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रामनवमी की शुभकामनाएं

रामनवमी की शुभकामनाएं  हर्षित हैं सभी दिशाऐं  राम नाम से शुभ आशायें   राम नाम मिश्री सा मीठा मुख जापे तन प्रफुल्लित दीखा  ह्दय आनन्दित ,मन हर्षित भीगा  नयन की चमक.. चंद्रमा सी शीतल  मन चंचल स्थिर सा दीखा  तन नाचे  मुख राम नाम मीठा सा जापा  तन-मन का वियोग.. दूर हुये सब भ्रम के रोग  चहूं ओर सब शुभ संयोग  राम नाम अमृत का प्याला  पीवें जो मन हर्षित हो मतवाला  राम नाम है.. मन सुख देने वाला राम नाम अमृत का प्याला  पिये जो मन हर्षित हो नाचे मतवाला  राम राज्य का शंखनाद  दूर हो सब संवाद  राम नाम का बिगुल बजाओ  शंखनाद करवाओ  आरती थाल करो तैयार  श्री राम आये हैं घर - घर आज 

ऋषिकेश गंगा आरती की भव्यता

ऋषिकेश त्रिवेणी घाट संध्याकाल आरती का भव्य चित्र यह दर्शाता है की यहां मां गंगा  की आरती कितने भाव और भक्ति से की जाती है..।गंगाजी की आरती में सभी लोग बड़ी श्रद्धा से भाग लेते हैं। देश - विदेश से भक्त आकर गंगा आरती पूजन.. से मन को भक्ति मय रंग से सरोबार कर मन को संतुष्ट करते हैं...  गंगा आरती के बाद होने वाले भजन भक्तों को मंत्रमुग्ध कर भक्ति के रंग में रंग नाचने को बाध्य कर देते हैं।   उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री धाम स्थित है.. वहां के बर्फीले पहाड़ों से कुछ किलोमीटर की ऊचाईय पर गौमुख से भागिरथी नदी निकलती है...  .

ऋषिकेश की विरासत

☺☺☺  उत्तराखंड की विरासत - - मां गंगा का अमृतमयी पवित्र जल... गंगा का जल... मात्र जल नहीं अमृत है... भारतीयों के लिये,समस्त संसार के लिये.... वरदान है औषधि है।  तन-मन को पवित्र करने वाली मां गंगे का अमिय जल अद्भुत है अतुलनीय विरासत है ऋषिकेश के लिए...   ऋषिकेश.... ऋषियों की भूमि... दिव्य शक्तियों की भूमि... ऋषिकेश की महिमा... मां का गंगा का अमृत जल... बद्रीनाथ.. केदारनाथ का आशीर्वाद... गंगोत्री - यमुनोत्री की शीतलता.. जो तन मन को शांति प्रदान करती है.... *त्रिवेणी घाट* - - - मां का पवित्रतम घाट... त्रिवेणी - - तीन नदियों का संगम... जहां तीन नदियों का जल *मां अलकनंदा* मां सरस्वती *भागीरथी का जल एक साथ मिलकर मां गंगा के अमृतमयी जल के रुप में प्रसाद देता है... 

नये रंग

मेरी मित्र अराधना जो बहुत ही खुशमिजाज इंसान थी।  लेकिन कुछ समय से गुमसुम, चुपचाप रहने लगी थी... यूं तो वो किसी से कुछ कहती नहीं थी... लेकिन मेरे बहुत कहने पर वो फूट-फूटकर रोने लगी...  फिर अराधना ने बताया कि जिसे वो अपना समझ रही थी... वो अपना नहीं निकला..  मेरा उपयोग किया जा रहा था, जब मुझे पता चला, तब मैं बहुत दुखी हुई.... दुख की बात थी.. अराधना को लगने लगा था, उसकी भी अहमियत है.. उसे भी कोई पसंद करता है। जब कोई आपको अपनापन दे.. आपका ध्यान रखे.. आपको पल-पल समझाता रहे... कि आपके लिए अच्छा क्या है बुरा क्या है.. तो निसंदेह आप उस व्यक्ति को अपना अजीज समझने लगते हैं। आप कई सपने देखने लगते हैं... आपके जीवन के तार आपके उस अजीज से जुड़ जाते हैं... फिर तो जागते - उठते हर पल आप उस अजीज व्यक्ति से संबंधित अपने जीवन की खुशियां ढूढ़ने लगते है। स्वर्ग सा सुंदर रामराज सा लगने लगता है सब कुछ.... किन्तु यह भी सच है कि, रामराज में भी मंथरा थी...  फिर यह तो कलयुग है... कलयुग में अनगिनत मंथरायें हैं... अब मर्याद की बात तो कहानियों में ही मिलती है... कैकयी तो हर कोई है यहाँ ...  बस...

शुभ संजोग नववर्ष मंगलमय

चैत्र प्रतिपदा शुक्ल पक्ष नव वर्ष नव आगमन  मां के शुभ नवरात्रों की  शुभकामनाएं,मां देने आयीं हैं दुआएं लेने आयीं हैं बलायें, मां के आशीर्वाद  की आ रही हैं सदायें.. स्वस्थ रहो  मस्त रहो... मां के आशीर्वाद से भर लो झोलियां  आ रही हैं भक्तों की टोलियां  लगा रहे हैं भक्त माता के जयकारों की बोलियां  आयो सब मिल माता की ज्योत जलायें  मन का अंधियारा दूर भगायें  शुभ मंगल बेला का लगा है रेला  खुशियों का लगा है मेला  जागृति की शुभ मंगल बेला  शुभ का दर्शन  शुभ कर्मों का लगा दो योग होगा जीवन में शुभ संजोग..  मां ही सृष्टि की पालनहार  मां की ममता से भरपूर रहे समस्त संसार।। 

सत्य की खोज

जानते तो सब हैं... पर जानना नहीं चाहते... भ्रम में ही रहना पंसद है सबको... जब भ्रम बेहद खूबसूरत हो... तो खूबसूरती में ही कुछ पल रह लेना बेहतर है.. हाथ में खिलौना पकड़ा कुछ पल बच्चों का दिल बहलता है... बेहतर है... बस ऐसे ही जीवन कट रहा है हम मनुष्यों का....   *सत्य की खोज... निकल पड़ी सत्य की खोज में... जाना *सत्य तो मौन है*... सत्य शांति का महासागर ** सत्य प्रदर्शन नहीं करता.. *सत्य तो स्वयं सिद्धा स्वयं में पूर्ण है.... आकर्षणों की भीड़ मे... उजालों की चकाचौंध में सत्य नहीं है..  यह सब तो नश्वर है.. दिखावा है, मन को बहलाने का साधन है... सत्य तो अजन्मा है...  सत्य मात्र किरणों का प्रकाश नहीं.... उजालों काअम्बार ही नहीं... **सत्य स्वयंमेव सूर्य है **जिसके  आगे हम सब राख हैं.... अस्तित्व मनुष्य का धरती पर... तन के पिंजरे में प्राण... प्राणों ने छोड़ा तन मिटा इंसान का नामोंनिशान...  इंसान के शुभ कर्म ही उसकी पहचान है... रह जाना भावों का समुंदर विचारों का कौलाहल... रसायनों का उठता कोहराम है.... माना की रसायनों की शक्ति.... शक्ति में ऊर्जा...  ऊर्जाओं का सं...

हर रंग कुछ कहता है

रं रं रं  रं  र      हर रंग कुछ कहता है  रंगों की भी अपनी कहानी होती है  लाल रंग सौन्दर्य का प्रतीक स्वस्थ जीवन का देता संदेश  हरा रंग सुख समृद्धि सम्पन्नता प्राण वायु का भण्डार  सफेद रंग सूख शांति  सौम्यता सरलता से भरपूर  गुलाबी रंग नम्रता एवं मासूमियत से पूर्ण  रंग जीवन को खूबसूरत बनाते है रंग बेहतरीन हो तो हर दिन एक त्यौहार है।  रंग ही प्रकृति का सौंदर्य है  रंगो के सुन्दर तालमेल सेआकर्षक रंगोली बनती है  यूं ही हर रंग को थोप देना रंगों का अपमान है  हर रंग अपनी विषेशता लिये होता है  लाल रंग माथे पर यश कीर्ति का संदेश देता है  हरा रंग गालों पर सुख-समृद्धि का प्रतीक होता है  रंगों का त्यौहार होली.. रंगों का सुन्दर सामंजस्य होता है...  रंगों से बनी यह दुनियां  फिर क्यों ना हर रंग से प्यार करें  प्रकृति ने भी तो स्वयं को रंगों से सजाया है  रंग-बिरंगे पुष्प वसुंधरा की शोभा बढाते हैं  रंगो से जीवन की खूबसूरती है..  रंगों को थोप देना रंगों का त्यौहार होना  बल्कि ह...