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शहनाईयां

गूंजती हैं शहनाईयां 

पर्वतों की वादियां 

समीर साजे सरगमे

पत्तों की तालियां 

पहाङों की ऊचाईयां 

भरपूर आजादियां 

कायनात रागनियां

भूमि संग तरूवर कहे रिश्ते बहुत

धरती मां की गोद में जङों की मजबूती का

विशालकाय संसार मिट्टी से जुडे 

ऊचांइयों पर लिखते कहानियां 

हमारी भव्यता की सच्चाईयां 

भूमि से सम्बन्धों की गहराईयां 

हमारी जङों से ही हमारी उचांइयां 

हवाओं की सरगम पर पत्तों की शहनाई 

जब बजती हैं,प्रकृति भी झूमती है 

और धरती पर सजते हैं हरियाली के ग्रन्थ 

वृक्षों के बीजों की भव्यता अपने अस्तित्व का 

के अंकुर से निरंतर युगों-युगों से पोषित होती वसुंधरा 



  

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मोहब्बत ही केन्द बिंदू

मोहब्बत ही केन्द्र बिन्दु चलायमान यथार्थ सिन्धु  धुरी मोहब्बत पर बढ रहा जग सारा  मध्य ह्रदय अथाह क्षीर मोहब्बत  ना जाने क्यों मोहब्बत का प्यासा फिर रहा जग सारा  अव्यक्त दिल में मोहब्बत अनभिज्ञ भटक रहा जग सारा  मोहब्बत है सबकी प्यास फिर क्यों है दिल में नफरतों की आग  जाने किस कशमकश में चल रहा है जग सारा  मोहब्बत ही जीवन की सबकी खुराक  संसार मोहब्बत,आधार मोहब्बत  मोहब्बत की कश्ति में सब हो सवार  मोहब्बत ही जीवन  मोहब्बत ही सबका अरमान मोहब्बत ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु  भव्य भाव क्षीर सिंधु,प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु   मध्यवर्ती  हिय भीतर एक जलजला, प्राणी  हिय प्रेम अमृत कलश भरा ।  मधुर मिलन परिकल्पना,  भावों प्रचंड हिय द्वंद  आत्म सागर भर-भर गागर,हिय अद्भुत संकल्पना  संकल्पना प्रचंड हिय खण्ड -खण्ड  मधुर मिलन परिकल्पना,मन साजे नितनयीअल्पना प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु 

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