Skip to main content

Posts

तरकारी की तैयारी

करनी थी तरकारी की तैयारी  पहुंची सब्जी मंडी ...देखी   सब्जियों की भीङ  भारी  हरी - पालक ,तोरी लौकी  गोभी ,मटर, शिमला मिर्च ,भिडी भागों वाली ...  उछल- उछल कर आलू बोला खोलो - खोलो  थैला खोलो   हमको जी भर कर ले लो  मैं मन.ही मन बोली..  अरे रहने दो आलू  आलू खा- खाकर  हो बन जाऊंगी भालू .. गोभी आलू  मटर आलू   दम आलू के सब खूब लेते चटकारे  पूरी संग आलू.. आलू अहो भाग तुम्हारे   बैगन आलू  शिमला मिर्च  आलू  डालो मुझे कहीं भी डालो .. सब्जी का भाव बढा लो .. बच्चों के प्यारा आलू के चिप्स  आलू का परांठा मन भाता चेहरे पर आ जाती रौनक ..  ... गोल-गोल टमाटर   करने लगा पटर - पटर  मेरे बिन क्या स्वाद भाजी का खट्टा चटपटा मैं भी हूं हर भाजी का राजा  आजा - आजा मुझको भी डाल थैले मैं  स्लाद का मैं स्वाद बढा दूं  भाजी का भाव बढा दूं ... हरा धनिया देख बन जाते सब बनिया  हरी मिर्च का तीखापन ...  जीभ चटोरी  स्वाद ढूढती चटपटा भोजन ... हर तरकारी लागे ...

परियों की घाटी

दिल  को अच्छा सोचने की आदत हो ..आंखो को अच्छा देखने की.. मन में शुभ  भावना हो तो दिखती हैं परियां ....देवलोक  से जो आती हैं .. उतरती हैं यहां परियां .. किस्मत  वाले ही देख पाते हैं ..इन परियों को ..  पहाङों की गोद में ..आसमान के उस पार  ..बादलों के उङनखटोले पर परियों के देश में ... हम चले सपनों के सुन्दर जहां में .. उतरेगें अब परियों की घाटी में ...  

ठहराव भी जरुरी है

जीवन  में आगे बढने के लिए   बहाव संग ठहराव भी चाहिए   देने की चाह से कर्म  प्रारम्भ  करिये  मिलने की प्रक्रिया स्वतः सिद्ध  होती जायेगी  सिर्फ भागते रहने से ही कुछ नहीं हासिल होगा  सरल गति से अपने अस्तित्व का एहसास कराओ  तुम्हारी उपयोगिता किसी के काम आनी चाहिए।   दौड़ रहा है हर कोई  आगे बढने की होङ में  जाने आगे बढ रहे हैं  या बह- बह कर स्वयं  का अस्तित्व  ही मिटा रहे हैं  कहां जा रहे हैं ... आगे की ओर   ऊंचा उठने के लिए  .. गहराई  बढाओ भीतर की  भीतर की गहराई से  आत्मा की ओजिस्वता बढती है।  जिससे शुभ  संकल्प  सिद्ध  होते हैं 

उम्मीद की किरण

 डर के आगे जीत है  चुनौतियां आपके दरवाजे पर आकर   निरंतर  दस्तक देगीं  आपको धमकायेगीं  आपके हौसलों को इसकदर कमजोर कर   देगीं कि आप टूट कर  बिखर जाओ ... पर आप टूटना नहीं .. उम्मीद  की एक किरण  अपने संग रखना ... अपने हौसलों के पंखो को उड़ान के लिए  तैयार  रखना  और  कभी भी मौका देखकर   उङ जाना दूर आसमान  की उंचाईयों में  और रच देना इतिहास  ...

वाणी को वीणा बना

वाणी को वीणा बना  छेङ मधुर  राग ... शब्द महिमा बङी अनमोल   जब हो प्रवाहित निकले रत्न अनमोल  शब्द  प्रवाह दिव्य साधना   तपस्या से विचारों को बांधना  बंधन शक्ति का अभिप्राय  मन की अनमोल विचारणीय सम्पदा स्वाध्याय से अति उत्तम फल प्राप्त  शब्द  निकले जो ब्रह्म का सार  अखण्ड ज्योति से दिव्य प्रकाश   वाणी को बना वीणा  सजा सुर..छेङ मधुर राग  मीठी तान का तालमेल   सुना संगीत सुन्दर साज बजा  कर आगाज भीतर  भव्य सरोवर  वाणी में रस अमृत की धार  शब्द वीणा के छेङ सुन्दर तार  जब भी निकले बस मधुर  राग ... शीतलता का शब्द प्रवाह मन हर्षित   सुखमय हो सब संसार  ..

*पवनपुत्र*

* रामदूत अतुलित बलधामा  अंजनिपुत्र पवनसुत नामा  महावीर विक्रम कुमति निवार   सुमति के संगी* .... *प्राणों में प्राण वायु बन रहता श्रीराम भक्त  हनुमान कहलाता **

सफर..

"ना कर तू फिक्र  जिन्दगी है सफर अच्छी यादों का बना काफिला  ना कर तू किसी से गिला जिन्दगी आवागमन का सिलसिला सफर में है तू कर सफर ना उलझ तू ,सम्भल कर तू चल कुछ अच्छी बातों का बना सिलसिला कुछ कर गुजरने का बढा हौंसला तेरी करनी से हो किसी का भला सफर हैं पर तू जीने का अंदाज एसे बना कुछ भले अस्मरणीय संस्कारों को कर ले जमा तेरे होने की सदियों तक हो चर्चा  कुछ महत्वपूर्ण कामों का भव्य सरोवर बना ... सफर पर तू छोङ एसे निशान दुनियां ढूढे तुझ सा महान