दुनियां ने मुझे जीना सीखाया
ठोकरों पर ठोकरों ने मुझमें मेरा आत्मविश्वास जगाया
जब से मैं टूटा ,जमाना मुझसे रूठा
मैं अकेलेपन से लङा
एक मजबूत इरादा बनकर उठा
मैं पूर्णता को प्राप्त हो गया
बिखर-बिखर के सिमटने लगा
मुझमें जुङने का गुण आ गया
धन्यवाद उन लोगों का जिन्होंने
मेरी कदर नहीं जानी
मुझे ठोकरें पर ठोकरें मारी
मैं गिर-गिर के मजबूत हो गया हूं
मुझे अपनी कदर करनी आ गयी
स्वयं की ताकत से परिचित हो गया
मैं इतना तपाया गया की खरा सोना हो गया
मुझे मेरा अस्तित्व मिल गया
मेरी स्वयं से पहचान हुई
मैं धूल -धूल था ,शूलों से घायल अब
जीने के काबिल हो गया हूं
मैं खरा सा सोना हो गया हू।
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