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सृष्टि के आदिकाल से अनन्त काल तक 
भावों में बहती है काव्य रस धार 



कविता शाश्वत है,अमर है,अजन्मा है 
कविता अनन्त है ,कविता कल भी थी
आज भी है ,और हमेशा रहेगी कविता 
भावों का गहरा समुंद्र है ।

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