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मेरी जङों ने मुझे समभाल रखा है

  " मेरी जड़ों ने मुझे सम्भाल रखा है "             "मेरी जड़ों ने मुझे सम्भाल रखा है "                         ******      *        *********************      मेरी जड़ों से मेरी खूबसूरती है      मेरे माली का ,शुक्रिया जिसनें      मेरे बीजों को पौष्टिक खाद दी,      मुझे जल से सींचा, सूर्य ने मेरे तेज      को बढ़ाया ।          मैं जो आज बाग़ बगीचों में      कहीं किसी की क्यारियोँ में      घरों के आँगन की खूबसूरती      बड़ा रहा हूँ ,कि मेरी जड़ों ने मुझे      सम्भाल रखा है ।वरना  मैं तो      कब का बिखर गया होता ।                मेरे स्वभाव में एक आकर्षण है      जो सभी को अपनी और आकर्षित      कर लेता हूँ । मेरी कई प्रजातियाँ...

भारत की शान स्वर्ण पदक विजेता पहलवान

#भारत की शान  ..भारत का सम्मान पहलवान खिलाडी  इन खिलाडियों को इनके हिस्से का सम्मान मिलना आवश्यक है ..जैसे अन्य खिलाडियों को मिलता है .. जैसे क्रिकेट फुटबाल आदि ...   भारत के पहलवान कुश्तीि खिलाङी जिन्होनें अपने देश भारत  की मेजबानी कर भाभारतीय कुश्ती खिलाङी के रूप में भारत  के लिए खेल अपना बेहतरीन  प्रदर्शन कर  विश्व पटल पर भारत  का नाम  ऊंचा किया भारतीयों को गौरवान्वित पल दिये ..आज उन्हीं स्वर्ण पदक विजेताओं की दुर्दशा निंदनीय हैं .. जबकि भारत  एक लोकतांत्रिक देश है ..लेकिन  तानाशाही का राज ..लोकतंत्र की सांसे बंद करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है जो निंदनीय है .. भारत  देश  का सम्मान  भारत  का गौरव  भारत  को स्वर्ण पदक दिला गौरवान्वित करने वाले पहलवान  खिलाडियों के साथ  न्याय  होना चाहिए  .. #पहलवान खिलाडियों का सम्मान भी किसी क्रिकेट खिलाडीयों के सम्मान की तरह ही होना चाहिए  ...

अतिथि देवो भवः

मेहमान नवाजी ..सिर्फ घरों में ही नहीं होती ..शहरों और देशों में भी होती है..जैसे हम किसी के घर पर आने पर साज - सज्जा करते हैं ऐसा ही दृश्य  #G 20 वसुधैव कुटुम्बकम की मीटींग के दौरान उत्तराखंड के ऋषिकेश में भी देखने को जिन- जिन जगहों से विदेशी मेहमानों को होकर गुजरना था.वह सभी स्थान चकाचक चमका दिये गये पेड पौधे लग गये सङकें बन गयी ...  ऐसा लग रहा था मानों कोई  नयी दुनियां हो.. दिल कह रहा था अच्छा है ..किसी बहाने ही सही विकास तो हुआ इसके विपरीत स्थानिय निवासियों की शिकायतें तो बस धरी की धरी रह गयीं ..टूटी सङकें गड्ढे ज्यों के त्यों... काश ! विदेशी मेहमान  शहर के बीच  में भी भ्रमण करने की इच्छा जता दें ..तो कम से कम शहर के कुछ और हिस्से का सौन्दर्यीकरण हो जाये.कुछ  सुधार हो जाये ..  

जंगल के राजा गजराज

राजा जी आज जंगल से बाहर निकले हैं.. नदिया किनारे भ्रमण करने शायद उन्हें भी तपती गर्मी में प्यास लगी ..  

ऋषिकेश स्वर्णिम धरा

 

प्रकृति सम देव नहीं ..

  प्रकृति देवो भवः .. प्रकृति सम देव देव नहीं प्रकृति साक्षात देव  यत्र प्रकृति पूज्यन्ते तत्र देवता रमणयंते प्रसन्नचित्त रमते ..

विश्राम से प्रारंभ

विश्राम यानि मन को आराम   प्रारम्भ एक नई ऊर्जा के साथ   हलचल मचा दे एक ऐसा आगाज  फिर जो सजे साज हो सबके दिलों की आवाज .. आजकल मैं छुट्टी पर हूं  वक्त की पाबंद नहीं  मनमर्जी की करती हूं .. फिर भी कुछ कायदे मेरा पीछा करते हैं  मेरे चैन को बेचैन करते हैं  मुझे समय की अहमियत बताते हैं .. तुम फिर आ गये .. कहा था ना मत आना मुझे चैन से रहने दो  कुछ पल सूकून से जीने दो पर तुम  तो ना.. समय बोला मैं बहती नदिया की रफ्तार हूं  रुक जाऊं मेरा स्वभाव  नहीं  धीरे- धीरे ही सही पर रफ्तार  बनाए रखना  रुक गये तो कई  विकार जन्म ले लेगें  बहते रहोगे आगे बढते रहोगे तो भी मन को विश्राम  मिलेगा ..