Skip to main content

मेरे जाने के बाद

एक बहारों मेरे जाने के बाद 

 मेरा घर आंगन महकाते रहना 

कुछ फूल गुलाब के खिलाते रहना ....

दिलों में अपनत्व के बीज उगाते रहना ....

जब पतझड़ का मौसम आयेगा

मिट्टी में मिल जाऊंगा 

अपनी शाख से जुदा हो जाऊंगा 

मैं भी राख हो जाऊंगा 

जब पतझड़ का मौसम आयेगा 

जो मुझको ना मिली जीते जी 

वो करुणा मुझ पर बहायी जायेगी ‌

काश ! जीते जी मुझे कोई समझ जाता 

मेरे हिस्से की ममता मुझ पर लुटा जाता

तो मैं कुछ पल और मुस्कुरा लेता 

मेरे जाने के बाद मेरे किस्से गड़े जायेंगें 

मुझ पर मोहब्बत लुटायी जायेगी 

मैं तुम सबको बहुत याद आऊंगा 

मेरे ना होने पर चर्चे बहुत मेरे सुनाते जायेंगे

कहानियों में कुछ यादें सुहानी छोड़ जाऊंगा 

पर बहारों तुम फिर भी आती रहना 

इस धरा को प्राणवायु से भरपूर करते रहना

शाखों पर नये पत्ते आते रहेगें 

फल -फूलों से बाग सजते रहेंगे 

बहारों मेरे घर आंगन में कुछ कलियां

 गेंदें की भी खिलाते रहना 

गुलाब से भी आंगन महकाना एक वृक्ष आम का अमरूद 

का उगाना, फल ,फूलों से मेरा घर आंगन भरपूर रखना 

मेरे घर को सुनसान ना रखना चिड़ियों की चहचहाहट 

कोयल की मधुर आवाज़ भी गूंजा न

बहारों मेरे जाने के बाद भी मेरा घर आंगन महकाते रहना 

कुछ फूल गुलाब के खिलाते रहना ....

दिलों में अपनत्व के बीज उगाते रहना .....




 


Comments

Popular posts from this blog

मोहब्बत ही केन्द बिंदू

मोहब्बत ही केन्द्र बिन्दु चलायमान यथार्थ सिन्धु  धुरी मोहब्बत पर बढ रहा जग सारा  मध्य ह्रदय अथाह क्षीर मोहब्बत  ना जाने क्यों मोहब्बत का प्यासा फिर रहा जग सारा  अव्यक्त दिल में मोहब्बत अनभिज्ञ भटक रहा जग सारा  मोहब्बत है सबकी प्यास फिर क्यों है दिल में नफरतों की आग  जाने किस कशमकश में चल रहा है जग सारा  मोहब्बत ही जीवन की सबकी खुराक  संसार मोहब्बत,आधार मोहब्बत  मोहब्बत की कश्ति में सब हो सवार  मोहब्बत ही जीवन  मोहब्बत ही सबका अरमान मोहब्बत ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु  भव्य भाव क्षीर सिंधु,प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु   मध्यवर्ती  हिय भीतर एक जलजला, प्राणी  हिय प्रेम अमृत कलश भरा ।  मधुर मिलन परिकल्पना,  भावों प्रचंड हिय द्वंद  आत्म सागर भर-भर गागर,हिय अद्भुत संकल्पना  संकल्पना प्रचंड हिय खण्ड -खण्ड  मधुर मिलन परिकल्पना,मन साजे नितनयीअल्पना प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु 

प्रेम जगत की रीत है

 निसर्ग के लावण्य पर, व्योम की मंत्रमुग्धता श्रृंगार रस से पूरित ,अम्बर और धरा  दिवाकर की रश्मियां और तारामंडल की प्रभा  धरा के श्रृंगार में समृद्ध मंजरी सहज चारूता प्रेम जगत की रीत है, प्रेम मधुर संगीत है  सात सुरों के राग पर प्रेम गाता गीत है प्रेम के अमृत कलश से सृष्टि का निर्माण हुआ  श्रृंगार के दिव्य रस से प्रकृति ने अद्भूत रुप धरा भाव भीतर जगत में प्रेम का अमृत भरा प्रेम से सृष्टि रची है, प्रेम से जग चल रहा प्रेम बिन कल्पना ना,सृष्टि के संचार की  प्रेम ने हमको रचा है, प्रेम में हैं सब यहां  प्रेम की हम सब हैं मूरत प्रेम में हम सब पले  प्रेम के व्यवहार से, जगत रोशन हो रहा प्रेम के सागर में गागर भर-भर जगत है चल रहा प्रेम के रुप अनेक,प्रेम में श्रृंगार का  महत्व है सबसे बड़ा - श्रृंगार ही सौन्दर्य है -  सौन्दर्य पर हर कोई फिदा - - नयन कमल,  मचलती झील, अधर गुलाब अमृत रस बरसे  उलझती जुल्फें, मानों काली घटायें, पतली करघनी  मानों विचरती हों अप्सराएँ...  उफ्फ यह अदायें दिल को रिझायें  प्रेम का ना अंत है प्रेम तो अन...

शारदीय नवरात्रे

वातावरण में देवताओं के शंखनाद      शुभ मूहुर्त का आगाज         भेजी है  माता रानी ने खुशियों की सौगात । शारदीय नवदुर्गा का धरा पर आगमन     हर्षित हो झूमे नाचे गाये मन  बज रहे वीणा के तारों पर सरगम    दिन हैं शुभ,बगिया में खिल रही दूब       श्रृंगारित वसुन्धरा मन उपवन       सुगन्धित पुष्प, धूप आरती  दीप प्रज्वलित प्रत्येक देवालय घर आंगन   शारदीय नवरात्री की महिमा आपार   शक्तियों से शक्ति का लेकर अवतार   अवतरित धरा पर करने भक्तों का उद्धार ..