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रामराज की धवजा पताका

राम  राज्य की ध्वजा पताका  जाने हैं  हम तो सतयुग की भाषा   हम सब की प्यारी धरती माता  प्रेम सौहार्द की प्यारी मीठी भाषा  निस्वार्थ  प्रेम के गुणों से भारतीयों का सहृदय  नाता  मानवों की प्रिय धरती माता  निस्वार्थ  प्रेम  के दरिया में  जीवन को जीवंत करती वसुन्धरा .. अक्सर भीतर कुछ जानवर भी घुस आते    जो जंगल राज बनाना चाहते  अपनी डफली अपना राग, अपना दबदबा चाहते है  जानवर अज्ञानी  प्राण घातक  अपना जंगल राज चाहते. उन जानवरों  को जंगल में  भेजो यारों .. यह धरती तो मानवों के लिए  बनी है .. इतिहास गवाह  है दानवों का अत्याचार   जब- जब अपना वर्चस्व बढाता जाता पवनपुत्र  अवतरित  हो आते  ..अपना वैभव आप दिखाते  ..श्री राम  सत्य  की डंका बजाते.. और जो बेवजह उत्पात मचाते हैं ..उनका अंत  निश्चित   कर जाते हैं फिर  से रामराज  स्थापित  कर  जाते हैं ...

दृष्टि बदली सृष्टि बदली

दृष्टिकोण बदला  दृष्टि बदली सृष्टि बदली  लोगों ने कहा सृष्टि बदली  सृष्टि तो जैसे थी वैसे ही रही  बदला तो व्यवहार बदला .आचरण और  संस्कार रहे हैं .. बदल वृष्टि रही है  स्वार्थ की अंधी दौङ में भागते कहते हैं  धरती डोल रही है ...दुनियां झूठ बोल रही है  बदल नजर रही है .. दृष्टि बदली सृष्टि बदली ..

शिक्षक

 शिक्षक बस एक हरि है शिष्य हम सब जगत प्रभु के दास  पल- पल प्रभु  की सुनते रहें  भजते रहें ,हरिनाम   फल की प्राप्ति की चाह नहीं  यथासमय अंकुरित होगें फल  रखना मन विश्वास  सेवा भाव से कर तपस्या  चाहे पूर्णमा आये या अमावस्या  कभी ना होगा ह्रास   शिक्षक ज्ञान दिव्य दे रहा  बांट रहे दिन- रात ...

अपराध की जङें

आखिर  कब तक   कोलाहल चलता रहेगा  आते रहेगें जलालल  राक्षस रावणों और  मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम के बीच   युद्ध  होते रहेगें  एक भी बीज अपराध  का पनपे  तो उसे उखाङ  फेंकों   एक बार लङ जाओ   डरा के तुम्हें जो अपने  डर का साम्राज्य स्थापित करने  जा रहा है बहुत  जहरीली नस्लें तैयार कर देगा   इसलिए डरना नहीं लङ जाना  कभी मंजूर  नहीं करना मनमानी .. वरना  झेलनी पढेगी बहुत हानि ..

जहर ही जहर को काट रहा

 कहीं हमारा रुतबा खत्म ना हो जाये  इसलिए जहर ही जहर को काट  रहा   तबाही का मंजर है  एक जहरीली शाखा को पकड़कर  उसकी गहराई जानने की कोशिश करते हो  उससे पहले दूसरी जहरीली जङ  पहली जङं को काट देती है  साम्राज्य  फैला हुआ  है .... अपने साम्राज्य  को कौन  खत्म  करना चाहता है ...

राम तो मर्यादापुरुषोत्तम थे ...

सूर्य  के तेज से प्रकाशित सूर्यवंशी राम  के अनुयायी  हम श्री राम  पर आस्था रखने  वाले उन्हीं के प्रताप  की महिमा  पर पूर्ण  रूपेण  विश्वास  करते हैं .. राम  तो मर्यादा पुरुषोत्तम थे  एक बार  को लगा सत्य स्वयं  आकार  श्री राम  अवतार में  अपराधियों का अंत कर गये ... कुछ  अंतराल  बाद  ज्ञात हुआ   जहरीली जडें बहुत गहरी फैली हुई  हैं  जहर ही जहर  का दुश्मन बन उसका अंत  कर रहा है ..जहरीली खेती को इतना तो ज्ञात  है  हमारी जडों का रहस्य अगर खुल गया तो हम सब का अंत हो जायेगा ...एक जहरीली जङ ने  अपनी ही जहरीले अंग को काट दिया ...। 

एनकाउंटर

शिकारी की बहादुरी से घायल हुये थे शेर बहुत.  भेजे थे संदेश    घेरे पङे थे शत्रु  ध्यान रखना था  माना की तुम्हारा भी बहुत दबदबा था   चल रहे थे बङी होशियारी से तुम भी .. घायल  था जो .. दर्द में कराह रहा होगा  उसका दर्द  उसे चैन से रहने कहां दे रहा होगा  भीतर घुस  कर..कर दिया उसने भी एनकाउंटर  ...