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पलटते पन्ने

       किताब के पन्ने           पलटते पन्ने      हर रोज एक नया पन्ना    जिन्दगी की किताब का      हर रोज एक नया पन्ना  नये दिन की शुरूआत का  सिलसिला शुरु होता है जज्बातों का  बनता है हर रोज एक नया खाता कर्मों के           हिसाब का  दिनचर्या की भागदौड़ आगे बढने की होड़  हर सुबह हर नयी भोर लिखना चाहती हूं कुछ ,लिख देती हूं कुछ  कभी-कभी परिस्थितयों देती हैं बेहद झकझोर  पिछले पन्नों की लिखावट पर जब करती हूं गौर आत्म ग्लानि से जाती हूं भर  पिछले पन्नों की लिखावट में कितनी सौम्यता थी  विचारों में कितनी सरलता थी सादगी थी  जैसे-जैसे आगे बढती गयी हो गयी कठोर  फिर सोचती हूं किताब का आरम्भ और अंत अच्छा हो तो  सब अच्छा हो जाता है  आरम्भ अच्छा था मध्य कांणा था  अब अंत को संवारना है  लौट कर घर भी तो वापिस जाना है  हिसाब किताब होगा जब वहां  अधिकतम अंको से उत्तीर्ण भी तो होना है ।

शारदीय नवरात्रे

वातावरण में देवताओं के शंखनाद      शुभ मूहुर्त का आगाज         भेजी है  माता रानी ने खुशियों की सौगात । शारदीय नवदुर्गा का धरा पर आगमन     हर्षित हो झूमे नाचे गाये मन  बज रहे वीणा के तारों पर सरगम    दिन हैं शुभ,बगिया में खिल रही दूब       श्रृंगारित वसुन्धरा मन उपवन       सुगन्धित पुष्प, धूप आरती  दीप प्रज्वलित प्रत्येक देवालय घर आंगन   शारदीय नवरात्री की महिमा आपार   शक्तियों से शक्ति का लेकर अवतार   अवतरित धरा पर करने भक्तों का उद्धार ..

अक्सर दुआओं में कहता है ये मन

 अक्सर  दुआओं में कहता है यह मन  थोङा आप मुस्कराओ थोङा मुस्कराऐं हम   एक दूजे शुभचिंतक बन जाये  ऊपर वाले ने भेजा है देकर जीवन   फिर क्यों ना पुष्पों सा जीवन बिताएं हम  फलदार वृक्ष बन जायें हम नदियों का जल बन जायें हम ..  आंगन की शोभा बन बागों की रौनक बढायें हम  हवाओं में घुल- मिल सुगन्धित संसार कर जायें हम अक्सर दुआओं में मागता है यह मन  खुशियों से मालामाल रहे सबका जीवन   आप भी मुस्कराये हम भी मुस्करायें  बागों में फिर  से बहार  आये  जीने की अदा सबको सिखाये  बगीचों की शोभा बन हर एक के चेहरे  पर रौनक ले आये हम..परमपिता की दिव्य दृष्टि का प्रसाद निरंतर पाये हम  खुश रहें आप और हम  सफर पर हैं हम ना जाने कब जाना हो मगर   जब तक है जीवन कुछ जीवन जीने की  बातें कर लें आप और  हम  सफर में यादों के कैनवास पर बेहतरीन  सुन्दर आकर्षक चित्र  ही उतारें हम .. बेहतरीन यादों का कारवां तैयार  करें हम  अक्सर दुआओं में कहता है यह मन  थोङा आप मुस्कराओ ...

उम्मीद

 उम्मीद से हौसला बढता है,  हौसलों से साहस, साहस से  आत्मविश्वास जन्म लेता है ..  वही आत्मविश्वास असंभव को  सम्मभ करने की क्षमता रखता है।  छोटी-छोटी किरणों से मन में आशाओं के नये दीप जलते हैं  जग भले ही रोशन ना हो तत्काल  मन उम्मीद के नये उजालों से भर  जाते हैं .. उन उजालों की किरणों से,  जग रोशन हो जाता है।  एक उम्मीद ही तो है. जो चीटियों  को पहाड़ पर चढने को प्रेरित करती है  उस उम्मीद की किरणों से आशा का एक दीप  हौसलों का भव्य आसमान  तैयार करता है और फिर कहीं  जाकर आकाश में असंख्य  तारे जगमगाते हैं... अपने  अस्तित्व पर मुहर लगाते हैं।।। 

आग और धुआं

  सकारात्मक संकल्प के दीपक का प्रकाश का पुंज  लिहोता है एक कवि ।  निराशा में आशा की  मशाल लेकर चलता है  एक कवि  उम्मीद की नयी किरणें  सकारात्मक दिव्य प्रकाश  के दिए जलाते चलो माना की तूफ़ान तेज है तिनका -तिनका बिखरो मत उन तिनकों से हौसलों की बुलन्द ढाल बनाते चलो माना की घनघोर अंधेरी रात है नाकारत्मक वृत्तियों से लड़ते हुए सकारात्मकता का चापू चलाते चलो संघर्ष के इस दौर में हौसलों के महल बनाते चलो राह में आने वालों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाते चलो। हर घर में रोज जले बरकत का चूल्हा  प्रेम ,अपनत्व का सांझा चूल्हा **  मां तुम जमा लो चूल्हा  मैं तुम्हें ला दूंगा लकड़ी  अग्नि के तेज से तपा लो चूल्हा,  भूख लगी है ,बड़े जोर की  तुम मुझे बना कर देना  नरम और गरम रोटी।  मां की ममता के ताप से  मन को जो मिलेगी संतुष्टि   उससे बड़ी ना होगी कोई  खुशी कहीं ।  चूल्हे की ताप में जब पकता  भोजन महक जाता सारा घर * हर घर में रोज जले बरकत  का चूल्हा ,प्रेम प्यार का सांझा चूल्हा * *अग्नि जीवन...

भव्य भारत

 भारत वर्ष की विजय पताका सभ्यता संस्कृति.                की अद्भुत गाथा ।       भारतवर्ष देश हमारा ... भा से भाता र से रमणीय त से तन्मय हो जाता,        जब-जब भारत के गुणगान मैं गाता । देश हमारा नाम है भारत,यहां बसती है उच्च        संस्कृति की विरासत । वेद,उपनिषद,सांख्यशास्त्र, अर्थशास्त्र के विद्वान।            ज्ञाता । देश मेरे भारत का है दिव्यता से प्राचीनतम नाता । हिन्दुस्तान देश हमारा सोने की चिङिया कहलाता।  भा से भव्य,र से रमणीय त से तन्मय भारत का।             स्वर्णिम इतिहास बताता । सरल स्वभाव मीठी वाणी .आध्यात्मिकता के गूंजते शंखनाद यहां ,अनेकता में एकता का प्रतीक  भारत मेरा देश विश्व विधाता । विभिन्न रंगों के मोती हैं,फिर भी माला अपनी एक है । मेरे देश का अद्भुत वर्णन ,मेरी भारत माँ का मस्तक हिमालय के ताज सुशोभित । सरिताओं में बहता अमृत यहाँ,,जड़ी -बूटियों संजिवनियों का आलय। प्रकृति के अद्...

उद्देश्य होना जरुरी है

 उद्देश्य से ही जीवन का अर्थ है, बिना उद्देश्य जीवन व्यर्थ है।  उद्देश्य ही जीवन का माध्यम है, उद्देश्य से जीवन सुगम्य है। उद्देश्य के रस ने जीवन में रस घोला  मन के सभी गुण दोष भीतर से बोला।  उद्देश्य जीवन को धारा प्रवाह देता है। उद्देश्य ही जीवन का औचित्य बताता है।  विषय का चयन मनुष्य जीवन के चरित्र को दर्शाता, विषय ही मनुष्य जीवन के अर्थ को बतलाता। शुभ विषय मनुष्य जीवन का उद्धार करता अशुभ विषय वहीं पाताल की ओर धकेलता।  शुभ विषय मनुष्य को सही राह दिखाता दुविधाओं से लड़ आगे बढ़ने की राह दिखाता। किस मनुष्य ने किस विषय का चयन किया  उसके चरित्र का दर्पण बोलता. फिर दर्पण ही जीवन के सच के रहस्य खोलता।