मैं मनुष्य जीवन हूं
मैं एहसासों की लहर हूं
कैसे ठहर जाऊं
कर्मों की उडान भरने को आजाद
माया के पिजरें में कैद होकर स्वयं ही फंस जाता हूं
मैं खूशबू हूं किसी के हाथ नहीं आती
मैं ठंडी हवा की लहर हूं छूकर उङ जाती हूं
मैं एक मीठा सा एहसास हूं
जो दिल को छू जाती हूं
मैं एक आवाज हूं, दिल के तारों
की सरगम वाणी की झंकार
का एक एहसास जो शब्दों
से बयां करके कर्ण द्वारों से गहराई में
उतर भावों की नौका को पार लगाती हूं ।
नजरों से छिपकर रहती हूं
पर हर दिल को छू जाती हूं
मैं छिपकर एहसास दिलाती हूं
मैं दिखती नहीं हवाओं में बिखर जाती हूं
मैं पुष्पों में सुगन्ध हूं किसी हाथ नहीं आती हूं
मैं भावों में कैद एक खूबसूरत एहसास हूं
फितरत है उङने की ,पंख नहीं फिर भी उडती हूं
मेरी नजरें जमीं पर आसमां पर विचारों के पंखों से
उडान भर सदूर गगन की अंतहीन ऊचाइयों में
रहस्यमयी दुनियां में लुप्त हो जाती हूं ।
मैं भावों हूं एहसासों की खूबसूरत बात हूं ।
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