March 21, 2026 सृष्टि के आदिकाल से अनन्त काल तक भावों में बहती है काव्य रस धार कविता शाश्वत है,अमर है,अजन्मा है कविता अनन्त है ,कविता कल भी थीआज भी है ,और हमेशा रहेगी कविता भावों का गहरा समुंद्र है । Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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