Skip to main content

Posts

हिन्दी मेरी मात्र भाषा

  हिंदी हिंदुस्तान का गौरव  "हिन्दुस्तान" का गौरव ,हिंदी मेरी मातृ भाषा, हिंदुस्तान की पहचान हिंदुस्तान का गौरव "हिंदी" मेरी मातृ भाषा का इतिहास सनातन ,श्रेष्ठ,एवम् सर्वोत्तम है । भाषा विहीन मनुष्य पशु सामान है ,भाषा ही वह साधन है जिसके द्वारा हम अपने विचारों को शब्दों और वाक्यों के माध्यम से एक दूसरे से अपनी बात कह सकते हैं और भव प्रकट कर सकते हैं । हिंदी मात्र भाषा ही नहीं, हिंदी संस्कृति है,इतिहास है,हिंदी इतिहास की वह स्वर्णिम भाषा है जिसमें अनेक महान वेद ग्रंथो के ज्ञान का भण्डार संग्रहित है ।  अपनी मातृ भाषा को छोड़कर किसी अन्य भाषा को अपनाना स्वयं का एवम अपने माता - पिता  के अपमान जैसा हैं । मातृ भाषा से मातृत्व के भाव झलकते है । हिन्दी मेरी मातृ भाषा मां तुल्य पूजनीय है । जिस भाषा को बोलकर सर्वप्रथम मैंने अपने भावों को प्रकट किया उस उस मातृ भाषा को मेरा शत-शत नमन । जिस प्रकार हमें जन्म देने वाली माता पूजनीय होती है उसी तरह अपनी मातृ भूमि अपनी मातृ भाषा भी पूजनीय होनी चाहिए । मातृ भाषा का सम्मान ,यानि मां का सम्मान मातृ भूमि का सम्मान ।  मां तो मां होती ,...

अमृतकाल का आगाज

अमृतकाल का आगाज  ह्रदय प्रफुल्लित मन हर्षित  राम राज्य का शंखनाद श्री राम अयोध्या वास  सतयुग का आगाज  श्री राम अयोध्या वास युग परिवर्तन की सौगात  श्री राम अयोध्या वास  जपते हैं जिनको आठों पहर  वो ही तो श्रीराम हैं आये  दिव्य शक्तियों का आगाज  श्री राम अयोध्या वास  सत्य,सनातन रख विश्वास  शाश्वत अनन्त अमर इतिहास  सत्य धर्म की अनहद आवाज  सत्य विजयी धर्म पताका  अयोध्या रामराज सुख - समृद्धि  संतुष्टता का अमृत काल  सत्य सनातन शाश्वत अमर इतिहास  भविष्य. वर्तमान बस यही रख विश्वास।। सत्य धर्म की अनहद आवाज  सत्य विजयी धर्म पताका  अयोध्या रामराज सुख - समृद्धि  संतुष्टता का अमृत काल  सत्य सनातन शाश्वत अमर इतिहास  भविष्य. वर्तमान बस यही रख विश्वास।।   

अक्सर दुआओं में कहता है यह मन

 सर्वप्रथम परमपिता परमात्मा दिव्य  शक्ति को मेरा शत- शत-शत नमन  अक्सर दुआओं में कहता है यह मन  थोङा आप मुस्कराओ थोङा हम मुस्कराये   एक दूजे शुभचिंतक बन जाये  ऊपर वाले ने भेजा है देकर जीवन   फिर क्यों ना पुष्पों सा जीवन बिताएं हम  फलदार वृक्ष बन जायें हम नदियों का जल बन जायें हम ..  आंगन की शोभा बन बागों की रौनक बढायें हम  हवाओं में घुल- मिल सुगन्धित संसार कर जायें हम अक्सर दुआओं में मागता है यह मन  खुशियों से मालामाल रहे सबका जीवन   आप भी मुस्कराये हम भी मुस्करायें  बागों में फिर  से बहार  आये  जीने की अदा सबको सिखाये  बगीचों की शोभा बन हर एक के चेहरे  पर रौनक ले आये हम..परमपिता की दिव्य दृष्टि का प्रसाद निरंतर पाये हम   आसमान से आता है,कोई  फरिश्ता   दुआओं से भर जाता है मेरा दामन   एक रुहानी एहसास अवश्य पाता हूं    उस फ़रिश्ते की महक , मेरा घर आँगन महका जाती है मेंरे चेहरे पर बिन बात के मुस्कराहट आ जाती है । मैं चल रही होती हूँ अकेली ...

श्रीराम सतयुग वाले

 युगों - युगों के बाद हैं आये  श्री राम सतयुग वाले  मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम  रामायण के श्री सीता राम  आलौकिक दिव्य निराले  सत्य धर्म पर चलने वाले  सूर्यवंश की धर्म पताका ऊंची लहराने वाले  मर्यादा  से जीवन जीने का  संदेशा देते श्री राम सतयुग वाले  निश दिन जिनका नाम हैं जपते श्री राम ईष्ट हमारे...  पुष्पों की वर्षा करवाओ मंगल गीत सुनाओ  श्री राम अयोध्या धाम आयें मीठी शहनाई बजाओ  श्री राम अयोध्या धाम हैं आये  शंख ध्वनि बजवाओ  जपते हैं जिनको आठों याम  श्री राम वो ही हैं आये  स्वागत में पलके बिछाओ  मंगल धुन बजाओ  सुंदर बंदनवार सजाओ   रंगोली सतरंगी बनाओ  स्वागत में श्री राम प्रभु के अपनी पलके बिछाओ  नयनों के दर्पण मे श्रीराम छवि ही बसाओ 

श्रीराम अयोध्या धाम आये

"अमृतकाल का आगाज  ह्रदय प्रफुल्लित मन हर्षित  राम राज्य का शंखनाद श्री राम अयोध्या वास  सतयुग का आगाज"  युगो - युगों के बाद हैं आये श्रीराम अयोध्या धाम हैं आये  अयोध्या के राजा राम, रामायण के सीताराम  भक्तों के श्री भगवान  स्वागत में पलके बिछाओ, बंदनवार सजाओ  रंगोली सुन्दर बनाओ, पुष्पों की वर्षा करवाओ.  आरती का थाल सजाओ अनगिन  दीप मन मंदिर जलाओ...दिवाली हंस -हंस मनाओ...  श्रीराम नाम की माला  मानों अमृत का प्याला  राम नाम को जपते जपते  हो गया दिल मतवाला....  एक वो ही है रखवाला  श्री राम सतयुग वाला...  मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम  रामायण के श्री सीता राम  आलौकिक दिव्य निराले  सत्य धर्म पर चलने वाले  सूर्यवंश की धर्म पताका ऊंची लहराने वाले  मर्यादा  से जीवन जीने का  संदेशा देते श्री राम सतयुग वाले  प्राण जाये पर वचन ना जाये  अदभुद सीख सिखाते  मन, वचन, वाणी कर्म से  सत्य मार्ग ही बतलाते....  असत्य पर सत्य की जीत कराने वाले  नमन, नमन नतमस्तक हैं...

शुभमंगल दिशायें

शुभ मंगल होती सभी दिशाऐं भारत भूमि की विषेशताऐं  अमिय जल निर्मल सरिताऐं  विभिन्नता में एकता की परिभाषाऐं सभ्य संस्कारों की कथाऐं संस्कृति से ओत- प्रोत वेद ऋचाएं  रक्षा को अडिग भुजाऐ फैलाऐं खड़ी हिम शिखाऐं फलों - फूलों से लदी वृक्षों की लताऐं  रक्षाप्रहरी बन अडिग खड़ी चट्टान बालाऐं भारत की क्या बात कहूँ  जो भी कहूँ मैं दिल से कहूं  भारत मेरी आत्मा  भारत मेरा प्राण  भारत मेरा अभिमान  भारत मेरा सम्मान  भारत भूमि की दिशाऐं  पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण  विभिन्नता में एकता की परिभाषाऐं  स्वछंद. निर्भीक बलवान, देश प्रेम से  ओत - प्रोत भारत भूमि की सभी दिशायें.... 

नव वर्ष

नव नूतन वर्ष, दिल में प्रस्फुटित हर्ष  नयी उमंग का नया - नया सा स्पर्श  नव वर्ष में खुशियाँ हों सबके समदर्श मुस्करायें आप सभी वसुंधरा से अर्श  शुभ मंगल हों सभी दिशायें शुभ का हो दर्श