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जीने के ढंग

 हे परमात्मा हमें जीने का ढंग दो 

 खुशियों के रंगों को भरने की कूची दो 

वाणी में संयम दो,विचारों में दिव्यता का प्रकाश दो 

 भावों में खूबसूरती का वर दो 

 सुमधुर भावों का संग दो 

 नयनों से भरकर जो मस्तिष्क 

 में उतर जाये मनोहारी पुष्प वाटिका बना दो 

ब्रह्मांड के आचरण की सौम्यता दो 

माधुर्य रस का सरस क्षीर बना दो 

मुस्कराहट का सबब बन दिलों को 

हर्षोल्लास से भाता जाऊं 

ऐसा अमृत कुंभ बना दो 

हे परमात्मा मुझे जीने का ढंग दो 


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