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मम्मी तुम क्या ही करती हो

मम्मी तुम क्या ही करती हो  दिन भर इधर से उधर घूमती रहती हो  जाने क्या ठीक करती रहती हो..  रहने दिया करो जो सामान जहाँ पड़ा हो..  जिसे जरूरत होगी खुद ढूढ लेगा...  तुम हर रोज सामान को वैसे ही सम्भाल कर   रख देती हो... मम्मी तुम्हें गुस्सा नहीं आता?  अपना फर्ज कह सब कुछ सह लेती हो..  मम्मी तुम क्यों इतनी  चिंता करती हो..?  घर का कोई सदस्य ढंग  से खाना ना खाये तो तुम उदास हो जाती हो..  अगले दिन उसका मनपसंद खाना बना देती हो..  बच्चों की परवरिश में अपना सुख-चैन भी भुला  देती  हो.. उन्हें पढाती हो.. पल-पल उनकी हर  क्रिया पर पैनी नजर रख उनका सही मार्गदर्शन करती हो.. उन्हें ज्ञान की बातें सिखा आदर्श की  कहानियां सुना उनका मानसिक विकास करती हो..  सुबह -सुबह उठकर  अपनी सेहत का वास्ता देकर  बाहर टहलने जाती हो.. टहलती कम दोस्तों के संग गप्पे ही ज्यादा लड़ाती हो... . सबकी पंसद का ध्यान रखकर  एक डोर बेल पर दूध वाला..  दूसरी पर सब्जी वाला, तीसरी पर गाड़ी धोने वाला  चौथी पर कूड़े वाला,...

भारतीय व्यंजन

भारतीय व्यंजनों का अद्भुत आधार  सुपाच्य, सेहत के साथ..  जी भर जी लो जिन्दगी पानी - पूरी सी खट्टी-मीठी जिन्दगी मुंह से उतरा स्वाद का खजाना  जीभ ने जाना,कहा यूं ही साथ निभाना इडली, साम्भर, डोसा, दाल भाटी लगे  वाह भई वाह लगे चोखा ही चोखा..  गुलाब जामुन की मिठास रसगुल्ले ने ली तराश.. मीठी सी आस जीभ ने कहा तुम रहना पास-पास  चटपटी चटनी पकौड़े, समोसे में जो लिपटी  जुबान बोली.. तुम हो बड़ चचटपटी..  भारतीय व्यंजन का खजाना..  सुपाच्य, दाल भात, तरकारी बुझाती उदर  क्षुधा की आस, सेहत भी निभाती साथ  करारी पापड़ी पर पड़ चटपटी चटनी  दही ने निभाया साथ - जीभ ने कहा  वाह भई वाह क्या स्वाद..  व्यंजनों का भरा खजाना  भारतीय लस्सी,और छाछ  सेहत के संग स्वाद मक्की की रोटी सरसों का साग  आलू गोभी के करारे पराठों में मक्खन का स्वाद  सेहत से भरपूर सुपाच्य स्वाद ही स्वाद..  शुद्ध - शाकाहारी ताजे भोजन की व्यवस्था प्रतिदिन पाकशाला में पकता सेहत का खजाना  भारतीयों ने सदा बेहतरीन को ही अपनाना जाना... भारतीय भोजन भरपूर सेह...

संग सखियों के ठहाकों में

बहुत अंतराल के बाद  संग सखियों के ठहाकों में   जीवन को जीवंत देखा  खुशियों की फुलझडीयां को चेहरे पर खिलते देखा  उम्र की परतों को पीछे हटते देखा  दिलों की जिंदादिली को जवां होते देखा  बिन त्यौहार के एक नया  त्यौहार बनते देखा...  यादों के गुलदस्ते में अनगिनत  खूबसूरत पुष्प जो छिपे थे  सुस्त अवस्था में फिर से खिलते देखा।  यादों की ठहाकों की मीठी गठरी  खुलते देखा...  बहुत दिनों के बाद बचपन को फिर से  खिलते देखा ठहाके लगा जीवंत होते देखा।   

रक्षा का बंधन

रक्षाबंधन  यानि की रक्षा का बंधन  यह बंधन है रक्षा का-- भाई - बहन  के प्रेम का.. विश्वास का  प्रेम, प्यार में अपनत्व का मीठे एहसास का..  कुछ खट्टी-मीठी शरारतों का  लड़कपन की बातों का  कोई किसी से कमतर नहीं..  फिर भी एहसास प्रेम और समर्पण सही  रिश्तों के बंधन में पक्के दिलों के बंधन हैं  बंधन की खूबसूरती से ऊपर भी  दिलों की पक्की डोर है...  वही तो भाई - बहन के रिश्ते की मीठी डोर है।   

सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा

सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा हम बुलबुले हैं इसकी यह गुलसिता हमारा.. अद्भुत अतुलनीय दिव्य न्यारा  यह दृश्य लगता है बहुत ही प्यारा  आसमान की ऊचाईयों में जब लहराता है  भारत मां के स्वाभिमान में तिरंगा प्यारा.. देश के वीर जांबाज सैनिक जो रक्षा कवच हमारे  .. दुश्मन से से लड़ते मर जाते  कट जाते पर देश पर को सदा  सुहागन रखते।  सरहद पर तैनात वीर सिपाहियों को  शत-शत नमन हमारा  हमारे देश के रक्षाप्रहरी हमारे सैनिकों  की शान में अभिमान में कुछ शब्द कहना चाहूँगी  शोला हैं हम,चिंगारी हम आँधियों के वेग की हिस्सदारी हम सूर्य के समान हम में है तेज हिमखंडों की भांति शीतल भी हम , हिमालय सा विशाल सीना है ,अपना धीर भी हम ,वीर भी हम । मात्रभूमि की रक्षा प्रहरी हम।  आँधियों से लड़ना शौंक है अपना तूफानों में तैरती अपनी कश्तियाँ ,। मात्रभूमि है ,माँ के जैसी । माँ की ममता है ,कवच हमारी जो शून्य डिग्री के तापमान में रहकर भी चलती रहती है सांसें हमारी । मात्रभूमि के विरोध में जो एक आवाज भी उठ जाये तो माफ़ नहीं होगी गद्दारी ।।देश की रक्षा है, अपनी जिम...

स्वतंत्रता दिवस

आज"स्वतंत्रता दिवस"  के   शुभ अवसर पर फिजाओं में खुशियों की लहर है वातावरण में मनमोहक सी महक है अम्बर में आजाद परिंदों की चहक है प्रतीत होता सब और सहज है आज वादियों में केसर की महक है प्रतीत होता सब और माहौल सुन्दर ,सरस,सरल,और सुगम है सकारात्मक सोच और निस्वार्थ मोहब्बत से फिजाओं में चुहुं और सब शुभ मंगलकारी है बगीचों में गुलमोहर से  खिला-खिला चमन है आकाश की ऊंचाइयों में भारत माता की शान में  विजय पताका फहराता तिरंगा गर्व से गुन-गुना रहा भारत मेरी माता मेरा देश मेरा अभिमान है ।

मन के मोती

मैं जानती हूं....  उसको लिख पाना मुश्किल है जिसने मुझे लिखा है। फिर भी चाह जागी है, मन में..  मैं उस पर कुछ तो लिखूं  इससे पहले कि मैं,उस पर कुछ लिखूं - - मैं शब्द बुन भी नहीं पाती वो मुझ पर कुछ नया  लिख देता है...    वो मेरे चेहरे पर खुशी बनकर मुस्कराता है  वो मेरे लबों पर गीत बनकर आ ही जाता है  मैं उसको गुनगुनाना चाहती हूं  गीत खुशी के गाना चाहती हूं।  मैं जानती हूं.. वो मेरे भावों में है  मेरे विचारों में है  वो मेरे चेहरे की हर खुशी मे है  मेरी सफलताओं के हर कदम में है  उसके ही आशीषों से, दुआओं से  उन्नति है मेरी.. आज जो कुछ भी हूँ मेरे ऊपर उसका ही साया है. वो मेरा हमसाया जिसने हर  परिस्थिति में मेरा साथ निभाया है।