जश्न मना सफर कर
अंजान हैं राहें, लौटना होगा मगर
यह भी तय है
पगडंडियों की ना परवाह कर
रास्तों की उबड़-खबङ
पैरों में पत्थरों की रगङ
गम ना कर ज़ख्म यह भर जायेगें
हार -जीत की ना तू परवाह ना कर
चल निकल चल चलाचल
ऊंच-नीच की पहाङियां
समीप गहरी खाईयां
रास्ते कट जायेगें
नामुमकिन तो कुछ भी नहीं
तू खुद शहनशाह
तू स्वयं ही अपना बादशाह
सवालों को तू हल कर
बुद्धि,विवेक की कूंजियां
भीतर तेरे पूजियां
रास्तों की ना तू फिक्र कर
ऊंचें पहाड़ हो या गहरी खाईयां
काम तेरा है मंजिल तक पहुँचना
श्रेणी की ना कर लालसा
कर्म की रख प्रधानता
जश्न मना कर ना देर कर
प्रश्नों के तू हल निकाल
जीवन बनेगा तेरा खुशहाल।
Comments
Post a Comment