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समय और मानव

समय की रफ्तार  भी क्या कहीए  एकदम सटीक नियमानुसार   समय अपने समय पर चलता रहा ... समय कल भी चलायमान था आज भी चलायमान  है  रुके तो तुम रह गए ऐ मानव .. मनुष्य की चाल  बदली ढाल बदली  दोष वक्त  को दे दिया  वक्त  की रफ्तार  तो कभी ना बदली  चलना है तो समय के साथ पल -पल साथ चल कर देख  सही समय पर सही कदम उठाकर तो देख .. वक्त भी तेरा कदरदान होगा  समय के जैसे नियम बनाकर तो देख  वर्ष बीतेगें  ...युग बीतेगें  इतिहास  गवाह  होगा  सही समय पर सही कदम उठाकर  तो देख  समय और मनुष्य में में एक बङा अंतर रहा  समय युगों में बढता रहा. मनुष्य  तेरी उम्र  बढने के साथ पल - पल सांसो की उम्र  घटती रही ..

पहली तारीख पहला पन्ना

नये साल  की नयी पुस्तक  आज  पहली तारीख  का  पहला पन्ना मनचाहे सुन्दर   आकर्षक रंग  ही भरना  सुख समृद्धि  से भरपूर  रहे  जीवन  का हर सपना .. नव वर्ष  हर्षित  चेहरे  नवीनता का संदेश  मन प्रफुल्लित होगा शुभ परिवेश उम्मीदों की नयी राह  संयम,हौसलों और लगन से  नव वर्ष  को बनाना है विषेश  दुनियां मिसाल देकर  कहे  स्वयं के ही कर्म  सपनों को साकार करते हैं ....

, नये साल का स्वागत

यह किसके स्वागत में पलके बिछाए  बैठे हैं हम  झिलमिला रहे हैं सितारे  गुनगुना रही है पवन  खिल रहे हैं चमन .. हाथ में लिए  जादू की छडी आने वाली है कोई  परी  नव उर्जा, नव उत्साह के संग  नेत्रों में लिए खुशियों के रंग  स्वागत  में पलके बिछाये बैठे हैं हम. आने वाला है नव वर्ष  खिल रहा है चेहरों पर हर्ष बेहिसाब  स्वर्णिम  हो नव वर्ष  का हर पल  एक बार  फिर  मिला है सुनहरा मौका  लेकर  कलम कुछ  सुनहरे रंग  सजा लो ..मन चाहे रंग  रंग जो तुम भरोगे उसी से संवरेगा आने वाला कल ... खुशहाल  हो जीवन का हर  पल  शुभ मंगल कामनाओं से भरपूर  हो नववर्ष  का हर पल  ...  

आधुनिकता बनाम अंधी दौङ

 आधुनिकीकरण  का युग है ... नासमझी का दौर है  आधुनिकता बनाम अंधी दौड़ ... आंखो पर काला चश्मा  कानों पर लगा हेडफोन  आङी- तिरछी कटी- फटी पोशाकें पहनने पर जोर है ... आधुनिकता का दौर है  समझदार हैं सब.. हर ओर शोर है  भागने की होड़ है .. तन- मन- धन  दांव पर लगाने की होङ है .... संस्कति- संस्कारों को बंधन मान  खुद को तबाही पर पहुंचा   जानवरों सा जीवन  जीने को मचाता शोर है .. आपस मे  ही कट- पिट कर  मर जाओगे .. जानवरों को पिंजरों में  कैद करने को आने को नयी भोर है ..

उचांइयां

आज बङी शान  से चलते हो जिन रोशन राहों पर .. उस रोशनी पर सिर्फ अपना हक नहीं समझना  कई  चिरागों ने जलकर स्वयं को स्वाहा किया होगा   उन राहों को रोशन करने के लिए  .. पहचान  तुम्हारी यूं ही नहीं  हवाओं मेॅ अपनी महक फैला रही है  कहीं किसी ने अपने जीवन  के कई वर्ष  लगा दिए होगें.. तुम्हें कामयाब  बनाने  और खुद कुछ नहीं सा खुश है  तुम्हारी पहचान मेॅ अपनी खुशी पाने के लिए  ... अपना क्या कुछ  भी नहीं अपने सपनों को  साकार किया है तुममे ..तुम किसी का सपना हो  किसी के संघर्षो  की किसी के अस्तित्व को पल- पल  स्वाहा होना पङा होगा .... आज वो जो तुम्हें कुछ नहीं से नजर आते हैं  तुम्हें तुम्हारे मुकाम तक पहुंचाने के लिए.. कितनी बार  झुके होगें तुम्हें उंचाई पर पहुंचाने के लिए  .. सदा आदर करना सम्मान देना   वो बहुत मिटे हैं तुम्हें कामयाब  बनाने के लिए  ... कई  बार  हंसी का पात्र बने हैं बेफिजूल के कामों को  मिसाल बनाने के लिए  ...

ऋषिकेश यात्रा

 ऋषियों की तपस्थली ऋषिकेश भारत का स्वर्ग..  जी हां आपको यकीन  नहीं होगा ..त्रेता युग में पांडवों ने यहीं से अपने स्वर्ग  जाने की यात्रा प्रारम्भ की थी... तो आइये आपको ॠषिकेश के पवित्र स्थलों की यात्रा करवाते हैं .... गंगोत्रि ... में गौमुख  से प्रवाहित मां भागीरथी अनेक पहाडी स्थलों से होती हुयी .. सर्वप्रथम  मैदानी स्थल ऋषिकेश से ही होकर  हरिद्वार आदि भारत  के अनेक  राज्यों में बहती है ... सर्वप्रथम  ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट .. कहते .हैं त्रिवेणी घाट पर तीन  नदियों का संगम  होता है ..गंगा .अलकनंदा और सरस्वती इसलिए  इस घाट का नाम  त्रिवेणी घाट  रखा गया ... त्रिवेणी घाट  की संध्या कालीन  आरती बेहद ही अच्छी होती मन भक्ति के रंग में रंग जाता है .... त्रिवेणी घाट  आरती का दृश्य....

उत्तराखंड

 देवभूमि उत्तराखंड  की पवित्र  धरा पर स्थित  *धारी देवी मंदिर *  जय माता दी  उततराख राज्य का श्रीनगर शहर पवित्र  पहाडियों मेॅ स्थित  पवित्र  पूजनीय  सिद्ध देवी* एक बार  श्रद्धा से किये गये दर्शन मात्र से मां *धारी देवी मां* ऋद्धि  - सिद्धियों से झोली भर देती हैं....