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स्वतंत्रता दिवस

आज"स्वतंत्रता दिवस"  के   शुभ अवसर पर फिजाओं में खुशियों की लहर है वातावरण में मनमोहक सी महक है अम्बर में आजाद परिंदों की चहक है प्रतीत होता सब और सहज है आज वादियों में केसर की महक है प्रतीत होता सब और माहौल सुन्दर ,सरस,सरल,और सुगम है सकारात्मक सोच और निस्वार्थ मोहब्बत से फिजाओं में चुहुं और सब शुभ मंगलकारी है बगीचों में गुलमोहर से  खिला-खिला चमन है आकाश की ऊंचाइयों में भारत माता की शान में  विजय पताका फहराता तिरंगा गर्व से गुन-गुना रहा भारत मेरी माता मेरा देश मेरा अभिमान है ।

मन के मोती

मैं जानती हूं....  उसको लिख पाना मुश्किल है जिसने मुझे लिखा है। फिर भी चाह जागी है, मन में..  मैं उस पर कुछ तो लिखूं  इससे पहले कि मैं,उस पर कुछ लिखूं - - मैं शब्द बुन भी नहीं पाती वो मुझ पर कुछ नया  लिख देता है...    वो मेरे चेहरे पर खुशी बनकर मुस्कराता है  वो मेरे लबों पर गीत बनकर आ ही जाता है  मैं उसको गुनगुनाना चाहती हूं  गीत खुशी के गाना चाहती हूं।  मैं जानती हूं.. वो मेरे भावों में है  मेरे विचारों में है  वो मेरे चेहरे की हर खुशी मे है  मेरी सफलताओं के हर कदम में है  उसके ही आशीषों से, दुआओं से  उन्नति है मेरी.. आज जो कुछ भी हूँ मेरे ऊपर उसका ही साया है. वो मेरा हमसाया जिसने हर  परिस्थिति में मेरा साथ निभाया है। 

तीज का त्यौहार खुशियों की सौगात

.  पक्षियों के चहकने की आवाज   खनकती चूड़ियों का आगाज   सुहागनों के हाथों में रचती पवित्र    मेहंदी की सौगात आओ सखियों     झूमे नाचें गाएं आया है हरियाली तीज का त्यौहार      **सावन का मौसम आया संग अपने सुख-समृद्धि लाया वर्षा की फुहारों से धरती का जल अभिषेक जब होता है प्रकृति प्रफुल्लित हरी-भरी हो जाती है वृक्षों की डालियां अपनी बाहें फैलाती हैं झूला झूलन को सखियों को बुलाएं प्रकृति संग सखियां भी सोलह श्रृंगार करती हैं वृक्षों की ओट में बैठ कोयल भी मीठा राग सुनाती है समस्त वातावरण संगीतमय हो जाता है चूड़ियों की खनक मन को लुभाती है हरियाली तीज को देवी पार्वती ने भी सोलह श्रृंगार और कठिन उपवास कर शिव को प्रसन्न किया था उस दिन से हरियाली तीज की शुभ बेला पर सुहागनें उपवास नियम करती हैं वृक्षों पर झूलों की पींगे जब चड़ती हैं आसमान की ऊंचाइयों में सखियां झूल-झूल कर हंसती है धरती झूमती है प्रकृति निखरती है पक्षीयों की सुमधुर ध्वनियों से सावन में प्रकृति समृद्ध और संगीतमय हो जाती है**

मैं किसी की आंखों में खुशी बनकर चमकूं

मैं रहूं या ना रहूं, मेरी आंखे रह जायें  मेरी आंखे दुनियां देखती रहें  मैं ना सही मेरी आंखे अमर रहें  किसी की आंखों में खुशी बनकर चमकूं  कितने बेहतरीन होगें वो पल जब यह  कारवां चलेगा...  किसी के नयनों में ज्योति बनकर चमकूं  यह मेरा सौभाग्य हो गया,मेरा अहहोभाग्य हो गया।   सौभाग्यशाली हैं,जिनके मन में देने के भाव हैं  भाग्यवान हैं, दुनियां के सबसे अमीर इंसान हैं वो जो किसी को कुछ भी देते हैं।  आप किसी का दिल ना दुखायें, किसी को अपनी मुस्कराहट का दान दें... किसी भूखे को भोजन दें किसी को कुछ ऐसा हुनर सिखा दें कि वह अपना जीवन अच्छे से चला सके... किसी के आगे हाथ फैलाने की बजाए... किसी को देने के काबिल बन सके... आज मैं आपको जागरूक करने आयी हूँ... अंगदान, महादान के बारे में... अंग दान यानि महादान... आप सब जानते हैं, यह शरीर नश्वर है.. एक ना एक दिन हर किसी को इस दुनियाँ से जाना है, और फिर उसके बाद यह शरीर किसी काम का नहीं.. तो फिर क्यों ना हमारे तन के राख हो जाने से पहले.. अपने अंगों का दान दें दें.. जिससे कई जरूरतमंद जीवित इंसानों को जीवन द...

अमृत वचन

 तन लागे पीड़ा ,  रोए उदास दृग नीरा ताके नयन उपवन, मन सताये पीरा ।। भूखे का अपराध ,सदा  रहे निष्पाप  अपराध का संताप ,अपराधी यही पश्चाताप।।   नयन नीर की पीर, बात बड़ी गम्भीर  ह्रदय पीड़ा का तीर ,चक्षु अश्रु अधीर  ।। विरह वेदना लघु रात, रुदन ह्रदय अश्रुपात झूठी जग की सब रीत प्रभु कृपा संभले हालात।। अभावों का दर्द ,‌बढें कदम शहर ओर स्वर्ण कनक छोड़, मिली ठोकर हर छोर   ।। छिपा संदेशे में दर्द,ह्रदय विदारक पैगाम ।    समा तस्वीर गया, ताका जिसे सुबह-शाम ।। अज्ञात शव दरिया बहे, परिचित रहे अंजान  । गिद्ध,जीव भोज करें समय बड़ा बलवान।।   पशुता का वरण मानवता दी भुला । मानव तुम ही देव चिंता रही सता।।  रहस्य मय जगत , रहस्य अदृश्य अनेक । दामिनी जल मध्य ,जलकण जैसे मेघ ।। वाणी का अपना मोल, मृदुभाषी मीठा बोल।‌‌          वाचाल हुआ बेमोल,मौन भाषा अनमोल ।। रहस्य मय जगत में, रहस्य अदृश्य अनेक । दामिनी जल मध्य में, आत्मबल धन सर्वश्रेष्ठ ।।  सेवा धर्म सर्वोपरि   समर्पण की शक्ति बढ़ी । धर्म मर्...

जीत का बिगुल बजा

 जीवन  में आगे बढने के लिए   बहाव संग ठहराव भी जरुरी है   देने की चाह से कर्म  प्रारम्भ  करिये  मिलने की प्रक्रिया स्वतः सिद्ध  होती जायेगी  डर के आगे जीत है  चुनौतियां आपके दरवाजे पर आकर   निरंतर  दस्तक देगीं  आपको धमकायेगीं  आपके हौसलों को इसकदर कमजोर कर   देगीं कि आप टूट कर  बिखर जाओ ... पर आप टूटना नहीं .. उम्मीद  की एक किरण  अपने संग रखना ... अपने हौसलों के पंखो को उड़ान के लिए  तैयार  रखना  और  कभी भी मौका देखकर   उङ जाना दूर आसमान  की उंचाईयों में  और रच देना इतिहास  ... अक्सर  दुआओं में कहता है यह मन  थोङा आप मुस्कराओ थोङा हम मुस्कराये   एक दूजे शुभचिंतक बन जाये  ऊपर वाले ने भेजा है देकर जीवन   फिर क्यों ना पुष्पों सा जीवन बिताएं हम  फलदार वृक्ष बन जायें हम नदियों का जल बन जायें हम ..  आंगन की शोभा बन बागों की रौनक बढायें हम  हवाओं में घुल- मिल सुगन्धित संसार कर जायें हम अक्सर ...

उद्देश्य होना जरूरी है

उद्देश्य से ही जीवन का अर्थ है, बिना उद्देश्य जीवन व्यर्थ है।  उद्देश्य ही जीवन का माध्यम है, उद्देश्य से जीवन सुगम्य है। उद्देश्य के रस ने जीवन में रस घोला  मन के सभी गुण दोष भीतर से बोला।  उद्देश्य जीवन को धारा प्रवाह देता है। उद्देश्य ही जीवन का औचित्य बताता है।  विषय का चयन मनुष्य जीवन के चरित्र को दर्शाता, विषय ही मनुष्य जीवन के अर्थ को बतलाता। शुभ विषय मनुष्य जीवन का उद्धार करता अशुभ विषय वहीं पाताल की ओर धकेलता।  शुभ विषय मनुष्य को सही राह दिखाता दुविधाओं से लड़ आगे बढ़ने की राह दिखाता। किस मनुष्य ने किस विषय का चयन किया  उसके चरित्र का दर्पण बोलता. फिर दर्पण ही जीवन के सच के रहस्य खोलता।