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ऋतु बंसत प्रसून उद्यान


ऋतु ,प्रसून बंसत उद्यान 

केसरिया अरुणिम,वनस्पति केसरिया अर्क 

अलकृत धरा स्वर्णिम ब्रह्मांड 

ऋतु बंसत फुलवारी ,बहूरंगी छटा महतारी 

फूलन सज्जा आंगन बारी, सुगन्धित समीर मन श्रृंगारी

सुमन,कुसुम प्रसून,मंजरी ,गेंदा गुलाब, गुडहल,रजनीगंधा 

सरसों ,ट्यूलिप सूरजमुखी ,वसुधा प्रवृत स्वर्णिम अंलकृत

मनोहारी मनभावन मन ,नाटन करे, हिय पंख फैलाये स्वर्णकार 

बंसत की बंसती बहार ,वसुधा करे षुष्प श्रृंगार 

निसर्ग अवनि शिल्पकार ,वर्ण कांति प्रसून उद्यान 

 उल्लासित अंतःकरण ,ऋतुराज ,बंसतबहार 

कुसुमकार वरणी साम्राज्य ,पुष्प नृप कौमुदी ,पुष्पराज 

देवपुष्प ,देवराज पाटल ,सुवास,मकरंद मन जागे उमंग 

ट्यूलिप, गुलाब,गेंदा बुराश गुङहल, मन नर्तन करे बिन थाप 

सोलह श्रृंगार निसर्ग व्यवहार अद्भुत चित्रकार।

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मोहब्बत ही केन्द्र बिन्दु चलायमान यथार्थ सिन्धु  धुरी मोहब्बत पर बढ रहा जग सारा  मध्य ह्रदय अथाह क्षीर मोहब्बत  ना जाने क्यों मोहब्बत का प्यासा फिर रहा जग सारा  अव्यक्त दिल में मोहब्बत अनभिज्ञ भटक रहा जग सारा  मोहब्बत है सबकी प्यास फिर क्यों है दिल में नफरतों की आग  जाने किस कशमकश में चल रहा है जग सारा  मोहब्बत ही जीवन की सबकी खुराक  संसार मोहब्बत,आधार मोहब्बत  मोहब्बत की कश्ति में सब हो सवार  मोहब्बत ही जीवन  मोहब्बत ही सबका अरमान मोहब्बत ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु  भव्य भाव क्षीर सिंधु,प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु   मध्यवर्ती  हिय भीतर एक जलजला, प्राणी  हिय प्रेम अमृत कलश भरा ।  मधुर मिलन परिकल्पना,  भावों प्रचंड हिय द्वंद  आत्म सागर भर-भर गागर,हिय अद्भुत संकल्पना  संकल्पना प्रचंड हिय खण्ड -खण्ड  मधुर मिलन परिकल्पना,मन साजे नितनयीअल्पना प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु 

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