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ऋषिकेश यात्रा



 ऋषियों की तपस्थली ऋषिकेश भारत का स्वर्ग..  जी हां आपको यकीन  नहीं होगा ..त्रेता युग में पांडवों ने यहीं से अपने स्वर्ग  जाने की यात्रा प्रारम्भ की थी... तो आइये आपको ॠषिकेश के पवित्र स्थलों की यात्रा करवाते हैं ....

गंगोत्रि ... में गौमुख  से प्रवाहित मां भागीरथी अनेक पहाडी स्थलों से होती हुयी .. सर्वप्रथम  मैदानी स्थल ऋषिकेश से ही होकर  हरिद्वार आदि भारत  के अनेक  राज्यों में बहती है ...

सर्वप्रथम  ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट .. कहते .हैं त्रिवेणी घाट पर तीन  नदियों का संगम  होता है ..गंगा .अलकनंदा और सरस्वती इसलिए  इस घाट का नाम  त्रिवेणी घाट  रखा गया ...

त्रिवेणी घाट  की संध्या कालीन  आरती बेहद ही अच्छी होती मन भक्ति के रंग में रंग जाता है ....

त्रिवेणी घाट  आरती का दृश्य....

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मोहब्बत ही केन्द्र बिन्दु चलायमान यथार्थ सिन्धु  धुरी मोहब्बत पर बढ रहा जग सारा  मध्य ह्रदय अथाह क्षीर मोहब्बत  ना जाने क्यों मोहब्बत का प्यासा फिर रहा जग सारा  अव्यक्त दिल में मोहब्बत अनभिज्ञ भटक रहा जग सारा  मोहब्बत है सबकी प्यास फिर क्यों है दिल में नफरतों की आग  जाने किस कशमकश में चल रहा है जग सारा  मोहब्बत ही जीवन की सबकी खुराक  संसार मोहब्बत,आधार मोहब्बत  मोहब्बत की कश्ति में सब हो सवार  मोहब्बत ही जीवन  मोहब्बत ही सबका अरमान मोहब्बत ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु  भव्य भाव क्षीर सिंधु,प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु   मध्यवर्ती  हिय भीतर एक जलजला, प्राणी  हिय प्रेम अमृत कलश भरा ।  मधुर मिलन परिकल्पना,  भावों प्रचंड हिय द्वंद  आत्म सागर भर-भर गागर,हिय अद्भुत संकल्पना  संकल्पना प्रचंड हिय खण्ड -खण्ड  मधुर मिलन परिकल्पना,मन साजे नितनयीअल्पना प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु 

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