निसर्ग के लावण्य पर, व्योम की मंत्रमुग्धता श्रृंगार रस से पूरित ,अम्बर और धरा दिवाकर की रश्मियां और तारामंडल की प्रभा धरा के श्रृंगार में समृद्ध मंजरी सहज चारूता प्रेम जगत की रीत है, प्रेम मधुर संगीत है सात सुरों के राग पर प्रेम गाता गीत है प्रेम के अमृत कलश से सृष्टि का निर्माण हुआ श्रृंगार के दिव्य रस से प्रकृति ने अद्भूत रुप धरा भाव भीतर जगत में प्रेम का अमृत भरा प्रेम से सृष्टि रची है, प्रेम से जग चल रहा प्रेम बिन कल्पना ना,सृष्टि के संचार की प्रेम ने हमको रचा है, प्रेम में हैं सब यहां प्रेम की हम सब हैं मूरत प्रेम में हम सब पले प्रेम के व्यवहार से, जगत रोशन हो रहा प्रेम के सागर में गागर भर-भर जगत है चल रहा प्रेम के रुप अनेक,प्रेम में श्रृंगार का महत्व है सबसे बड़ा - श्रृंगार ही सौन्दर्य है - सौन्दर्य पर हर कोई फिदा - - नयन कमल, मचलती झील, अधर गुलाब अमृत रस बरसे उलझती जुल्फें, मानों काली घटायें, पतली करघनी मानों विचरती हों अप्सराएँ... उफ्फ यह अदायें दिल को रिझायें प्रेम का ना अंत है प्रेम तो अन...
मार्डन कहलाने की लत जो लगी धिक्कार .... शर्मसार ...गुलाम होते विचार स्वयं का स्वयं पर ही नहीं अधिकार .... स्वयं के नाश का अंधा बाजार झूठी गुलामी की बेड़ियां मौत के सामान का अंधा बाजार ना कोई अपना ना पराया धुएं में ढूंढते खुशियों का संसार क्या बनाओगे अपनी तकदीर जब गिरफ्त में हो धुएं की गुलामी की जंजीर लौट आओ ... धुएं के गुबार से वरना एक दिन आयेगा धुएं की गिरफ्त में फंसे नौजवानों आज तुम धुएं को स्वयं में समाते हो कल जब धुआं तुममें अपना घर बना लेगा फिर कुछ ना बच पायेगा पछतावे के सिवा कुछ भी हाथ ना आयेगा मार्डन कहलाने का सारा भूत उतर जायेगा धुएं में सब स्वाहा हो जायेगा ...
आज फिर जेब खर्च की खनक ने ली अंगड़ाई है सारे जहां की दौलत जेब खर्च में समायी है मन की उमंगों ने की दौङ लगाई है किसी ने मेहनताना तो, किसी ने नेक कमाया है चेहरे पर खुशियों की चमक रंग लाई है मानों खरीद लेगें सारा जहां सारा आसमान ही सिर पर उठाया है जेब खर्च का सरुर जो मन में छाया है मन में बेफिक्र सा गरुर है गरुर में अपनत्व का एहसास है मेहनताने में से बांटा जो जेब खर्च है उसमें में अपनेपन का एहसास है देकर खुशियां वो भी मुस्कराया दोनों का दिल भर - भर आया है जिसने जेब खर्च दिया है ,वही तो अपना खास है मेरे चेहरे की रौनक देख वो सूकून पाता है मुझे मुस्काते देख वो मन ही मन हर्षाता है जेब खर्च तो बहाना है ,वो मुझे और मैं उसे खुशियों रहने के देते बहाने हैं . वो मेरा अपना है यही मेरा सबसे बङा खजाना है .. जेब खर्च किसी अपने का दिया हुआ सबसे बङा तोहफा है उसी में तो छिपा सारे जहां के ...
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