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खूबसूरती ...

 नजरों के कैमरे में कैद..  खूबसूरत नजारे 

भावनाएं

 *पत्थरों के शहर में दिल की कोमल भावनाएं अक्सर  घायल  पायी जाती हैं  किन्तु बात यह भी सच है कि सुन्दर कोमल आकर्षक  पुष्पों के खिलने से ही बागों में बहार आती है*  हर किसी से खुलकर नहीं कही जाती दिल की कोमल  भावनाएं ..बहुत भोली और मासूम सी.. जख्म खाकर  भी मुस्कराती रहती हैं ..

उपवास की महिमा

मन को साधा हुआ उपवास  वाणी का संयम मानों बजे सुन्दर साज  ह्रदय मनन चिंतन शब्द मौन व्यक्तित्व कहे व्यवहार  उपवास  की परम्परा अति उत्तम   जप-तप नियम और  संयम  स्वच्छ तन स्वच्छ वस्त्र   सात्विक  भोजन ..सूक्ष्म आहार  फल रसायन अनुसार  व्यवहार   उपवास  दिवस  पूजा अर्चना  साधे इष्टदेव मन हर्षित दिव्य अराधना  उपवास मात्र नहीं अल्पाहार  यथा सम्भव मन भी कर निर्मल   बाहर कर छल- कपट निंदा हठ क्रोध इर्ष्या  वाणी का संयम अति उत्तम   वाणी की महिमा वीणा के तार  साजो तार मधुर  झंकार   मन रख शुभ भावना कर परोपकार... स्वच्छ तन निर्मल मन  वाणी सरल स्वभाव  उचित उपवास  का आधार  ...           

लेखक की लेखनी

  स्वर्ग  से सुंदर समाज की कल्पना  यही एक लेखक की इबादत होती है      हर तरफ खूबसूरत देखने की एक      सच्चे लेखक की आदत होती है *      अन्याय, अहिंसा, भेदभाव,      देख दुनियां का वयभिचार ,अत्याचार      एक लेखक की आत्मा जब रोती है      तब एक लेखक की लेखनी      तलवार बनकर चलती है      और समाज में पनप रही वैमनस्य की      भावना का अंत करने में अपना      महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करती है      विचारों की पवित्र गंगा की धारा      सर्व जन हिताय हेतु ,      सुसंस्कृत,सुशिक्षित, समाज की स्थापना      का आदर्श लिए , शब्दों के तीखे, बाणों      के जब तीर चलाती तब ,वो इतिहास रचती है ,      युगों-युगों तक आने वाले समाज का मार्गदर्शन      करती है ।      लिखने को तो लेखक की लेखनी लिखती है      एक अद्वितीय शक्ति उ...

धवनि आकार भाषा आधार

*ईश्वर प्रदत्त ध्वनि आकार शब्द परणित हिंदी व्यवहार  व्यक्त विचार भावों का सार हिंदी शब्द लिया आकार * *हिंदी* हिन्दुस्तान की अमृतसर धार  वेद, ग्रन्थ, उपनिषद गीता का सार  हिंदी हिन्दुस्तान की आत्मा हिंदी का मीठा व्यवहार  हिंदी मात्र भाषा ही नहीं *हिंदी* हिन्दुस्तान की पहचान   हिंदी हिन्दुस्तान का गौरव युगों- युगों की शाश्वत भाषा है हिंदी,  हिंदी से ही विकसित हुई सभ्यता, संस्कृति का अतुलनीय गौरव है हिंदी  हिन्दुस्तान की आत्मा आत्मसम्मान है हिंदी  वेदों की जननी संस्कृत भाषा का सरलतम व्यवहार है *हिंदी *  सभ्यता की पहचान है हिंदी * सौभाग्यशाली हूं जो हिन्दुस्तानी होने का सम्मान मिला  हिंदी भाषा से‌ मुख का श्रृंगार हुआ .. आत्मा में मानों  अमृत रसधार मिला, हिंदी में जब- जब भावों को व्यक्त किया दिव्य ज्ञान का अद्भुत भण्डार मिला .. हिन्दुस्तान की शाश्वत सनातन परम्परा सर्वप्रथम वसुन्धरा पर सभ्यता का विस्तार हुआ .... वेदों का रहस्यमय ज्ञान.. आज के वैज्ञानिक युग की कसौटी पर लोहा मनवाता.. गीता, रामायण सिखाते जीवन जीने की कला  .  अद...

महादानी

प्रकृति महादानी फिर भी ना अभिमानी  प्रकृति पर आश्रित प्रकृति पर निर्भर  ए मनुष्य  तेरी जिन्दगानी  प्यास बुझाता दरिया का पानी  अन्न खेतों का जीवन प्राण हरियाली  कहती किसानों के पसीने की कहानी.. प्रकृति से मैंने देने का गुण सीखा, देने वाला सदा, प्रसन्न और तृप्त रहता है । जहाँ कहीं भी निस्वार्थ सेवा होती है मैंने उनके खजाने स्वयमेव भरते देखे है। वृक्षों की भाँति अपनी शरण मे आये को फल,फूल, शीतल वायु ,देते रहो... दरिया की भाँति निरन्तर आगे बढ़ना जीवन के सफ़र में संग तो कुछ जाना नहीं तो क्यों ना कुछ ऐसा कर चलें कि हमारे जाने के बाद भी हमारे कर्मों की खुशबू हवाओं में रहे ,कुछ ऎसे चिन्ह छोड़ते चलते हैं ,की दुनियां हमारे चिन्हों का अनुसरण करें । जीवन एक सराय ,हम मुसाफ़िर जीवन को भरपूर जियो पर अच्छे और बुरे  विवेक के संग ।।। आओ अपने किरदार में सुन्दर रंग भरे । स्वयं की लिये तो सभी जीते हैं , हम किसी और के जीने की वजह बन जाएं किसी के काम आ जाएं ,स्वयं के जीवन को दूसरों के लिए प्रेरणापुंज बनाएं ।

मंगल हुई सभी दिशाएं

मंगल हुई सभी दिशाएं  अष्टमी कन्या पूजन से देवी मां प्रसन्न हुई  नवमी तिथि श्रीराम जन्म से वसुन्धरा प्रपन्न हुई  हरियाली फिर समृद्ध हुई  शीत ऋतु अब बंसत हुई  शीतल समीर  मंद हुई   नर्म वायु की तासीर से फलों से मरकंद बहे  स्वर्णिम पर्वत शिखर हुए  दिनकर की मीठी तपिश से  मन की प्रसन्नता स्वच्छंद हुई  बागों में सुगन्धित पुष्प गंध बही  देव आगमन हो रहा है  वसुन्धरा भी समृद्ध हुई  चित्रकला प्रकृति की रंगों में  चरितार्थ हुई गेंदा,गुलाब, गुङहल सूरजमुखी  आदि अद्वितीय पुष्पों से वसुन्धरा का श्रृंगार हुआ  सर्वप्रथम जगतजननी के आगमन का आह्वान हुआ नयनों में शोभा भरकर ह्रदय भक्ति रस पान करो  प्रकृति दे रही भव्य संदेशा..मन में रखो शुभ भावना  सर्वहित रखो कामना ..नौ द्वारों से नौ रुपों में  नवदुर्गा वरदान है दे रही झोली भर लो  उम्मीदों की किरण यही है श्रद्धा समर्पण संकल्प सिद्ध कर लो.. सत्य  धर्म ही सर्वोपरि  त्याग,दया , क्षमा भाव ही मंगल जीवन के अधिकारी उठो जागो शुभ मंगल द्वार पर तेरे दस...