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जाने कहां जा रहे हैं सब

 जाने कहां जा रहे हैं सब  मंजिल कहीं ओर है ,रास्ते कहीं ओर  जान - बूझकर मंजिल से हटकर  अन्जानी राहों पर चल रहे हैं लोग  सब अच्छा देखना चाहते हैं  सब अच्छा सुनना चाहते हैं  अच्छाई ही दिल को भाती भी है  अच्छाई पाकर गदगद भी होते हैं सब.. भीतर सब अच्छाई ही चाहते हैं फिर ना जाने क्यों भाग रहें हैं , बिन सोचे समझे अंधों की तरह  भेङ चाल की तरह ,जहां जमाना जा रहा है  हमारी समझ की ऐसी की तैसी ,जहां जमाना जायेगा  हम भी वहीं जायेगें ,बिना सोचे- विचारे  अंधी दौङ में ,फिर चाहे खाई में गिरे या कुएं में .. अब रोना नहीं ,जिसके पीछे भागो हो ,वही मिलेगा जो  जिसके पास  है ... समझाया होगा मन ने कई बार ... पर अपने घरवालों और अपने मन की कौन सुनता है .. घर की मुर्गी दाल बराबर  ... अपने सबसे अजीज मित्र  अपने ही मन का जो ना हुआ ... उसकी जमाने से अच्छाई की  उम्मीद करना निर्रथक है .... अच्छाई जो दिल को भाती है ...तो अपने मन की सुनों मन की करो मन कभी गलत राह नहीं दिखाता ,उसे फिक्र होती है  अपनों की ,भटकने से रोकता है मन ,समझा...

खुला आसमान

पैरों में बांधकर जंजीर नचाने की आजादी है  यह कैसी आजादी है, पैर थिरकते हैं ,नाचते हैं  घायल होकर, अपने जख्मों के निशान छोङ जाते हैं  पर कटे पंखो का दर्द ,भी कितना.अजीब  है  नाचता है मन ही मन ,उङता है भीतर ही भीतर .. पंख फैलाकर उङने को उत्सुक ...... पर बेड़ियां भी शायद जरूरी हैं  अपनी सीमाओं का अंदाजा रहता है  सीमायें नहीं टूटती ,आखिर सबको अपनी  जमीं चाहिए, अपना आकाश चाहिए  बुनने को ख्वाब, एक आधार चाहिए... ख्वाबों की जमीं पर आजाद पंख चाहिए  धरती की खूबसूरती हमसे है, आसमान की ऊंचाइयों पर टिमटिमाते सितारों तक ऊँची उङान चाहिए... ख्वाबों की धरती पर  कुछ निशान अपने भी चाहिए.... मत बांधों जंजीरें ,वो भी लिखेंगे तकरीरें अपनी  उनको भी उङने को खुला आसमान चाहिए...

किक्रेट. क्रिकेट. किक्रेट .

 क्रिकेट..क्रिकेट क्रिकेट   भारतीयों के चेहरे की मुस्कान क्रिकेट  भारत का अभिमान क्रिकेटर  चर्चा का मुख्य विषय किक्रेट  क्रिकेट की शान चौके - छक्के भारतीयों के महानायक किक्रेटर  कांधे क्रिकेटरों के भारत का सम्मान   लेते रहो कैच ,और धुआंधार विकेट गली- मोहल्ले,घर- घर का जुनून  किक्रेट  कानों में गूंजती आवाज  विराट कोहली,  मोहम्मद शामी, ईशान किशन, जैसे सभी नाम  किक्रेटर जब खेलते किक्रेट बढ जाती आंखों की चमक  निगाहों में बसते ,दुआओं में सदा रहते किक्रेटर  भारत के लिए खेलते ,भारत की पहचान बढाते किक्रेटर  विशवपटल पर भारत  का गौरव बढाते किक्रेटर  .... किक्रेट का खेल भारत की पहचान, भारत का अभिमान.....

दीपावली

 जगमगाती रही , निशा दीपों वाली  खुशियों भरी सौगात दीपावली  आगमन श्री राम जानकी ,लक्ष्मण  स्वागत में सजे घर- आंगन. द्वारे- द्वारे  श्री विष्णु, लक्ष्मी जी आप पधारे आरती उतारो थाल सजाओ. आंगन ,आंगन सुन्दर रंगोली बनाओ. खुशियों की सौगात दीपावली. मिष्ठानों का प्रसाद दीपावली  उपहारों का त्यौहार दीपावली  प्रेम और सौहार्द दीपावली  साकारात्मक ऊर्जा का संचार दीपावली  दीपावली पर प्रेम बढाओ  परस्पर प्रेम से एक दूजे पर सौहार्द लुटाओ.... कुम्हार से मिट्टी के दीपक घर ले आओ  घर- आंगन दीपों का प्रकाश फैलाओ 

सुबह सवेरे

 सुबह सवेरे घर का द्वार जब खोला  लगा, प्रकृति भी बोल रही है,आनन्द का सिंधु धरा को दे रही है  ठंडी हवा का झोंका मानों बोल रहा था ,आओ सांसो में  ताजगी भर लो , आंखो से प्रकृति का आनन्द ले लो  वृक्षों की डालियां झूम रही हैं ,झूम- झूम  के तन को भी सहला रही हैं,मन को खूब भा रही हैं,पौधों पर ओस की बूंदें मोती सम सज रही हैं .. खिली - खिली धूप का उजाला ,मन में नव ऊर्जा भर रहा.है , नव दिवस का नव सवेरा मन में उत्साह भर रहा है. कुछ नव नूतन करने को प्रेरित कर रहा है. पक्षियों की चहचहाहट कानों.में मधुर संगीत घोल रही हैं .. प्रकृति भी अपने रहस्य खोल रही है , वसुन्धरा पर अपना प्यार लुटा रही है जीवन का मतलब दे रही है  प्रकृति ही वसुन्धरा का श्रृंगार  प्रकृति ही वसुंधरा का आधार  प्रकृति से बागों में बहार. वसुन्धरा पर.प्रकृति का संसार   प्रकृति जीवन का आधार.  प्रकृति से भरपूर  आनन्द. प्रकृति से समृध् रहे संसार  प्रकृति जीवन का आधार....

अच्छाई

 समुद्र में कंकङ भी हैं ,मोती भी हैं  कोयले की खान में कोयला भी है, हीरे भी हैं इसी तरह संसार में अच्छाई भी है ,बुराई भी हैं बुराई जो बहुतायत में दिखती है, ऐसा नहीं  अच्छाई कम है ,अच्छाई भी बहुतायत में है  किन्तु, बुराई के अंधेरे काले धुऐं के कारण  अच्छाई नजर नहीं आती ..हल्का सा धुआं  छंटा अच्छाई ही अच्छाई... बुराई  के अस्त्र प्रताड़ित करते हैं मनोबल कमजोर भी  करते हैं ...यहीं सब रहस्य छिपे हुए हैं ..सह जाओ प्रताड़ित  होकर टूटना नहीं ..काला धुआं छटते ही ,उजाला ही उजाला है ...

स्वदेश का स्वाभिमान

हम.शुद्ध स्वदेशी हैं ,हम मिट्टी के दीपक हैं, हम अंधेरे में उजाले की चमक हैं  कुम्हार के आंखों की चमक हैं ..हम कुम्हार के हाथों की मेहनत हैं ,हम.स्वदेश का स्वाभिमान हैं ..हम.मिट्टी के दीपक चकाचौंध से दूर.भीतर एक उजाला लिए बैठे होते हैं ...हममें गुरूर है.. भारत का स्वाभिमान हैं..