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तारीफ़ करना भी एक गुण है

*तारीफ़ करना भी एक गुण है तारीफ भी वही कर सकता है जो नम्र है, अंहकार रहीत है..    तारीफ करना भी उसी की काबिले  तारीफ है, जो तारीफ सुनने के बाद भी  सहज रहे, अंहकार का दंभ ना हो  समझ परमात्मा प्रदत काम अपने  काम में एकत्व हो।  तारीफ में किसी की खूब तालियां  बज रहीं थी.. कुछ एक हाथ भी ना  उठा हिला पा रहे थे, शायद अकड़न  ज्यादा थी उनके मन - मस्तिष्क में  उन्हें मानसिक और शारीरिक योगाभ्यास की अधिक आवश्यकता थी। तारीफ करना सिर्फ सिर चढाना नहीं  किसी का मनोबल बढाना भी होता है  किसी को प्रोत्साहित कर ऊंचा उठाना भी होता है।  अद्भुत, अविष्कारक, चमत्कार कराना भी होता है। 

शिकायतें

किससे क्या शिकायत करूं,  मेरी हर एक शिकायत पर एक दावा होगा  उन दावों का हिसाब देने का समय नहीं।  जानती हूं मैं एक शिकायत गिनवाऊंगी अनेकों शिकायतों से मैं घिर जाऊंगी  कौन सी बात किस के लिए नाराज होने  की वजह होगी, यह मैं भी नहीं जानती मेरी अच्छी बात भी, मेरे लिए सजा होगी।  ढूढ लेगें लोग कमियां जाने किस -किस बात पर मेरी हर बात ही शिकायतों का राज होगी। शिकायतें उससे करूं जो समझने के काबिल हो  वरना शिकायत करना भी मेरे लिए गुनाह होगा  और जो अपना होगा वो शिकायतों का मौका  ही नहीं देगा। 

क्यूं, कहां, कैसे, किसलिए

 क्यूं, कहाँ, कैसे, किसलिए, ऐसे, वैसे, अच्छे- बुरे  क्यों नहीं हम ओरों के जैसे-- इसी कशमकश में उलझे अपनी बात लिखने लगे.. लिखते और लिखते रह गये। अब क्यूँ कहां, कैसे, इसलिए, ऐसे-वैसे  में उलझना नहीं, सुलझाना था,  विचारों को साकारात्मक किया ओर  क्यूँ, कहाँ, कैसे, किसलिए, ऐसे-वैसे की  खूबसूरती बड़ गयी।    खूबसूरती को ही लिखकर परोस देते हैं,  सोचकर की हमारी लेखनी साकारात्मक है  बस लिखे और लिखे जा रहे हैं  शायद परमात्मा ने हमें इसलिए चुना होगा।  हमें अब लिखने के अलावा कुछ भाता ही नहीं  बस शुभ विचारों के बीज डाले जा रहे हैं  कभी कोई फल तो मीठा लगेगा  किसी का जीवन परिवर्तन होगा  और हमारा लिखना सफल होगा। 

ध्यान योग साधना

  ध्यान योग का महत्व... ध्यान योग साधना साधारण बात नहीं... इसका महत्व वही जान सकता है.. जो ध्यान योग में बैठता है।  वाह! "आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी" आप धन्य है... आप इस देश,समाज,के प्रेरणास्रोत हैं।  आप का ध्यान योग साधना को महत्व देना, समस्त देशवासियों के लिए एक संदेश है... की ध्यान योग का जीवन में क्या महत्व है। ध्यान योग साधना में कुछ तो विशिष्टता अवश्य होगी...वरना इतने बड़ देश को चलाने वाले प्रधानमंत्री के पास इतनी व्यस्तता के बावजूद इतना समय कहां से आयेगा कि वह सब काम छोड़ ध्यान में बैठे।  यथार्थ यह की ध्यान योग साधना बहुत उच्च कोटी की साधना है... दुनियां के सारे जप-तप के आगे अगर आपने मन को साधकर यानि मन इंद्रियों की की सारी कामनाओं से ऊपर उठकर मन को दिव्य शक्ति परमात्मा में में लगा लिया तो.. आपको परमात्मा से दिव्य शक्तियां प्राप्त होने लगेगी। लेकिन इसके लिए आपको कुछ समय के लिए संसार से मन हटाकर.. ध्यान साधना में बैठना होगा... एक बार परमात्मा में ध्यान लग गया और आपको दिव्य अनुभव होने लगें तो आप स्वयं समय निकालेगें ध्यान साधना के लिये।  आप सोचिए अग...

उत्तराखण्ड एक ब्रह्मांड

उत्तराखण्ड ब्रह्मांड का अंश है।  यूं तो समस्त पृथ्वी ही ब्रह्मांड का अंश है.. किन्तु उत्तराखण्ड में आज भी देवत्व बचा हुआ है।  तभी तो उत्तराखंड को देव भूमि भी कहा जाता है।  देव भूमि यानि दिव्य शक्तियों की अनुभूति।  हिमालय की ऊंची चोटियों में शिव का वास है।  समस्त संसार को जहरीले विष के जहर से बचाने के लिए विष को अपने कंठ में धारण कर शिव का कंठ नील वर्ण का हो गया था.. उन्हीं नीलकंठ महादेव का दिव्य मंदिर ऋषिकेश में ही है।  श्री विष्णु भगवान की दिव्य तपस्थली बद्रीनाथ भी उत्तराखण्ड की ऊंची चोटियों में ही स्थित है.. ऋषिकेश से श्रीनगर कर्णप्रयाग , रूद्रप्रयाग, तीन नदियों का  महासंगम अलखनंदा,भागीरथी एवं सरस्वती.. जो मैदानी स्थलों पर जाकर  पतित पानी मां गंगा के नाम से समस्त मानव जाति का कल्याण करती है।  केदारनाथ धाम.. कहते हैं पाण्डवों ने इस मंदिर की  स्थापना की थी। भगवान शिव कलयुग में भक्तों का उद्धार करने के लिए अपना आशीर्वाद दे रहें हैं। 

ऋषिकेश की विरासत

ऋषिकेश स्वयं एक विरासत है, समाज, एवं समस्त देश के लिए.. परमात्मा द्वारा प्रदत प्राकृतिक सौन्दर्य की अद्भुत,अतुलनीय, आलौकिक दिव्यता ।। ऋषिकेश को अध्यात्म एवं योग का आशीर्वाद प्राप्त है। ऋषिकेश में अध्यात्म के संग आधुनिकता भी अपनी भरपूर उपस्थिति दर्ज करा चुकी है।  ऋषिकेश का सौन्दर्य, प्राकृतिक खुबसूरती सबको अपनी ओर आकर्षित करती है। हर उम्र का इंसान यहां आकर मन की प्रसन्नता को प्राप्त कर आनन्द को प्राप्त करता है। ऋषिकेश घूमने आयें, आप सब का स्वागत है।  परन्तु आप सबसे एक प्रार्थना है कि, ऋषिकेश या किसी भी अन्य प्राकृतिक, सौंदर्य के धनी क्षेत्र में आप घूमने जाते हैं तो, आप वहाँ जाकर गंदगी ना फैलायें, वहां के प्राकृतिक सौन्दर्य से छेड़छाड़ ना करें.. अगर आप वास्तव में इस प्रकृति से प्यार करते हैं.. और बार-बार पहाड़ी प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थलों पर घूमने आना चाहते है तो अगली बार के लिए इन्हें सुरक्षित रखें।।।। प्राकृतिक सौंदर्य समस्त मानव जाति की धरोहर है मान है, प्रतिष्ठा है.. अपनी धरोहर का संरक्षण करना हम  सबका कर्तव्य है, कृपया इन्हें सम्भाल कर रखिये। ऋषिकेश एक अध्यात्म न...

मंजिल

 भटकता रहा मंजिलों की तलाश मे  दर -दर.. थक हार के बैठा तो पाया  जहाँ से चला था वहीं तो थी,मंजिल मेरी।। दूर आसमानों में किसी सुंदर जहाँ की तलाश में  फिर निकल पड़ता है मन मंजिल की तलाश में।  राहों के उतार - चढाव को पार करते-करते  फिर घबराता हूँ, सोचता हूँ, जहाँ से चला था  मंजिल वो ही सूकून भरी थी।  बुद्धि की तीव्रता कहां चैन लेने देती है  मन को बहुत उकसाती है।  सपनों के महल बनाती है जो है उसमें कहां संतुष्ट होती है  दूर आसमानों की ऊचाईयों में  खुशियों के महल बनाती है।