Skip to main content

सत्य की खोज


जानते तो सब हैं... पर जानना नहीं चाहते... भ्रम में ही रहना पंसद है सबको... जब भ्रम बेहद खूबसूरत हो... तो खूबसूरती में ही कुछ पल रह लेना बेहतर है.. हाथ में खिलौना पकड़ा कुछ पल बच्चों का दिल बहलता है... बेहतर है... बस ऐसे ही जीवन कट रहा है हम मनुष्यों का.... 


 *सत्य की खोज... निकल पड़ी सत्य की खोज में... जाना *सत्य तो मौन है*... सत्य शांति का महासागर **

सत्य प्रदर्शन नहीं करता.. *सत्य तो स्वयं सिद्धा स्वयं में पूर्ण है....

आकर्षणों की भीड़ मे... उजालों की चकाचौंध में सत्य नहीं है..  यह सब तो नश्वर है.. दिखावा है, मन को बहलाने का साधन है... सत्य तो अजन्मा है... 

सत्य मात्र किरणों का प्रकाश नहीं.... उजालों काअम्बार ही नहीं... **सत्य स्वयंमेव सूर्य है **जिसके  आगे हम सब राख हैं.... अस्तित्व मनुष्य का धरती पर... तन के पिंजरे में प्राण... प्राणों ने छोड़ा तन मिटा इंसान का नामोंनिशान... 

इंसान के शुभ कर्म ही उसकी पहचान है... रह जाना भावों का समुंदर विचारों का कौलाहल... रसायनों का उठता कोहराम है.... माना की रसायनों की शक्ति.... शक्ति में ऊर्जा... 

ऊर्जाओं का संतुलन... शक्तियों का स्रोत है... 

जीवन मे सत्य है या सत्य में जीवन है.... 

मनुष्य तन मात्र  गिनती के वर्षो की पहचान है... गिनती का छोटा या बडा होना अलग बात है.... तन में जो प्राण हैं, वो शाश्वत हैं... तन के चोला बदलना नियम है... 

सत्य शाश्वत है, महाशक्ति,महा ऊर्जा है सत्य को जान पाना अकल्पनीय है... सत्य की खोज अखण्ड सूर्य के तेज के सामान है.... 




Comments

Popular posts from this blog

मोहब्बत ही केन्द बिंदू

मोहब्बत ही केन्द्र बिन्दु चलायमान यथार्थ सिन्धु  धुरी मोहब्बत पर बढ रहा जग सारा  मध्य ह्रदय अथाह क्षीर मोहब्बत  ना जाने क्यों मोहब्बत का प्यासा फिर रहा जग सारा  अव्यक्त दिल में मोहब्बत अनभिज्ञ भटक रहा जग सारा  मोहब्बत है सबकी प्यास फिर क्यों है दिल में नफरतों की आग  जाने किस कशमकश में चल रहा है जग सारा  मोहब्बत ही जीवन की सबकी खुराक  संसार मोहब्बत,आधार मोहब्बत  मोहब्बत की कश्ति में सब हो सवार  मोहब्बत ही जीवन  मोहब्बत ही सबका अरमान मोहब्बत ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु  भव्य भाव क्षीर सिंधु,प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु   मध्यवर्ती  हिय भीतर एक जलजला, प्राणी  हिय प्रेम अमृत कलश भरा ।  मधुर मिलन परिकल्पना,  भावों प्रचंड हिय द्वंद  आत्म सागर भर-भर गागर,हिय अद्भुत संकल्पना  संकल्पना प्रचंड हिय खण्ड -खण्ड  मधुर मिलन परिकल्पना,मन साजे नितनयीअल्पना प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु 

भव्य भारत

 भारत वर्ष की विजय पताका सभ्यता संस्कृति.                की अद्भुत गाथा ।       भारतवर्ष देश हमारा ... भा से भाता र से रमणीय त से तन्मय हो जाता,        जब-जब भारत के गुणगान मैं गाता । देश हमारा नाम है भारत,यहां बसती है उच्च        संस्कृति की विरासत । वेद,उपनिषद,सांख्यशास्त्र, अर्थशास्त्र के विद्वान।            ज्ञाता । देश मेरे भारत का है दिव्यता से प्राचीनतम नाता । हिन्दुस्तान देश हमारा सोने की चिङिया कहलाता।  भा से भव्य,र से रमणीय त से तन्मय भारत का।             स्वर्णिम इतिहास बताता । सरल स्वभाव मीठी वाणी .आध्यात्मिकता के गूंजते शंखनाद यहां ,अनेकता में एकता का प्रतीक  भारत मेरा देश विश्व विधाता । विभिन्न रंगों के मोती हैं,फिर भी माला अपनी एक है । मेरे देश का अद्भुत वर्णन ,मेरी भारत माँ का मस्तक हिमालय के ताज सुशोभित । सरिताओं में बहता अमृत यहाँ,,जड़ी -बूटियों संजिवनियों का आलय। प्रकृति के अद्...
हिय पयिस्वनी एक आग धधकती  लहरे तट आकर मचलती  जज्बात जलजला चक्रवात लाता  छिन्न - भिन्न परिवेश कर जाता ख्याल मंथन परिक्षा दौर चलाता चित्त विचलित दूरभाषी बनकर  पन्ने पलट तहें खोलता रह जाता   अमूर्त सब मूर्त बनकर  परिदृश्य भूतकाल दोहराता  कुछ सीख सबक दे जाता  चंचल मन चित को समझाता  चिंगारी,तिलमिलाती दिल जलाती ।  तरंगें व्याकुल कर हिय तूफान मचाती  कर्मों की खेती मनचाही फसल उग,  भद्दे रंग भर अब क्यों रोता  आभामंडल रंग अलबेले  प्राणी तू प्रिय रंग ही लेना  अपने कैनवास में चित्र बनाना।  जलन धधकती है अंगारों सी  जाने वो कौन सी चाहत है,जो अधूरी सी है।   अद्भुत आभामंडल रंग अलबेले हैं  रंग प्रेम भर मन और लगा जंदरा  शहर कैसा हर शक्स चातक सा  है ओढ़ अमीरी चोला, इसांन बहुत अक आकांक्षा घनिष्टता की,देने को गैरियत ही क्यों है  पूर्णता को भटकता ये मानव अपूर्णता की फितरत करता क्यूँ है।    एक कसक की कैसी ठसक है, दिल  कहानी है तुमको मैंने सुनानी  मेरी कहानींॉ तुम्हारी कहा...