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जीतना ही लक्ष्य है

 दौङने का वक्त है

जीतना ही लक्ष्य है

सम्भलना भी ध्येय हो

चल तू पर सम्भल कर चल 

भागने की होङ में त्रुटियां जो हों अगर

सीख ले सबक ले 

मार्गदर्शक की भूमिका बना तू

बनाकर चल, हौसलों की बनाकर  ढाल

प्रश्नों के तू हल निकाल

उत्तरों की ना परवाह कर

फार्मूलों की सही पकङ

मुश्किलों की सही डगर

जीत है पक्की अगर

सही राह पर चला

ऊंच-नीच का सफर

रास्तों पर मोङ हों

चेतावनी हैं भली ,प्रश्नों की खलबली

तनिक सा विश्राम ले ,हल निकल ही

जायेगा सम्भल कर जो तू चला

दौङ में होगा भी पीछे अगर

सही होगी जो तेरी पकङ

जीत होगी पक्की फिर मगर

विवेक से जो तू चला ,

कभी दौङा कभी धीमे ही चला

कारवां चलता गया मंजिलों का सिलसिला

जीत का होगा जश्न

उम्मीद की लेकर जो तू मशाल चला 

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