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जीत का जश्न मना

जीत का बिगुल बजा  हार का श्रृंगार कर हार एक त्यौहार  जीत का आगाज है  जश्न का ऐलान है  हौसलों की उड़ान है  दीप जो भीतर छिपा  संकल्प से उसको जला धैर्य रख दृढ़ विश्वास रख उम्मीद का दीपक जला । आंधियों का शोर है  तूफान की उठापटक  मत अटक मत भटक  वक्त यह भी टल जायेगा  परिक्षाओं का दौर‌  भागने की होड़ है‌  तू भाग मत सम्भल कर चल  मंजिल थोड़ी दूर है  हर रात की होती  अवश्य भोर है‌    सफर पर है तू सफर ‌‌‌‌कर सफर का मजा ले मगर  धूप हो या सहर  सम्भल तू पर चल  हार की ना बात कर  चल उठ हो खड़ा  हार का श्रृंगार कर हार एक त्यौहार  जीत का उद्घोष कर  हार है सबक तेरा  हार से तू सीख ले  जीत से तू प्रीत कर 

भारत को ही पाता हूं

भारत माता के सम्मान में मैं  यशगान सदा गुनगुनाता हूं  उत्तर से दक्षिण तक का भारत  हर दिन एक त्यौहार है भारत  रंगों में सतरंगी भारत हंसता - खेलता भारत माता के लाल मिले उच्च आदर्शों की दिव्य धरा पर भारत वर्ष का  स्वाभिमान मिला  कश्मीरी केसर मन भाया  उत्तराखंड की दिव्य धरा पर  बहती अमृत गंगा जल धारा हिम का आंचल प्राकृतिक सौंदर्य पंजाब के खेतों में  उगता सोना  राजस्थान राजवाड़ों की धरती  गुजरात बढ़ाता व्यापार सदा  गंगा सागर सरिताओं का संगम  मन प्रफुल्लित दृश्य विहंगम  केरल में सुख समृद्धि ‌फलती  शान में भारत माता की में मैं नित-नित शीश झुकाता हूं   विरासत में है हमको मिली  देवों की यह तपस्थली  ऋषि-मुनियों की दिव्य धरा पर नैतिक शिक्षाओं की धरोहर ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌ पाकर धन्य हो जाता हूं  उच्च विचारों की अनमोल सम्पदा  भारत की विरासत की धरोहर  उत्तर में हिमालय अमरनाथ शिवालय  दक्षिण में गंगा महासगर  शक्ति की भक्ति है करता उत्तर से दक्षिण तक लेकर भारत माता को है हमने ...

सफर

आसमां में कहीं दूर घराना मेरा  सफर तो सफ़र सच है ही मगर  लौट के एक दिन जाना होगा  ज़िन्दगी का सफ़र हसीन था मगर  जाने कौन सा मोड़ आखिरी हो मेरा  यह सोच कर मैं सहमा करा ! आसमां में दूर घर था मेरा  धरा पर सफर को फेरा किया  प्रकृति सौंदर्य में मैं जब भी रमा गया  मन के भावो में भूला घर भी मेरा  धरा पर नया बसेरा किया  जाने कौन सा मोड़ आखिरी हो मेरा  यह सोच कर हर पल सहमा करा इस धरा से मोहब्बत मैं करने लगा धरा पर स्वर्ग बसाने लगा  कशमकश में भी चलता रहा  दिव्यता से शक्ति पाने लगा  सफर पर चला और चलता रहा  रिश्ते- नातों लम्बी कतारें बनी  मित्रों से दिल की कड़ी भी जुड़ी  सफ़र ज़िन्दगी का हसीन इस कदर हुआ अब दिल‌ जो जुड़ा, मोड़ आखिरी मिला  मैं जीता रहा ज्यों सदा रहूंगा इधर  अपनों की फिक्र करने लगा    मैंने अपनों को अपने तजुर्बे दिये  आसमां से जुड़े तारों के इशारे दिये  आसमां से थे हमारे घराने जुड़े  सफर आखिरी मोड़ पर था‌  परमात्मा से जुड़े रहने के इशारे मिले  ।  ...

सुरों की देवी लता जी को सहृदय श्रद्धांजलि

सादगी का श्रृंगार हो  अनुशासन का आधार हो  मन में जब हो सौंदर्य भरा  रूप में जाये तेज उतर  स्वर सृजन बने कोकिला !  ्फ़रिश्तों‌ ने सुन्दर सा‌ रुप धरा  स्वयं अवतरित हुई मां शारदा   संग संगीत अमृत रस कलश भरा  छलक- छलक गीतों में अमिय भरा  गीतों की लता की बेल पर  हर गीत में अमृत भरा  धन्य हुयी भारत धरा  गीतों में बसी मां शारदा ‌! सुर मलिका स्वर अलंकार हो  तुम गीतों की बहार हो  राग मेघ मल्हार हो सातों सुरों का साथ हो ! छेड़े दिलों के तार हो स्वर कोकिला कंठ माधुरी  तुम सरस्वती तुम भगवती                                     तुम  दिव्यता का स्वरूप हो‌                             तुम ठंडी छांव की धूप हो ! तुम ओज हो परमात्मा की खोज हो  संगीत का हर साज हो‌  सदा करती रहोगी दिलों पर राज तुम तुम सादगी की प्रतिमूर्ति  अभ्यास से बनी खा...

बहारों तुम फिर भी आती रहना

ए बहारों तुम फिर भी आते रहना  मेरे घर आंगन को महकाते रहना  मेरे जाने के बाद मेरे ना होने पर  तुम बगिया में फूल खिलाते रहना  चम्पा ,चमेली मेरी बगिया में हर पल  तुम रौनक रखना । शाम ढले जब सूरज छिपे शीतल हवा के‌ झोंकें चले तुम अपने होने का सबूत देना  हवाओं में घुल- मिलकर आंगन में मंद सुगंध भर देना  हर्षित मन से तुम ‌‌‌आना -जाना  घर आंगन को हरा-भरा रखना  जीवन का सबब बनकर तुम प्रेरणाओं  का सबब बनना  ए बहारों तुम फिर भी आते रहना  मेरे घर आंगन को महकाते रहना  मेरे ना होने पर मेरी अनुभूति देते रहना ।

मेरे जाने के बाद

एक बहारों मेरे जाने के बाद   मेरा घर आंगन महकाते रहना  कुछ फूल गुलाब के खिलाते रहना .... दिलों में अपनत्व के बीज उगाते रहना .... जब पतझड़ का मौसम आयेगा मिट्टी में मिल जाऊंगा  अपनी शाख से जुदा हो जाऊंगा  मैं भी राख हो जाऊंगा  जब पतझड़ का मौसम आयेगा  जो मुझको ना मिली जीते जी  वो करुणा मुझ पर बहायी जायेगी ‌ काश ! जीते जी मुझे कोई समझ जाता  मेरे हिस्से की ममता मुझ पर लुटा जाता तो मैं कुछ पल और मुस्कुरा लेता  मेरे जाने के बाद मेरे किस्से गड़े जायेंगें  मुझ पर मोहब्बत लुटायी जायेगी  मैं तुम सबको बहुत याद आऊंगा  मेरे ना होने पर चर्चे बहुत मेरे सुनाते जायेंगे कहानियों में कुछ यादें सुहानी छोड़ जाऊंगा  पर बहारों तुम फिर भी आती रहना  इस धरा को प्राणवायु से भरपूर करते रहना शाखों पर नये पत्ते आते रहेगें  फल -फूलों से बाग सजते रहेंगे  बहारों मेरे घर आंगन में कुछ कलियां  गेंदें की भी खिलाते रहना  गुलाब से भी आंगन महकाना एक वृक्ष आम का अमरूद  का उगाना, फल ,फूलों से मेरा घर आंगन भरपूर रखना  मेरे घर ...