Together • Stay Healthy”
 IWC Club Rishikesh District-308 Independence Day eve  NashaMukti Awareness CommunityService Service Humanity Money spent -4,000  Beneficial -40  स्वतंत्रता दिवस की शाम — जागरूकता एवं सेवा आज नीरजा देवभूमि चैरिटेबल trust द्वारा स्वतंत्रता दिवस की शाम एक सुंदर एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें Inner Wheel Club Rishikesh को भी आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में Iwc ki past president member रेखा गर्ग ने बच्चों एवं अभिभावकों को नशा मुक्ति एवं नशे से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया। इस अवसर पर IWC द्वारा अपने बैनर,तले स्टेशनरी सामग्री, खाद्य सामग्री एवं मिठाई का वितरण किया। Member present   President  Ritu Asooja, Secretary Seema Singh, Treasurer Nalini Sharma एवं  Rekha Garg की गरिमामयी उपस्थिति रही।  🇮🇳
*ऋषिकेश-इनर व्हील क्लब ऋषिकेश ने एम्स में भर्ती 9 वर्षीय मासूम के किडनी ऑपरेशन के लिए दिया आर्थिक सहयोग*  *"सेवा, मित्रता और मानवता" ही इनर व्हील क्लब का मूल मंत्र- ऋतु असुजा*  *देवभूमि जे के न्यूज* https://devbhumijknews.in/rishikesh-inner-wheel-club-rishikesh-provided-financial-support-for-the-kidney-operation-of-a-9-year-old-child-admitted-in-aiims/   मानवता की ओर एक कदम — नन्हे बच्चे के इलाज में सहयोग आज AIIMS में एक 9 वर्षीय नन्हे बच्चे के किडनी ऑपरेशन के लिए Inner Wheel Club Rishikesh के सदस्यों द्वारा आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया। साथ ही, बच्चे के परिवार को आवश्यक राशन सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। क्लब की सभी सदस्यों ने बच्चे के शीघ्र स्वस्थ होने और उज्ज्वल भविष्य के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। 🙏 हमारा छोटा-सा सहयोग किसी जरूरतमंद परिवार के लिए उम्मीद और सहारा बन सके—यही Inner Wheel की सेवा भावना है। Inner Wheel Club Rishikesh District 308 Service • Friendship • Humanity
 

Real life heros

  Distric -308  Club name :-IWC Rishikesh  Project date :' 26 july  Project title :- patriotic honour Real life heros kargil sheed proud parents  Member atttend -6 Money spent -3000.certificate usetesils  Distric -308 Club -iwc Rishikesh  Subject :-Remembering & salute hounr Kargil Heroes:  Honours the Families of Our Brave Martyrs Certiceficate -for proud parents cargil vijay diwas honour families utencils ..   Money spent -3000  Beneficial - 8 preson

Women empowement

 Inner wheel club Rishikesh                   district 308.            Date 19th july             Project no.6.       Empowering a Needy Woman Towards Self-Reliance       Project - Save the Environment, Empower Women." 🌿♻️ "Choose Newspaper Bags, Not Plastic 🌿♻️ Iwc president Ritu asooja  ✉️

हरेला पर्व

 उत्तराखण्ड के लोकपर्व हरेला के पावन अवसर पर आज इनर व्हील क्लब ऋषिकेश द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर (महाराष्ट्र भवन), ऋषिकेश में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रकृति संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन का संदेश देते हुए क्लब की ओर से विद्यालय परिसर में पौधारोपण किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों को बिस्किट, टॉफ़ी एवं अन्य उपहार भी वितरित किए गए, जिससे बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में क्लब की अध्यक्षा ऋतु असूजा, सचिव सीमा सिंह, कोषाध्यक्ष नलिनी शर्मा, डॉ. ऋतु प्रसाद एवं रेखा गर्ग द्वारा पौधारोपण हेतु पौधे भेंट किए गए। विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया। यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण, सेवा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति इनर व्हील क्लब ऋषिकेश की प्रतिबद्धता का सुंदर उदाहरण रहा।

आओ चरित्रवान बने

आओ चरित्रवान बने  गुणवान बने,विद्ध्यावान बने  आओ कुछ अच्छा सोचें  अच्छा बने,अच्छा करे  अच्छा बनने का  संकल्प करे,आगे बढे  सरिता के जल की भांति   सर्वस्व उद्धार करें,  विकारों को किनारे करें  अपने अस्तितव में जियें  अंहकार के आवरण से  स्वयं को दूषित ना करें  आप स्वयं सिद्धा हैं  स्वयं की छवि ना खराब करें  आत्ममंथन से स्वयं की पहचान करें ।

चल रहा हूं बङ रहा हूं

चल रहा हूं ,बङ रहा हूं  वर्ष पर वर्ष उम्र का सफर तय कर रहा हूं  कुछ चला हूं,कुछ.रुका हूं,कुछ छला हूं  अपने कर्मों का कारवां लेकर चला हूं । रास्तों का मैं भूला हूं  अपनों को छोङकर  अपना जहां बनाने निकला हूं  अपनी जिन्दगी अपने ढंग से जीने चला हूं  कुछ चला हूं ,कुछ रुका हूं कुछ छला हूं  क्यों कहूं जमाने से डरा हूं मैं अपने ही कर्मों का पला हूं  कौन डरा सकता है मुझे मैं डर को धकेल पीछे आगे की और बङा हूं  माना की बहुत कुछ पाया है मैने  फिर भी बहुत कुछ पीछे छोङ आगे बङा हूं  खुश हूं बहुत कुछ पाया मैने  कौन कहता है कि मैं अकेले चला हूं  अपने कर्मों का कारवां लेकर चला हूं  चल रहा हूं ,बङ रहा हूं,  जीवन का चक्र पूरा कर  रहा हूं  जीवन बढने का नाम है धीमे-धीमे से ही सही पर रुकूगा नहीं  रूक गया तो तालाब हो जाऊंगा बहता रहा चलते रहा तो मंजिल पर पहुंच जाओगे  दरिया से सागर ,फिर महासागर हो जाऊंगा ।  

जीना सिखाया

दुनियां ने मुझे जीना सीखाया   ठोकरों पर ठोकरों ने मुझमें मेरा आत्मविश्वास जगाया  जब से मैं टूटा ,जमाना मुझसे रूठा  मैं अकेलेपन से लङा  एक मजबूत इरादा बनकर उठा मैं पूर्णता को प्राप्त हो गया  बिखर-बिखर के सिमटने लगा  मुझमें जुङने का गुण आ गया  धन्यवाद उन लोगों का जिन्होंने  मेरी कदर नहीं जानी  मुझे ठोकरें पर ठोकरें मारी  मैं गिर-गिर के मजबूत हो गया हूं  मुझे अपनी कदर करनी आ गयी  स्वयं की ताकत से परिचित हो गया  मैं इतना तपाया  गया की खरा सोना हो गया  मुझे मेरा अस्तित्व मिल गया  मेरी स्वयं से पहचान हुई मैं धूल -धूल था ,शूलों से घायल अब जीने के काबिल हो गया हूं  मैं खरा सा सोना हो गया हू।

नया अध्याय

  नया अध्याय   Feed Library Write Notification Profile Ritu asooja Abstract 4   नया अध्याय 5 mins   320  जीवन     रंग     अध्याय  तुम कब तक यूँ अकेली रहोगी?", लोग उससे जब तब यह सवाल कर लेते हैं और वह मुस्कुरा कर कह देती है," आप सबके साथ मैं अकेली कैसे हो सकती हूं। (उसकी शांत आंखों के पीछे हलचल होनी बन्द हो चुकी है) " अरे वाह! क्या सीख रही है इन दिनों?", संदली ने कृत्रिम उत्साह दिखाते हुए कहा जिसे जानकी समझ कर भी अनदेखा कर गई"। आखिर संदली ने जीवन के इतने उतार-चढाव देखे थे , कुछ ना कह कर भी संदली ने जानकी को बहुत कुछ कह दिया था जो वह नहीं कह पा रही थी  जानकी जीवन में बस आगे और आगे बड़े कभी पीछे मुड़कर ना देखे ,पीछे मुड़कर देखना भी पड़े तो ,बीते हुए पलों से सबक लेकर बेहतर से बेहतर करे ,क्योंकि कोई भी इंसान ठोकरें खाकर मजबूत और मजबूत ही होता है ,मानसिक रूप से तो अवश्य ,सम्भल कर चलना सीख ही जाता है। और अपने अनुभवों से दूसरों को ठोकरें खाने से बचने के लिए प्रेरणा देता है।  संदली जानती थी की जानकी टूटी है , पर बिखरी नही...

नैसर्गिक पूर्णिमा की रात में

मनचला सा दिल मेरा व्योम में था जा रुका  नैसर्गिक पूर्णिमा की रात में  नक्षत्र सभी दमक रहे  स्वर्णिम रुप था अजब  राग संग रागनी  चंचल-चपल कामिनी  चन्द्रप्रभा बन सज्जाकर जाह्नवी रीझा रहा रही  नैसर्गिक पूर्णिमा की रात में  रजत आभा श्रृंगार से दमक रही सुरसरी  तरल द्रव्य और चांदनी वर्क चढ रहा  असीम कांति बङ रही  निशा संग समीर भी मंद-मंद थी चल रही  वारि लहरें मानों बह-बह के कह रही  चल बैठ आ जरा कुछ पल तो गुजार ले  मन वनकर मनचला खगोल के भूगोल में  विस्मयकारी अन्वेषण करने लगा  वसुन्धरा के श्रृंगार को  बरस-बरस रही थी चन्द्रप्रभा  मनचला सा दिल मेरा  वयोम में जा रुका   तारों की बारात सजी  बरस-बरस रही था चन्द्र द्रव्य  अमृतद्रव्य अंलकार देवनदी रिझा रहा  रजत आभा कांति सुरसरी को भा रही  निसर्ग के सौंदर्य उस पर आलौकिक एश्वर्य की  धनिकता सर्व सम्पन्न हो रहा  अम्बर के एश्वर्य से वसुन्धरा भी सरस रही 

रानी राजरानी

 हां बचपन से मैं अपने मन की राजरानी हूं ,पर यह कदापि नहीं की मैंने अपने को बडा दिखाने के लिए कभी किसी को छोटा समझा हो या नीचा दिखाया हो । मैं एक संयुक्त परिवार में पली-बङी लङकी, जहां जरूरतें तो आपकी सब पूरी होती हैं ,आपके सपने भी ऊँचे-ऊंचे होते हैं,आपको सपने देखने का तो पूरा हक होता है लेकिन सपनों को पूरा करने के लिए सीमायें लांघने की अनुमति नहीं । मेरे भी सपने थे,लेकिन शहर से बाहर जाकर सीमायें लांघना यानि लक्ष्मण रेखा पार करना ,और अगर लक्ष्मण रेखा पार कर ली तो परिवार की नाक कटने के बराबर था । मैने चित्रकला में पी.एच .डी कर ली थी । लेकिन मुझे मेरी कला को अपने और अपने परिवार तक सीमित रखने की आज्ञा थी ।  मेरे सपनों के पंख आसमान की ऊंचाइयां छूने बेताब थे । कई बार कई प्रतियोगिताओं में भाग लेने के निमंत्रण आये पर अपने शहर से बाहर जाने की मुझे नहीं मिली । हमारे दादाजी हर दिन की तरह आज अपनी बालकनी में बैठकर चाय की चुस्कियां ले रहे थे और अखबार पङ रहे थे, अचानक मेरी मां को पास बुलाते हुये  कहा दो दिन बाद  काव्या यानि मुझे लङके वाले देखने आने वाले हैं बात पक्की होते ही वो ,जल्...

जीतना ही लक्ष्य है

 दौङने का वक्त है जीतना ही लक्ष्य है सम्भलना भी ध्येय हो चल तू पर सम्भल कर चल  भागने की होङ में त्रुटियां जो हों अगर सीख ले सबक ले  मार्गदर्शक की भूमिका बना तू बनाकर चल, हौसलों की बनाकर  ढाल प्रश्नों के तू हल निकाल उत्तरों की ना परवाह कर फार्मूलों की सही पकङ मुश्किलों की सही डगर जीत है पक्की अगर सही राह पर चला ऊंच-नीच का सफर रास्तों पर मोङ हों चेतावनी हैं भली ,प्रश्नों की खलबली तनिक सा विश्राम ले ,हल निकल ही जायेगा सम्भल कर जो तू चला दौङ में होगा भी पीछे अगर सही होगी जो तेरी पकङ जीत होगी पक्की फिर मगर विवेक से जो तू चला , कभी दौङा कभी धीमे ही चला कारवां चलता गया मंजिलों का सिलसिला जीत का होगा जश्न उम्मीद की लेकर जो तू मशाल चला 

बुद्ध होते तो युद्ध ना होता

  बुद्ध होते तो युद्ध ना होता  कारण बुद्ध को हमने मंदिरों में  पूजाघरों में सीमित कर दिया  जीवन में नहीं उतारा ,द्वंदों ने - अंहकार में अपना कद बङा कर लिया  शक्तियों का वर्चस्व चला  युद्ध  तो अवश्यभावी हो गया  निर्बल,असहाय, बलि चढे  विवेक की आंखों पर पर्दा पङ गया  युद्ध ने दस्तक दी ,विनाश का तांडव चला  अंहकार-अंहकार से टकराया मासूमियत झूलस-झूलस कर अंतहीन  दर्द की कहानी लिख रही थी  गोले ,बारूद ने शहर के शहर विनाश किये  सभ्यता को एक युग पीछे की ओर धकेल दिया  अशोका ने भी बहुत युद्ध लङे और कंलीगा बने  दर्द की आह से जब कराहा निकली ,तब आह की कोख से बुद्ध जागा विनाश की अंतहीन लीला ने मन विचलित हुआ । शक्ति युद्ध में भी थी, पर विनाश की लीला चली  अंत में शक्ति के रुप में जब बुद्ध जागा  जीत तो बुद्ध की ही हुई  .

मैं मोहब्बत हूं

मैं मोहब्बत हूं ,मैं प्रकृति प्रदत्त अद्भुत नियामत हूं  मुझसे ही संसार का अस्तित्व है  मैं मोहब्बत ना होती तो, संसार बस एक बंजर जमीन होती  मैं मोहब्बत ही तो हर रिश्ते की आत्मा हूं  भावनाओं में रहती हूं ,जज्बातों की कहानी हूं  मैं दिलों में बसती हूं, संसार को सुन्दर बनाती हूं  मैं मोहब्बत हूं ,कोई कुछ भी कहे ,मेरी जङें बहुत गहरी हैं   हंसती हूं ,गुनगुनाती हूं चेहरे पर मुस्कराहट  लिए हर गम छिपाती हूं , मैं मोहब्बत हूं हर हाल में मुस्कराती हूं  कभी - कभी दुनियां के झमेलों में उलझ जाती हूं  उदासी की चादर ओढ़े दुखी हो जाती हूं  मैं मोहब्बत हूं फिर गुनगुनाती हूं  हवाओं में ठहर रिमझिम बरसात बन जाती हूं मन के सारे द्वंद मिटा खिली.धूप बन जाती हूं  पुष्पों में सुगन्ध बन हवाओं में घुलमिल  इतराती हूं ।

जीत हार

  जीत की खुशी मिली हार से जब बहुत लङा जीतने के लिये मैं कई बाजीयां चलता रहा मुश्किलों की चुनौतियां परिक्षा समझ हल करता रहा पश्न पर प्रश्न कठिन मिले ,पर उत्तर पुस्तिका पर भरता रहा हल छिपा था वहीं खोज-बीन चलती रही सामने उत्तर प्रत्यक्ष मिला  हार के जब -जब थकता रहा परिश्रम की चमक अब मेरे व्यक्तित्व में भरी,हार भी क्या  खुश हुई जीत की जब खुशी मिली  मेरा मनोबल मुझसे क्या खूब लङा ,जीतने का जश्न मना प्रश्न भी खुश हुये क्या खूब हमें उत्तर मिले  जीत के हारा बहुत ,हार के जीता बहुत

मां की भूमिका

मां की भूमिका, यहां मैं भूमिका शब्द का उपयोग कर रही हूं ,क्योकि यूं  तो हर माता -पिता का फर्ज होता है अपने बच्चों की परवरिश कर उन्हें एक अच्छा इंसान बनाने का एक अंतराल के बाद मुझे लगा की ,मैने अपने जीवनकाल में सबसे अच्छे से अगर किसी रिश्ते को निभाया है तो वो है मां की भूमिका जो मैने सबसे अच्छे से निभाई है । यूं तो लगभग हर माता-पिता इस रिश्ते को अच्छे से निभाते हैं, अपनी और से बेहतरीन से बेहतरीन परवरिश करते हैं । जब हम परिवार में रहते हैं तो हमारा एक रिश्ता नहीं होता हम कई रिश्तों में बंधे होते हैं , मां -बच्चों का रिश्ता,पिता का रिश्ता,दादा-दादी, नाना नानी, चाची ,मामा-मामी ,बुआ मौसी आदि का रिश्ता। हम हर रिश्ते का उसकी मर्यादा सम्मान और ,स्नेह से निभाते हैं। परिवार से ही हममें संगठन,और अनुशासन की भावना जागृत होती है।  स्त्रियां भावनात्मक रुप से सशक्त है ,इसका उदाहरण है, घर-परिवार यहां तक की समाज में भी उनकी भूमिका । पुरुष वर्ग की भूमिका एक सशक्त वर्ग के रूप में आती है ,जबकि वास्तव में देखा जाये तो, लेकिन जब एक लङकी मां बनती है ,तब वह अपना सर्वस्व लुटा देती है ,अपने बच्चों की पर...

हृषीकेश से ऋषिकेश तक

 शाश्वत- जो सदैव से है ,जिसका ना आदि ना अंत सनातन से सृष्टि की उत्पत्ति हुई  ।  सनातन  यानि  सत्य का विस्तार  सन-जो सत्य है तन यानि विस्तार  जहां से सृष्टि की उत्पत्ति हुई एवं आज जो सृष्टि है वह सनातन के वंशज हैं । देश ,परिस्थिति एवं काल के अनुसार कई शाखायें बन गयीं ,मतभेद अलग-अलग हो गये ,किन्तु मूल में सबके सनातन ही है । सनातन सत्य है शाश्वत है आदि एवं अनन्त है। पहाङों की तलहटी में बसे अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर, पर्वतों की ऊंची-ऊची चोटियां जहां संगीत गाती हैं पर्वतों की कोख से जहां पवित्र नदियों का उद्गम स्थल है । पतित पावनी अमृतमयी मां गंगा के किनारे  सघन वृक्षों की छांव में बैठकर जहां ऋषियों ने घोर तपस्या की ,उस ऋषिकेश धाम की पवित्रता अकथनीय अवर्णनीय आलौकिक है । हृषीकेश जिसको आम बोल-चाल की भाषा में ऋषिकेश ही कहा जाता है । हृषीकेश यानि इन्द्रियों के स्वामी  रैभ्य श्रृषि की कठोर तपस्या मन और इन्द्रियों का संयम की कठोर तपस्या से प्रसन्न हो भगवान विष्णु ने रैभ्य ऋषि को हृषीकेश नारायण के अवतार  में दर्शन दिये ।      ...

ऋतु बंसत प्रसून उद्यान

ऋतु ,प्रसून बंसत उद्यान  केसरिया अरुणिम,वनस्पति केसरिया अर्क  अलकृत धरा स्वर्णिम ब्रह्मांड  ऋतु बंसत फुलवारी ,बहूरंगी छटा महतारी  फूलन सज्जा आंगन बारी, सुगन्धित समीर मन श्रृंगारी सुमन,कुसुम प्रसून,मंजरी ,गेंदा गुलाब, गुडहल,रजनीगंधा  सरसों ,ट्यूलिप सूरजमुखी ,वसुधा प्रवृत स्वर्णिम अंलकृत मनोहारी मनभावन मन ,नाटन करे, हिय पंख फैलाये स्वर्णकार  बंसत की बंसती बहार ,वसुधा करे षुष्प श्रृंगार  निसर्ग अवनि शिल्पकार ,वर्ण कांति प्रसून उद्यान   उल्लासित अंतःकरण ,ऋतुराज ,बंसतबहार  कुसुमकार वरणी साम्राज्य ,पुष्प नृप कौमुदी ,पुष्पराज  देवपुष्प ,देवराज पाटल ,सुवास,मकरंद मन जागे उमंग  ट्यूलिप, गुलाब,गेंदा बुराश गुङहल, मन नर्तन करे बिन थाप  सोलह श्रृंगार निसर्ग व्यवहार अद्भुत चित्रकार।

शहनाईयां

गूंजती हैं शहनाईयां  पर्वतों की वादियां  समीर साजे सरगमे पत्तों की तालियां  पहाङों की ऊचाईयां  भरपूर आजादियां  कायनात रागनियां भूमि संग तरूवर कहे रिश्ते बहुत धरती मां की गोद में जङों की मजबूती का विशालकाय संसार मिट्टी से जुडे  ऊचांइयों पर लिखते कहानियां  हमारी भव्यता की सच्चाईयां  भूमि से सम्बन्धों की गहराईयां  हमारी जङों से ही हमारी उचांइयां  हवाओं की सरगम पर पत्तों की शहनाई  जब बजती हैं,प्रकृति भी झूमती है  और धरती पर सजते हैं हरियाली के ग्रन्थ  वृक्षों के बीजों की भव्यता अपने अस्तित्व का  के अंकुर से निरंतर युगों-युगों से पोषित होती वसुंधरा    

एहसास

मैं मनुष्य जीवन हूं  मैं एहसासों की लहर हूं कैसे ठहर जाऊं  कर्मों की उडान भरने को आजाद  माया के पिजरें में कैद होकर स्वयं ही फंस जाता हूं  मैं खूशबू हूं किसी के हाथ नहीं आती   मैं ठंडी हवा की लहर हूं छूकर उङ जाती हूं  मैं एक मीठा सा एहसास हूं  जो दिल को छू जाती हूं  मैं एक आवाज हूं, दिल के तारों  की सरगम वाणी की झंकार  का एक एहसास जो शब्दों  से बयां करके कर्ण द्वारों से गहराई में  उतर भावों की नौका को पार लगाती हूं । नजरों से छिपकर रहती हूं  पर हर दिल को छू जाती हूं  मैं छिपकर एहसास दिलाती हूं  मैं दिखती नहीं हवाओं में बिखर जाती हूं   मैं पुष्पों में सुगन्ध हूं किसी हाथ नहीं आती हूं   मैं भावों में कैद एक खूबसूरत एहसास हूं  फितरत है उङने की ,पंख नहीं फिर भी उडती हूं  मेरी नजरें जमीं पर आसमां पर विचारों के पंखों से  उडान भर सदूर गगन की अंतहीन ऊचाइयों में  रहस्यमयी दुनियां में लुप्त हो जाती हूं । मैं भावों हूं एहसासों की खूबसूरत बात हूं ।

प्रार्थना

नमस्कार, मंच पर उपस्थित मेरे सह मित्रोॅ को एवं  समस्त माननीय अतिथियों को ..  मेरी राम राम जी सबको । कहते हैं किसी भी अच्छे काम की शुरुआत प्रार्थना से होनी चाहिए ।  अतः मैं आपके समक्ष स्वरचित प्रार्थना प्रस्तुत करने.जा रही हूं ।   मन में लिए शुभ भावना ,परमार्थ हमारी अराधना  सेवा हमारा संकल्प है,परहित हमारा उद्देश्य  मानवता का संग है,जन कल्याण हमारा लक्ष्य है।  व्याधि पीड़ा बन उपचार ,करना है सदा ही परोपकार -2 उपकारी जीवन सद्व्यवहार, परस्पर प्रेम की फसल उगानी . गंगा जल सम अमृत बनकर जन परोपकार ही  करना है  । इनरव्हील ऋषिकेश ने लिया है प्रण निष्काम सेवा का संग्राम स्वच्छंद .. इनरव्हील ऋषिकेश के हौसले है बुलंद .. सेवा के पथ पर डटे रहेगें । -2  परहित हमको प्यारा है  -2  

रोशनी ही सत्य है

रोशनी ही सत्य है  रोशनी में ही गूढ रहस्य है  रोशनी की अठखेलियाँ हैं  अनकही सी पहेलियां हैं रोशनी है तो जिन्दगी है , जिन्दगी है तो रोशनी है रोशनी की सब कहानी  चल रही जिन्दगानी है  तुझ में रोशनी,मुझमें रोशनी  समस्त संसार की रोशनी  ये ब्रह्मांड कायनात की रोशनी  रोशनी से रोशनी में नहाता यह संसार  रोशनी ने लिखी जीवन की कहानी  रोशनी से चल रही सृष्टि सारी कहानी 

जीने के ढंग

 हे परमात्मा हमें जीने का ढंग दो   खुशियों के रंगों को भरने की कूची दो  वाणी में संयम दो,विचारों में दिव्यता का प्रकाश दो   भावों में खूबसूरती का वर दो   सुमधुर भावों का संग दो   नयनों से भरकर जो मस्तिष्क   में उतर जाये मनोहारी पुष्प वाटिका बना दो  ब्रह्मांड के आचरण की सौम्यता दो  माधुर्य रस का सरस क्षीर बना दो  मुस्कराहट का सबब बन दिलों को  हर्षोल्लास से भाता जाऊं  ऐसा अमृत कुंभ बना दो  हे परमात्मा मुझे जीने का ढंग दो 

खुशीयां

खुशियां पायी नहीं जाती खुशियों को ढूढना पङता हैं  खुशी भीतर की एक सुन्दर अवस्था है  माना की जीवन में बहुत  व्यवस्ता है  खुशियों को खोजना पङता है  मिल ही जाती है खुशी मदमस्त हवाओं में  बगीचों की क्यारियों में मुस्कराती कलियों में  फूलों की महकती हवाओं में   सच्ची खुशी पाने की चाह में   निकल पङे तलाश में  मन बहलाने को बहुत कुछ मिला  दिल बहला पर टिकाऊ खुशी ना मिला   बिखर गये संसार में  पाने को बहुत कुछ  बंट गये बाजार में  कीमत कौडियों की ना रही  ठोकरों ने  दिया तोङ खण्डित भी हुए इस कदर  कोई हकीम ना मिला इलाज को  तेवर हमेशा ज्यों के त्यों  टस से मस ना हुई ऐठ   कुछ लचीलापन होता तो कहीं  जगह बना पाते अकङे रहे  बांस की तरह तो खोखले से  सूखते रहे सूख कर मुरझा गये 

ऐ जिन्दगी ठहर जरा

 ए जिन्दगी जरा और ठहर  कुछ और पहर  थोङा और जी लूं जरा. मन का कहा कुछ  कर लूं जरा  कुछ और सुन लूं जरा  मनमानी सी मस्तियां कर लूं मैं भी आज मेरे हक में है हवा चली है दिल में मची खलबली है  फुर्सतों की घङियां मिली हैं  जुल्फों को समेट लूं मैं भी जरा मीठी हवा की मीठी कोशिश में  चहलकदमी कर लूं मैं भी जरा सी  पंख फैलाकर आसमान की ऊचांइयों में  बन पंछी उङ लूं मैं भी मुस्करा कर नील गगन से वसुंधरा की छवि निहारूं  प्रकृति की खूबसूरती पर वारि जाऊं  फूलों सी महक लूं मैं भी जरा सी  गुजरूं  जिधर से एक हलचल मचा दूं  एक हुनर अपने में निखार लूं जरा सा  अपनी खूशबू हवाओं में बिखेर एक खूबसूरत  कहानी लिख दूं ,जो सबके दिल के करीब हो पङे जो कहे सब ऐसे ही खुशनसीब हो ।