मैं मोहब्बत हूं ,मैं प्रकृति प्रदत्त अद्भुत नियामत हूं
मुझसे ही संसार का अस्तित्व है
मैं मोहब्बत ना होती तो, संसार बस एक बंजर जमीन होती
मैं मोहब्बत ही तो हर रिश्ते की आत्मा हूं
भावनाओं में रहती हूं ,जज्बातों की कहानी हूं
मैं दिलों में बसती हूं, संसार को सुन्दर बनाती हूं
मैं मोहब्बत हूं ,कोई कुछ भी कहे ,मेरी जङें बहुत गहरी हैं
हंसती हूं ,गुनगुनाती हूं चेहरे पर मुस्कराहट
लिए हर गम छिपाती हूं ,
मैं मोहब्बत हूं हर हाल में मुस्कराती हूं
कभी - कभी दुनियां के झमेलों में उलझ जाती हूं
उदासी की चादर ओढ़े दुखी हो जाती हूं
मैं मोहब्बत हूं फिर गुनगुनाती हूं
हवाओं में ठहर रिमझिम बरसात बन जाती हूं
मन के सारे द्वंद मिटा खिली.धूप बन जाती हूं
पुष्पों में सुगन्ध बन हवाओं में घुलमिल
इतराती हूं ।
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