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बैसाखी की धूम

नाच रही खेतों में बालियां  समीर नाचें मानों बजाती तालियां  आज भंगङा पान नू जी करदा  नाच गावन का जी करदा  बैसाखी ने धूम मचाई  वसुन्धरा हर्षायी  कृषक मेहनत रंग लायी  खेतों में फसल लहलहायी.. हरियाली फिर भर आयी .. खालसा पंथ ने सिंह पहचान बनाई   

लौ + की हो गया जी

आज सब नाखुश हैं ..?  लौकी ...लौ+ की हो गया जी ... आज लौकी की सब्जी जो बनी है ... अरे वाह! लौकी की सब्जी .. मुझे खिला दो ... पेट को आराम मिलेगा.. की दिन से मसालेदार  खाना खा रही हूं ..  लौकी से पेट के विषैले तत्व  बाहर निकल  जायेगें . . लौकी की सब्जी .. हल्के में ना लो जी ... फायदे .. सुपाच्य..पेट की गर्मी  को कम कर भूख बढाती है ... लौकी एक गुण अनेक .. लौकी का नाम सुन हल्के में मत लेना ... 1,,लौकी के कोफते ... 2,, चने  की दाल में लौकी मिला कर स्वादिष्ट दाल बनती है  3- लौकी वाले चावल  5- लौकी की खीर   6- सबका पसंदीदा सांभर  लौकी के बिना अधूरा है ... 7- मूंग  की दाल  लौकी भी बनती है ..

कोफता करी ...

 *लौकी के कोफते*  ... पौष्टिक सेहतमंद गुणों से भरपूर   विधी:-

शाकाहारी

बनों शुद्ध  शाकाहारी  प्रकृति से हमारा प्रिय नाता  जीने का आधार  दिया है हमें रंग - बिरंगे अमिय रस हैं प्यारे  वृक्षों पर फलते- फूलते रहें फल न्यारे - न्यारे  नहीं हम प्राण रहित जीव मांसाहारी .. हम हैं शुद्ध शाकाहारी  फलती फूलती समृद्ध  रहे वसुंधरा हमारी  प्रकृति ने हमें उपहार दिया है  पौष्टिक तत्वों का भण्डार  दिया है .. हमें फल तरकारी ही भाती  रसास्वाद में अमृत सी साची  गुणों की भरमार हरि भजिया पाती  धरा भीतर फल अंकुर होते  मीठे- मीठे फल अमिय सरीखे . अनाज की खेती समृद्धि की सूचक   कनक ,रबि की फसलें स्वर्णिम धरा  रजत सी शीतल  ..  मूंग ,चना में,प्रोटीन आपार   मोटी दालें गुणों का भण्डार   मार किसी को हम नहीं खाते  प्रकृति प्रदत अमिय ही पाते  विभिन्न  गुणों से भरपूर   रंगों में छिपे पौष्टिक रसायन   शाक - फलों की अद्भुत अद्वितीय बातें  अमिय पदार्थ  हम जी भर  पाते ...

तरकारी की तैयारी

करनी थी तरकारी की तैयारी  पहुंची सब्जी मंडी ...देखी   सब्जियों की भीङ  भारी  हरी - पालक ,तोरी लौकी  गोभी ,मटर, शिमला मिर्च ,भिडी भागों वाली ...  उछल- उछल कर आलू बोला खोलो - खोलो  थैला खोलो   हमको जी भर कर ले लो  मैं मन.ही मन बोली..  अरे रहने दो आलू  आलू खा- खाकर  हो बन जाऊंगी भालू .. गोभी आलू  मटर आलू   दम आलू के सब खूब लेते चटकारे  पूरी संग आलू.. आलू अहो भाग तुम्हारे   बैगन आलू  शिमला मिर्च  आलू  डालो मुझे कहीं भी डालो .. सब्जी का भाव बढा लो .. बच्चों के प्यारा आलू के चिप्स  आलू का परांठा मन भाता चेहरे पर आ जाती रौनक ..  ... गोल-गोल टमाटर   करने लगा पटर - पटर  मेरे बिन क्या स्वाद भाजी का खट्टा चटपटा मैं भी हूं हर भाजी का राजा  आजा - आजा मुझको भी डाल थैले मैं  स्लाद का मैं स्वाद बढा दूं  भाजी का भाव बढा दूं ... हरा धनिया देख बन जाते सब बनिया  हरी मिर्च का तीखापन ...  जीभ चटोरी  स्वाद ढूढती चटपटा भोजन ... हर तरकारी लागे ...

परियों की घाटी

दिल  को अच्छा सोचने की आदत हो ..आंखो को अच्छा देखने की.. मन में शुभ  भावना हो तो दिखती हैं परियां ....देवलोक  से जो आती हैं .. उतरती हैं यहां परियां .. किस्मत  वाले ही देख पाते हैं ..इन परियों को ..  पहाङों की गोद में ..आसमान के उस पार  ..बादलों के उङनखटोले पर परियों के देश में ... हम चले सपनों के सुन्दर जहां में .. उतरेगें अब परियों की घाटी में ...  

ठहराव भी जरुरी है

जीवन  में आगे बढने के लिए   बहाव संग ठहराव भी चाहिए   देने की चाह से कर्म  प्रारम्भ  करिये  मिलने की प्रक्रिया स्वतः सिद्ध  होती जायेगी  सिर्फ भागते रहने से ही कुछ नहीं हासिल होगा  सरल गति से अपने अस्तित्व का एहसास कराओ  तुम्हारी उपयोगिता किसी के काम आनी चाहिए।   दौड़ रहा है हर कोई  आगे बढने की होङ में  जाने आगे बढ रहे हैं  या बह- बह कर स्वयं  का अस्तित्व  ही मिटा रहे हैं  कहां जा रहे हैं ... आगे की ओर   ऊंचा उठने के लिए  .. गहराई  बढाओ भीतर की  भीतर की गहराई से  आत्मा की ओजिस्वता बढती है।  जिससे शुभ  संकल्प  सिद्ध  होते हैं