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पवित्र अमृत वरदान

मन की सन्तुष्टि से बड़ा कोई  धन नहीं 

मिल जाता है सब कुछ ,इसके बाद कुछ 

पाना शेष नहीं रह जाता 

अध्यात्म  की राह यानि स्वर्ग  की राह ....

जिसे पाने के बाद  कुछ शेष नहीं रह जाता ..


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