गूंजती हैं शहनाईयां
पर्वतों की वादियां
हवाओं की सरगम पर
पत्तों की तालियां
पहाङों की ऊचाईयां
भरपूर आजादियां
कायनात की सरगम
भूमि संग तरूवर के गहरे रिश्ते
धरती मां की गोद में जङों की मजबूती का
विशालकाय संसार मिट्टी से जुडे
ऊचांइयों पर लिखते कहानियां
हमारी भव्यता की सच्चाईयां
भूमि से सम्बन्धों की गहराईयां
हमारी जङों से ही हमारी उचांइयां
हवाओं की सरगम पर पत्तों की शहनाई
जब बजती हैं,प्रकृति भी झूमती है
और धरती पर सजते हैं हरियाली के ग्रन्थ
वृक्षों के बीजों की भव्यता अपने अस्तित्व का
के अंकुर से निरंतर युगों-युगों से पोषित होती वसुंधरा
Comments
Post a Comment