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अतिथि देवो भवः

मेहमान नवाजी ..सिर्फ घरों में ही नहीं होती ..शहरों और देशों में भी होती है..जैसे हम किसी के घर पर आने पर साज - सज्जा करते हैं ऐसा ही दृश्य  #G 20 वसुधैव कुटुम्बकम की मीटींग के दौरान उत्तराखंड के ऋषिकेश में भी देखने को जिन- जिन जगहों से विदेशी मेहमानों को होकर गुजरना था.वह सभी स्थान चकाचक चमका दिये गये पेड पौधे लग गये सङकें बन गयी ...  ऐसा लग रहा था मानों कोई  नयी दुनियां हो.. दिल कह रहा था अच्छा है ..किसी बहाने ही सही विकास तो हुआ

इसके विपरीत स्थानिय निवासियों की शिकायतें तो बस धरी की धरी रह गयीं ..टूटी सङकें गड्ढे ज्यों के त्यों... काश ! विदेशी मेहमान  शहर के बीच  में भी भ्रमण करने की इच्छा जता दें ..तो कम से कम शहर के कुछ और हिस्से का सौन्दर्यीकरण हो जाये.कुछ  सुधार हो जाये ..




 

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