Skip to main content

मां शारदे तुमको नमन


मां शारदे तुमको नमन 

शुद्ध बुद्धि का वरदान दो

मां शारदे क्या करुं तुम्हें मैं अर्पण 

निर्मल रहे सदा मन का दर्पण 

मां शारदे सदा-सर्वदा करती रहो कृपा 

करते हैं हम बस यही दुआ 

निर्मल बुद्धि विवेक का का सद ज्ञान दो 

विचारों में सरल विचारों का प्रवाह रहे 

साकारात्मक का दिव्य प्रकाश सदा मिलता रहे 

दान दो‌ दयाभाव,

त्याग,समर्पण से कर्म करें ऐसा मान दो 

हाथ जोड़ करूं मैं वन्दन

मां शारदे तुमको नमन बारम्बार नमन‌  

हे मां क्या करुं तुम्हें मैं अर्पण 

नतमस्तक हो करूं स्वयं को समर्पण 

मां शारदे तुम्हीं ही जीवन आधार हो 

भावों का अद्भुत संचार हो,विचारों का अद्भुत संसार हो 

तुम्हीं से जीवन प्रवाह है तुम्हीं से सब अविष्कार हैं 

तुम्हीं से उन्नति तुम्हीं से प्रगति तुम्हीं विचारों में शक्ति 

मां सरस्वती आप दिव्य हो, बुद्धि का श्रृंगार हो 

विचारों का तेज हो, उत्साह का आगाज कर्मों में प्रत्यक्ष हो 

तुम शाश्वत हो मां शारदे जीवन का वरदान हो 

मां शारदे तुमको नमन नतमस्तक हो बारम्बार नमन ‌

ज्ञान का अमृत दिया विवेक की तुला

अक्षय भंडार बुद्धि का कलश दिया 

मां शारदे करना इतनी कृपा‌, सत्य मार्ग पर सदा चलें ‌‌ 

अभिमान का ना दंभ भरें,अंहकार का अंत करें 

नाकारात्मकता की परछाई ना हम पड़ दूर 

साकारात्मकता का दिव्य प्रकाश सदा मिलता रहे

शुभ विचारों की ज्योत लिये सदा अडिग सदमार्ग पर चलें ‌‌ 

मां शारदे तुमको नमन बारम्बार नतमस्तक हो करुं नमन ।

मां शारदे शुद्ध बुद्धि का वरदान हो 

सदमार्ग पर चलें ज्ञान का प्रकाश दो 

नमन करूं मां शारदे हम सब का उद्धार करो‌।।








Comments

Popular posts from this blog

मोहब्बत ही केन्द बिंदू

मोहब्बत ही केन्द्र बिन्दु चलायमान यथार्थ सिन्धु  धुरी मोहब्बत पर बढ रहा जग सारा  मध्य ह्रदय अथाह क्षीर मोहब्बत  ना जाने क्यों मोहब्बत का प्यासा फिर रहा जग सारा  अव्यक्त दिल में मोहब्बत अनभिज्ञ भटक रहा जग सारा  मोहब्बत है सबकी प्यास फिर क्यों है दिल में नफरतों की आग  जाने किस कशमकश में चल रहा है जग सारा  मोहब्बत ही जीवन की सबकी खुराक  संसार मोहब्बत,आधार मोहब्बत  मोहब्बत की कश्ति में सब हो सवार  मोहब्बत ही जीवन  मोहब्बत ही सबका अरमान मोहब्बत ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु  भव्य भाव क्षीर सिंधु,प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु   मध्यवर्ती  हिय भीतर एक जलजला, प्राणी  हिय प्रेम अमृत कलश भरा ।  मधुर मिलन परिकल्पना,  भावों प्रचंड हिय द्वंद  आत्म सागर भर-भर गागर,हिय अद्भुत संकल्पना  संकल्पना प्रचंड हिय खण्ड -खण्ड  मधुर मिलन परिकल्पना,मन साजे नितनयीअल्पना प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु 

प्रेम जगत की रीत है

 निसर्ग के लावण्य पर, व्योम की मंत्रमुग्धता श्रृंगार रस से पूरित ,अम्बर और धरा  दिवाकर की रश्मियां और तारामंडल की प्रभा  धरा के श्रृंगार में समृद्ध मंजरी सहज चारूता प्रेम जगत की रीत है, प्रेम मधुर संगीत है  सात सुरों के राग पर प्रेम गाता गीत है प्रेम के अमृत कलश से सृष्टि का निर्माण हुआ  श्रृंगार के दिव्य रस से प्रकृति ने अद्भूत रुप धरा भाव भीतर जगत में प्रेम का अमृत भरा प्रेम से सृष्टि रची है, प्रेम से जग चल रहा प्रेम बिन कल्पना ना,सृष्टि के संचार की  प्रेम ने हमको रचा है, प्रेम में हैं सब यहां  प्रेम की हम सब हैं मूरत प्रेम में हम सब पले  प्रेम के व्यवहार से, जगत रोशन हो रहा प्रेम के सागर में गागर भर-भर जगत है चल रहा प्रेम के रुप अनेक,प्रेम में श्रृंगार का  महत्व है सबसे बड़ा - श्रृंगार ही सौन्दर्य है -  सौन्दर्य पर हर कोई फिदा - - नयन कमल,  मचलती झील, अधर गुलाब अमृत रस बरसे  उलझती जुल्फें, मानों काली घटायें, पतली करघनी  मानों विचरती हों अप्सराएँ...  उफ्फ यह अदायें दिल को रिझायें  प्रेम का ना अंत है प्रेम तो अन...

जेब खर्च

 आज फिर जेब खर्च की खनक ने ली अंगड़ाई है   सारे जहां की दौलत जेब  खर्च  में समायी है   मन की उमंगों ने की दौङ लगाई है  किसी ने मेहनताना तो, किसी ने नेक कमाया है   चेहरे पर  खुशियों की चमक रंग लाई  है   मानों खरीद  लेगें सारा जहां  सारा आसमान ही सिर पर उठाया है जेब खर्च का सरुर जो मन में छाया है   मन में बेफिक्र सा गरुर है  गरुर में अपनत्व  का एहसास  है  मेहनताने में से बांटा जो जेब खर्च है उसमें में  अपनेपन का एहसास है देकर खुशियां वो भी मुस्कराया  दोनों का दिल भर - भर आया है  जिसने जेब खर्च दिया है ,वही तो अपना खास है  मेरे चेहरे की रौनक  देख वो सूकून  पाता है  मुझे मुस्काते देख वो मन ही मन हर्षाता है  जेब खर्च तो बहाना है ,वो मुझे और मैं उसे  खुशियों रहने के देते बहाने  हैं  . वो मेरा अपना है यही मेरा सबसे बङा खजाना है  .. जेब खर्च  किसी अपने का दिया हुआ सबसे बङा तोहफा  है  उसी में तो छिपा सारे जहां के ...