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दिल की आवाज़..... Part (1)


 दिल कह रहा है...)

        **** हाथ में सूर्ख लाल रंग का चूड़ा**** 

नयी-नवेली दुल्हन का पहला श्रृंगार उसके चेहरे की रौनक तो मानों "चौदहवीं का चांद" ****

सिद्धार्थ और नंदनी की शादी को आज दो दिन हो गये थे , शादी के बाद की लगभग सभी रस्में हो गयीं थीं |  सिद्धार्थ और नंदनी अपने कमरे में आराम कर रहे थे | तभी सिद्धार्थ नंदनी का हाथ अपने हाथ में लेकर ..... नंदनी भी जानबूझ कर बोलो क्या कहना चाहते हो * सिद्धार्थ ‌, नंदनी आफिशियली हमारी शादी हो ही गयी ,..... नंदनी तो क्या ?  सिद्धार्थ नंदनी से...  मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूंगा ,और मैं ... नंदनी क्या ?  सिद्धार्थ जल्दी सो जाओ कल पैकिंग भी करनी है , परसों हमें अपने पहले हनीमून के लिए पहाड़ों की रानी मसूरी भी जाना है | पहला हनीमून और दूसरा हनीमून कहां ?   सिद्धार्थ एक महीने बाद सिंगापुर में ......  सिद्धार्थ और नंदनी अपने जीवन की नयी शुरुआत की मीठी यादों में खो गये ....


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मोहब्बत ही केन्द्र बिन्दु चलायमान यथार्थ सिन्धु  धुरी मोहब्बत पर बढ रहा जग सारा  मध्य ह्रदय अथाह क्षीर मोहब्बत  ना जाने क्यों मोहब्बत का प्यासा फिर रहा जग सारा  अव्यक्त दिल में मोहब्बत अनभिज्ञ भटक रहा जग सारा  मोहब्बत है सबकी प्यास फिर क्यों है दिल में नफरतों की आग  जाने किस कशमकश में चल रहा है जग सारा  मोहब्बत ही जीवन की सबकी खुराक  संसार मोहब्बत,आधार मोहब्बत  मोहब्बत की कश्ति में सब हो सवार  मोहब्बत ही जीवन  मोहब्बत ही सबका अरमान मोहब्बत ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु  भव्य भाव क्षीर सिंधु,प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु   मध्यवर्ती  हिय भीतर एक जलजला, प्राणी  हिय प्रेम अमृत कलश भरा ।  मधुर मिलन परिकल्पना,  भावों प्रचंड हिय द्वंद  आत्म सागर भर-भर गागर,हिय अद्भुत संकल्पना  संकल्पना प्रचंड हिय खण्ड -खण्ड  मधुर मिलन परिकल्पना,मन साजे नितनयीअल्पना प्रेम ही सर्वस्व केन्द्र बिन्दु 

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