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धरना प्रदर्शन..

 #धरना, हड़ताल,प्रदर्शन.हल्ला बोल किसी को कोई  फर्क  नहीं पड़ रहा.. मेरे भाइयों और बहनों..सुख- चैन आप सब का छिन है  .आप सब का कीमती समय बर्बाद हो रहा है.  जानती हूं जिस पर बीतती है उसी को पता चलता है  आपका दर्द आपकी तकलीफ का एहसास  है ... परंतु अंदर खूब घोटाला है ..अन्याय की ऊंची मीनारों से न्याय  बाहर झांकने में बेबस है सब माया के भ्रम जाल में फंसे हैं सब  ...आंखों में बांधे काली पट्टी....  दर्द है तकलीफ है एहसास  है मन कोसता है स्वयं को..  चाह कर भी राह नहीं मिलती ..अर्जुन के निशाने की तरह लक्ष्य पर नजर रखिये ..नियति अपना खेल जरुर खेलेगी ... परंतु अंदर खूब घोटाला है ..अन्याय की ऊंची मीनारों से न्याय  की उम्मीद.. उन्हें न्याय  की परिभाषा भी नहीं ज्ञात    अन्याय  का मकङ जाल में सब फंसे हुए हैं ... कोई  नया तरीका अपनाओं अन्याय को जङों से  उखाङ  फेंकना है ... करना आप ही कहोगे न्याय  के आंखों में पटटी बंधी है ..... कानून अंधा होता है ...

केरल .. अघोष ..

 * फिल्म केरल दा स्टोरी * देखने का अवसर  मिला    ओ माय गोड ..विपुल शाह एवं सुदीप्त सेन ...Hats of you to Direct ..& produce this movie ... सम्भल जाओ युवा पीढीयों .. सोच- समझकर  कदम उठाना ... अब समय आ गया है .. जागरूक  होने का .. हिन्दुस्तान शाश्वत सत्य सनातन धर्म की पहचान है ..हिन्दुत्व स्वयं सिद्ध धर्म है . हिन्दूओं के भगवान अनन्त सृष्टिकालक  आदित्य देव दिव्य  प्रकाश  हैं ... श्रीराम  अवतरित  देव हैं ..श्री कृष्ण  जीने की कला सिखाते ... हम हिन्दू हैं ..हम हिंदू हैं और हिन्दू ही रहेगें ..हिन्दू धर्म की श्रेष्ठता अनन्त आकाश की गूंज है अथाह समुद्र की गहराई है.   हिन्दुस्तान का शाश्वत इतिहास धरती पर प्राणियों के जीवन से  प्रारंभ हुआ है ..हिन्दुत्व की जङें बहुत  गहरी हैं ....इन्हें हिलाना धरती पर प्रलयकारी हो सकता है ...

दुआओं में कहता है यह मन

अक्सर  दुआओं में कहता है यह मन  थोङा आप मुस्कराओ थोङा हम मुस्कराये   एक दूजे शुभचिंतक बन जाये  ऊपर वाले ने भेजा है देकर जीवन   फिर क्यों ना पुष्पों सा जीवन बिताएं हम  फलदार वृक्ष बन जायें हम नदियों का जल बन जायें हम ..  आंगन की शोभा बन बागों की रौनक बढायें हम  हवाओं में घुल- मिल सुगन्धित संसार कर जायें हम अक्सर दुआओं में मागता है यह मन  खुशियों से मालामाल रहे सबका जीवन   आप भी मुस्कराये हम भी मुस्करायें  बागों में फिर  से बहार  आये  जीने की अदा सबको सिखाये  बगीचों की शोभा बन हर एक के चेहरे  पर रौनक ले आये हम..परमपिता की दिव्य दृष्टि का प्रसाद निरंतर पाये हम  खुश रहें आप और हम  सफर पर हैं हम ना जाने कब जाना हो मगर   जब तक है जीवन कुछ जीवन जीने की  बातें कर लें आप और  हम  सफर में यादों के कैनवास पर बेहतरीन  सुन्दर आकर्षक चित्र  ही उतारें हम .. बेहतरीन यादों का कारवां तैयार  करें हम  अक्सर दुआओं में कहता है यह मन  थोङा आप मुस्कराओ थोङा ह...

धर्म की बातें

धर्म अनन्त अथाह आकाश की गूंज धर्म  को ना जातिवाद  में ढूंढ  धर्म  परस्पर प्रेम  का आधार  सच्चा धर्म  स्वयंमेव सिद्ध चमत्कार  सेवा,दया,निस्वार्थ प्रेम परोपकार   सत्य धर्म का आधार.  धर्म  साकारात्मक  उर्जा का संसार  धर्म ना जातिवाद  में बसता  धर्म ह्दय प्रेम की मिठास   धर्म ना कोई  चमत्कार धर्म  का ना बनाओ बाजार   धर्म है ह्रदय  प्रेम  रसधार  ...

आकर्षण

 दुनियां आकर्षणों से भरी पङी है   मन को रिझाती है आंखों को आनंद  देती है  खुश रहने की खातिर मनुष्य दूर बहुत दूर तक निकल आता है  पर क्या उसे सच्ची खुशी मिलती है .. शायद  ..भीतर एक खालीपन  एक अधूरापन रह जाता है .. आगे बढता जाता है.बेहतर कुछ पाने के लिए   पीछे ना जाने क्या- क्या कीमती चीजें छोङ देता है  वैभव तो गहराई  में स्थित  बाट देखता रहता है .. बाहर नहीं भीतर है वैभव स्वयं के ही भीतर  स्वयं मालिक होकर भी अंजान  दस्तक देता है वो कई बार   बाहर नहीं भीतर  है वैभव   आंखे खुलते ही भटक जाता है मन  अटक जाता है मन संसार  के आकर्षणों में  आंखे मूंद कभी- कभी कर लिया करो भीतर  की यात्रा भी  संसार के समस्त वैभव, सुख- समृद्धि ,संतुष्टता  के खजाने  भीतर  ही मिलेंगे ... माना की आकर्षक दुनियां है हमारे लिए  .. एक पर्यटक की भांति आनंद  लेने के लिए  . बेहतरीन यादों को समेटे हुए  अपने घर लौट जाने के लिए  ...

देर से ईलाज मंहगा पङता है

काश की  पहली गलती पर  रोक लगा दी होती  काश की पहले ही ना बढने दिया होता अपराध का पहला कदम अपराध का इतना बढा साम्राज्य  पहली गलती पर रोक लगा दी होती   ना बढता अपराध का इतना बढा साम्राज्य  क्योकि कई चुप रहे ..कानों कान फुसफुसाते रहे  मुंह से बोल किसी के ना निकले   चुप्पी ने तुम्हारा तो समय निकाल दिया  तुम्हें तो निकल लिए  चुपचाप.. फर्स्ट  सटेज पर  ईलाज होता कामयाब  ना होती भीषण तबाही  लङाई होती कुछ ही से .. लेकिन अब पूरी कौरवों की सेना तैयार है  मुंह सबका काला हो रहा है अपराधो के भयावह जाल में  आगे यह लडाई बहुत मंहगी पढेगी  ईलाज की तो बात ही क्या .?  धूम्रलोचन ,मधुकैटव  सक्रिय हैं .. सत्य की मशाल जला आहुतियां मांग रहा है काल  बलि चढाने को अपराध  की स्वयं अवतरित हो आ रहे हैं महाकाल  .. खा रही हैं आने वाली पीढी को अपराध की जहरीली जङें  तुम्हारी तो कट गयी अब तोड़ो चुप्पी  बोल दिया करो समय  रहते जङों तक जहर जब फैल जाता है तो इलाज  मुश्किल होता  है .....

दुर्योधनों का अंत करो

 महाभारत का काल है   हाल  हुआ बेहाल है  दुर्योधनों की भरमार  है   कौरवो  की सभा लगी है   दुर्योधन बेअंत  धृतराष्ट्र मोह स्वच्छंद   गांधारी सम यह समाज द्रोपदी चीख चिल्ला रही  भीष्म पितामह  प्रतिज्ञाबद्ध मानों जैसे मूक बधिर  यह कैसा काल है ..हाल  हुआ बेहाल है  चीर हरण को दुर्योधन भरे पङे हैं दुशासन बेअंत..हैं कलियों को कब तक कुचलोगे  मत जहर उनमें भरो  महाभारत को ललकार रहे सत्य धर्म को सुदर्शनधारी  चक्र ऐसा चलायेगें   दुर्योधन दुशासनों के सिर  धाराशाही हो जायेंगें  मां काली करे रौद्र भंयकर  मधु केटव मारे जायेगें  रक्त बीजों अब शून्य  हो जायेगें अंत अब निश्चित है .. अनगिनत कौरवों पर  पांच पांडव भारी पढ जायेगें  एक हुंकार लगायेंगे शिव तांडव के प्रलयकाल में  समस्त  कौरव मारे जायेगें .. यही सत्य  की रीत है  .. होती सत्य  की जीत  है .. आज  के आधुनिक  समाज का हाल भी महाभारत  जैसा है ..मैं तो कहूँगी ...