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चल चलाचल

चल चलाचल  चलाचल 

आगे की ओर तू बढा चल 

समय की रफ्तार के संग बहा चल 

किन्तु भेङ चाल ना बनाकर 

 कदम वही बढाना ,जो सुगामी हो 

बुद्धि का सदुपयोग भी करते रहना 

 चलना है बस आगे की ओर.. पीछे से 

सबक भी तू लेते रहना.. भूल ना जाना उन राहों को जिन पर 

चलकर चलना सीखा तूने .. आगे की ओर बढना सीखा तूने

चल चलाचल चल चलाचल  आगे की ओर बढा चल 

नये अनुभवों का ताना - बाना जीवन  है माना आना जाना 

फिर  भी कुछ अच्छे कर्मो के निशान तू छोङ चलाचल 

गया वक्त  लौटकर नहीं आता पर सफर पर है तू ..

आंनद ले नयनों के केनवास पर संजो ले बेहतरीन पल 

पलकों के दरवाजे में बंद करके यादों के झरोखों से 

दिल बहला लेना उन बेहतरीन पलों को याद  करके 

उन पर चलते रहना कभी मत छोडना सफर ..

पर फिर शाम को घर लौट के आना ..

अपनों के संग थोङा हंसना गाना जीवन  के अनुभव  बांट लेना 

धीरे- धीरे ही सही कुछ - कुछ  कदम आगे की 

और बढाते रहना ..रुक गये तो विकार आ जायेगें 

आलस अपने मायाजाल से घेर लेगा 

फिर आगे बढना इतना आसान ना होगा 

उलझनों की गांठें खोलते-खोलते समय अपनी 

रफ्तार के साथ आगे बढ जायेगा ..इसलिए  

समय की रफ्तार  के साथ  आगे की ओर बढते रहना 

गया वक्त  लौटकर  नहीं आयेगा ..इसीलिए  कहती हूं मैं भी 

अकसर अपने कर्मों के निशान  छोङ जाना ...


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