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वाणी को वीणा बना

वाणी को वीणा बना  छेङ मधुर  राग ... शब्द महिमा बङी अनमोल   जब हो प्रवाहित निकले रत्न अनमोल  शब्द  प्रवाह दिव्य साधना   तपस्या से विचारों को बांधना  बंधन शक्ति का अभिप्राय  मन की अनमोल विचारणीय सम्पदा स्वाध्याय से अति उत्तम फल प्राप्त  शब्द  निकले जो ब्रह्म का सार  अखण्ड ज्योति से दिव्य प्रकाश   वाणी को बना वीणा  सजा सुर..छेङ मधुर राग  मीठी तान का तालमेल   सुना संगीत सुन्दर साज बजा  कर आगाज भीतर  भव्य सरोवर  वाणी में रस अमृत की धार  शब्द वीणा के छेङ सुन्दर तार  जब भी निकले बस मधुर  राग ... शीतलता का शब्द प्रवाह मन हर्षित   सुखमय हो सब संसार  ..

*पवनपुत्र*

* रामदूत अतुलित बलधामा  अंजनिपुत्र पवनसुत नामा  महावीर विक्रम कुमति निवार   सुमति के संगी* .... *प्राणों में प्राण वायु बन रहता श्रीराम भक्त  हनुमान कहलाता **

सफर..

"ना कर तू फिक्र  जिन्दगी है सफर अच्छी यादों का बना काफिला  ना कर तू किसी से गिला जिन्दगी आवागमन का सिलसिला सफर में है तू कर सफर ना उलझ तू ,सम्भल कर तू चल कुछ अच्छी बातों का बना सिलसिला कुछ कर गुजरने का बढा हौंसला तेरी करनी से हो किसी का भला सफर हैं पर तू जीने का अंदाज एसे बना कुछ भले अस्मरणीय संस्कारों को कर ले जमा तेरे होने की सदियों तक हो चर्चा  कुछ महत्वपूर्ण कामों का भव्य सरोवर बना ... सफर पर तू छोङ एसे निशान दुनियां ढूढे तुझ सा महान

खूबसूरती ...

 नजरों के कैमरे में कैद..  खूबसूरत नजारे 

भावनाएं

 *पत्थरों के शहर में दिल की कोमल भावनाएं अक्सर  घायल  पायी जाती हैं  किन्तु बात यह भी सच है कि सुन्दर कोमल आकर्षक  पुष्पों के खिलने से ही बागों में बहार आती है*  हर किसी से खुलकर नहीं कही जाती दिल की कोमल  भावनाएं ..बहुत भोली और मासूम सी.. जख्म खाकर  भी मुस्कराती रहती हैं ..

उपवास की महिमा

मन को साधा हुआ उपवास  वाणी का संयम मानों बजे सुन्दर साज  ह्रदय मनन चिंतन शब्द मौन व्यक्तित्व कहे व्यवहार  उपवास  की परम्परा अति उत्तम   जप-तप नियम और  संयम  स्वच्छ तन स्वच्छ वस्त्र   सात्विक  भोजन ..सूक्ष्म आहार  फल रसायन अनुसार  व्यवहार   उपवास  दिवस  पूजा अर्चना  साधे इष्टदेव मन हर्षित दिव्य अराधना  उपवास मात्र नहीं अल्पाहार  यथा सम्भव मन भी कर निर्मल   बाहर कर छल- कपट निंदा हठ क्रोध इर्ष्या  वाणी का संयम अति उत्तम   वाणी की महिमा वीणा के तार  साजो तार मधुर  झंकार   मन रख शुभ भावना कर परोपकार... स्वच्छ तन निर्मल मन  वाणी सरल स्वभाव  उचित उपवास  का आधार  ...           

लेखक की लेखनी

  स्वर्ग  से सुंदर समाज की कल्पना  यही एक लेखक की इबादत होती है      हर तरफ खूबसूरत देखने की एक      सच्चे लेखक की आदत होती है *      अन्याय, अहिंसा, भेदभाव,      देख दुनियां का वयभिचार ,अत्याचार      एक लेखक की आत्मा जब रोती है      तब एक लेखक की लेखनी      तलवार बनकर चलती है      और समाज में पनप रही वैमनस्य की      भावना का अंत करने में अपना      महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करती है      विचारों की पवित्र गंगा की धारा      सर्व जन हिताय हेतु ,      सुसंस्कृत,सुशिक्षित, समाज की स्थापना      का आदर्श लिए , शब्दों के तीखे, बाणों      के जब तीर चलाती तब ,वो इतिहास रचती है ,      युगों-युगों तक आने वाले समाज का मार्गदर्शन      करती है ।      लिखने को तो लेखक की लेखनी लिखती है      एक अद्वितीय शक्ति उ...