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सुनहरी तितलियां

*खूबसूरती को खूबसूरती से आंखे चार  करते देखा  आकर्षक तितलियों को रंगीन पुष्पों से मधुरस पान  करते देखा ... कोमलता को सुकोमलता से लाड लङाते देखा  अप्सराओं रुपी तितलियों को पुष्प  वाटिका में विहार  करते देखा..  प्रकृति के रंगो को पुष्पों की कलाकृति में बसते देखा बला की खूबसूरत सुकोमल नन्हीं  परियों को मनभावन वातावरण में  कुछ पलों के जीवन को भरपूर जीते देखा  मैने सुनहरी तितलियों को पुष्प वाटिका में  श्रृंगार  करते देखा है .. आसमान  से उतरी परियां मानों  सुना रही थीं अपनी कहानीयां  धरा पर सब उन्हें कह रहे थे तितली रानीयां  रंग -बिरंगी सुनहरी चमकीली चित्रकार की अनुपम चित्रकारी का अद्भुत तालमेल सुन्दर, सुकोमल मनभावन .. स्वर्ग से उतरी अप्सराएं..मनभावन अदाएं  .. नयनों के केनवास  में कैद होती बला की खूबसूरती के हर पल  के चलचित्र  ..तितलियों तुम  कौन  जगत  से हो आती  फिर  कहां चली जाती ...तुम ही जीवन तो  जीने की कला सिखाती ...तुम्हरी छवि मन में बस जाती ... अगले फाल्गुन...

धर्म साकारात्मक ऊर्जा का संसार

शाश्वत सनातन  सभ्यता भारत की  अंतरिक्ष साक्षी हिन्दमहासागर हिन्दुस्तान  हिन्दुत्व  भारत  की शान   धर्म अनन्त अथाह आकाश की गूंज धर्म  को ना जातिवाद  में ढूंढ  धर्म  परस्पर प्रेम  का आधार  सच्चा धर्म  स्वयंमेव सिद्ध चमत्कार  सेवा,दया,निस्वार्थ प्रेम परोपकार   सत्य धर्म का आधार.  धर्म  साकारात्मक  उर्जा का संसार  धर्म ना जातिवाद  में बसता  धर्म ह्दय प्रेम की मिठास   धर्म ना कोई  चमत्कार धर्म  का ना बनाओ बाजार   धर्म है ह्रदय  प्रेम  रसधार  ...

क्यों आती है नींद ?

  क्यों आती है नींद  ..फिर नींद  में क्यों आते हैं सपने  ... क्यों आती है नींद  ? नींद में सपने क्यों आते हैं ..? कई बार हम सपनों की दुनियां में हम खो जाते हैं जैसे .. जब नींद  खुलती है तब कुछ  देर  के लिए  सोच में डूबे रहते हैं .. इस बारें में आप क्या कहना चाहेंगे क्यों आती है हमें नींद?

शुभागमन शुभारंभ

 मां शारदे दे रही आशीर्वाद है  बसंत की बहार है गणतंत्र की पुकार है  धैर्य,विवेक के संकल्प से  नव भारत को रचना नया संसार है .. भारतीयता ही सरोकार है माता के संस्कार  हैं  दे रही दुलार  ,प्रकृती भी प्यार  है  सर्वस्व  प्रेम.का संचार  है  भारत माता का आशीष है  मर्यादा से सम्भाल रखना  भारत  माता का सर्वस्व देश का भार है प्रेम से संचित  बागान हैं  बागवान भारत माता कर रही वसुन्धरा का हार श्रृंगार  है ...

मेरा जन्म

धरती मां की गोद में आराम  से सोयी थी  बढना प्रकृति का नियम है  जिस दिन नन्हीं कली बनकर  खिली  बागवान  की आंखो में चमक थी  परवरिश को मेरी कोई  ना कमी छोङी थी  सूर्य का ओज बागवान  का समर्पण   प्रकृति ने मुझे  बेहतरीन  रंगों की सौगात  बख्शी  मैं पुष्प  बनकर  खिली ..बागों की और  सबकी नजर रुकीं  बागों में आकर्षक पुष्प  खिले थे..प्रकृति के करिश्मों पर  सब मन्त्रमुग्ध थे ..आकाश  की छत  मिट्टी की गोद   सूर्य की ओजस्वता  ..जल की निर्मलता ,शीतलता .. तेज हवाओं की लहर से भी खूब  लङी थी  आंधी - तूफानों का दौर  भी देखा .. फिर भी मैं खुश हूं अपने इस छोटे से जीवन मे .. मैं पुष्प  मन की मधुरता का पर्याय बना .. बागों की रौनक बन ..हवाओं में इत्र बनकर बहा सफल है जीवन  मेरा ..खुशी हो या गम  ..हर जगह  सजा ...महत्वपूर्ण  स्थान मिला ..

शब्द बने व्यक्तित्व की पहचान

शब्द बने व्यक्तित्व की पहचान   शब्द तपस्या, विचार हवन  सरल, मधुर, सहज भावों की  पवित्र अग्नि..शुभ साकारात्मक वातावरण  ह्रदय बहे निर्मल पवित्र भाव रस धारा ..  रस -रसायन पावन -पवित्र आशीष सम्मान    शब्द  प्रवाह  ध्वनि आकार   शब्द  सजाओ, शब्द संवारों इन्हीं से रचता- बसता संवरता  यह सुन्दर संसार  ... शब्द महिमा मन का प्राणायाम   शब्दों का करना सदा सम्मान   शब्दों का ना करना कोलाहल   शब्दों ने समाहित  सारे हल  शब्द बनकर  ढाल  हर दुविधा का  निकाले हल ... शब्द अराधना शब्द  तपस्या  शब्दों का जीवन  में बङा ही मोल ...

अथाह आलौकिक दिव्यता

"अथाह आलौकिक निर्मल मन की पवित्रता  धर्म  मनुष्य  की सौम्यता सच्चा धर्म ना भटकाये कभी  सर्व जन हिताय कर्म  निभाए सदा" धर्म  का ना बाजार बनाओ  धर्म के नाम पर ना भटकाओ  धर्म के नाम पर  ना डराओ  धर्म  के नाम पर ना समाज को गुमराह करो  धर्म  के नाम  पर  अपनी शक्तियों का दुरुपयोग ना करें  शक्तियां देवों में भी होती हैं, दैत्यों में भी होती है  प्रकृति भी उन्हीं का साथ देती है ,जो सत्य का मार्ग बताये सत्य मार्ग  चले  श्रीराम  श्रीकृष्ण जीवन जीना की कला  एवं मर्यादित जीवन  जीने का संदेश  देते हैं धर्म का पर्याय तो प्रहलाद. ध्रुव  राम ,कृष्ण आदि हैं और अनादि काल  तक  रहेगें ..शक्तियां तो राम में भी थीं.. रावण में भी थीं कंस में भी थी ,हिरणयकश्यप में भी थीं ... शक्तियों  का उचित  उपयोग आपको महान  बनाता है.. धर्म  अद्वितीय शिक्षा,  उच्चतम दीक्षा.. धर्म यही शिक्षित हों सभी निरोगी हों सभी  कमतर  ना कोई  भीतर एक भाव जगा  जागृत क...