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टानिक प्रोत्साहन का

 थोडा सा प्रोत्साहन""""" थोङा सा प्रोत्साहन टानिक का काम करता है ।   सफलता और असफ़लता  जीवन के दो पहलू हैं। एक ने अपने जीवन में सफलता का भरपूर स्वाद चखा है उसकी सफलता का श्रेय सच्ची लगन ,मेहनत ,दृढ़ -इचछाशक्ति ,उसका अपने कार्य के प्रति पूर्ण- निष्ठां व् उसके विषय का पूर्ण ज्ञान का होना था।  और उसके व्यक्तित्व में उसकी सफलता के आत्मविश्वास की छाप भर -पूर थी।   वहीं दूसरी तरफ़ दूसरा वयक्ति जो हर बार सफलता से कुछ ही कदम दूरी पर रह जाता है ,उसके आत्म विश्वास के तो क्या कहने, परिवार व् समाज के ताने अपशब्द निक्क्मा ,नक्कारा ,न जाने कितने शब्द जो कानों चीरते हुए आत्मा में चोट करते हुए ,नासूर बन दुःख के  सिवा कुछ नहीं देते।    उसे कोई चाहिये था जो उसके आत्म विशवास को बड़ा सके, उसे उसके विषय का पूर्ण  ज्ञान प्राप्त करने में सहायता करवाये ।    जीवन  में आने वाले उतार -चढ़ाव कि पूरी जानकारी दें ,और सचेत रहने की भी पूरी जानकारी दे। उसे  सरलता का भी  महत्व भी समझाया  गया, सरलता का मतलब मूर्खता कदापि नहीं है।   ...

ख्वाबों को ख्वाब ही रहने दो

ख्वाबों को ख्वाब बनकर ही  रहने दो, हसीन ख्वाब चेहरे पर मुस्कान  बनकर दिल में बहार बनकर इठलाते हैं।  जब मन को कोई अच्छा लग जाता है जब किसी पर दिल आ जाता है।  वो चांद सा नजर आता है ख्वाबों सा सुंदर ही सही  हसीन तो नजर आता है  हकीकत को क्यों जानूं  वो मुझे ऐसे ही भाता है  हर एक ख्वाब थोड़े सच हो जाता है  ख्वाबों का होना ही  ख्वाबों को हसीन बनाता है  समीप जाने पर तो चांद भी  कहां चांद रह जाता है  दूर से ही जो दिल को लुभाता है वो खास हो ही जाता है  चेहरे पर खुशी बनकर मुस्कराता है  ख्वाब का ख्वाब होना ही हसीन हो जाता है  दिल की दुनियां में रौनक बनकर इतराता है मन को कुछ तो भाता है  जब किसी पर दिल आ जाता है। 
ज्ञानदेवी माँ शारदा इत्यस्याः आशीर्वादेन, बुद्धि-  प्रज्ञा-दात्री भगवान् गणेशस्य च प्रेरणा सह   समाजाय शुभ-सकारात्मक-विचारान् समर्पयामि...  ये समाजस्य मार्गदर्शने सहायकाः भविष्यन्ति"  ज्ञानदेवी माँ शारदा इत्यस्याः आशीर्वादेन,  भगवान् गणेशस्य च प्रेरणा शुभ-सकारात्मक-विचारान्  ये समाजस्य मार्गदर्शने सहायकाः भविष्यन्ति"  आगे बढने की जिद्द हो... कुछ बेहतर कर दिखाने का जूनून हो तो... रास्ते मंजिल खुद ब खुद ढूंढ लेते हैं... भला नदिया के बहते पानी को कौन रोक पाया है.... अगर बांध भी बना दिया जाये तो, वो विद्युत  पैदा करने लगता  है... यानि आप में काबिलियत है, और आप प्रयास करते हैं तो निसंदेह सफलता जरूर मिलेगी।  यानि आपके अंदर काबिलियत है, कुछ कर दिखाने का जूनून हो तो.. आपका हूनर बोलेगा....  बचपन से मुझे प्रकृति का सामिप्य मिला... जन्म से लेकर मेरी शिक्षा पहाड़ों की रानी मसूरी हुई... ऊंची-ऊंची पर्वत शिखाएं. हिमालय की गोद में बसा यह बहुत ही रमणीय है... शीतल, स्वच्छ, शुद्ध हवा तन और मन दोनों को आनन्दित कर जाती है। (2)   सफर की तै...

महत्वकांक्षा

सुनीता बड़े- बड़े घरों में काम करती थी.. मुंह की मीठी चापलूसी करना उसकी आदत थी-क्यों ना हो आखिर यही सब तो उसके काम आने वाला था--  वो जानती थी---उसका पति इतना कमाता नहीं.. जो कमाता भी है, वो घर - परिवार के खर्चो में निकल जाता था.. आखिर इतनी मंहगाई में चार बच्चों को पालना.. माता -पिता की दवा का खर्चा कुछ खाने-पीने में ही निकल जाता था।  सपने देखने का हक सबको है, माना की हम कम पैसे वाले हैं.. पर शहरों की ऊंची -ऊंची इमारतों का बनाने में हमारी ही मेहनत छीपी होती है। सुनीता को गांव से शहर आये पांच साल हो गये थे, शुरू के कुछ महीने बहुत संघर्ष करना पड़ा सुनीता को.. नये-नये गांव से आये थे, जल्दी से कोई काम पर भी ना रखता था.. किसी तरह सुनीता के पति को मजदूरी का काम मिला... अभी तक तो फुटपात पर दिन बीत रहे थे, किसी की पहचान से किराये के लिए एक झोपड़ी की व्यवस्था हुई। सुनीता साथ - साथ मजदूरी का काम भी करने लग गयी, बच्चे भी दिन भर वहीं मिट्टी में खेलते रहते,पापी पेट का सवाल था, खाना मिल जाये वो ही बहुत था, स्कूल पढाई तो दूर की बात थी। बच्चों को दिन भर मिट्टी में खेलते देख.. आसपास की बिल्डिंग...

बसंत की बहार

सर्वप्रथम मां शारदे को नमन बसंत पंचमी त्यौहार है, बसंती फुहार का  प्रकृति के नव आगमन का..  ज्ञान की देवी माँ शारदे की उपासना का  जीवन में आगे बढ़ने का..  यह मौसम है प्रकृति के श्रृंगार का..  हमारी प्रकृति इतनी सुन्दर है कि  नील गगन भी पलक नहीं झपकता  एक बार तो नील गगन प्रकृति का सौम्य रुपदेख उस पर मोहित हो गया और लिख डाली  एक कविता - -  निसर्ग के लावण्य पर, व्योम की मंत्रमुग्धता श्रृंगार रस से पूरित ,अम्बर और धरा  दिनकर की रश्मियां और तारामंडल की प्रभा  प्रेम जगत की रीत है, प्रेम मधुर संगीत है  सात सुरों के राग पर प्रेम गाता गीत है प्रेम के अमृत कलश से सृष्टि का निर्माण हुआ  श्रृंगार के दिव्य रस से प्रकृति ने अद्भूत रुप धरा भाव भीतर जगत में प्रेम का अमृत भरा प्रेम से सृष्टि रची है, प्रेम से जग चल रहा प्रेम बिन कल्पना ना,सृष्टि के संचार की  प्रेम ने हमको रचा है, प्रेम में हैं सब यहां  प्रेम की हम सब हैं मूरत प्रेम में हम सब पले  प्रेम के व्यवहार से, जगत रोशन हो रहा प्रेम के सागर में गागर भर-भर जगत है चल रहा प...

जीरो से हीरो तक का सफर

जीरो से हीरो तक का सफर - - जीरो तो वो कभी था ही नहीं,  एक हीरो उसमें हमेशा जीता था।  सपने तो सभी देखते हैं,  लेकिन सपनों का क्या ? उसने भी सपना देखा होगा, नींद खुली तो सपना टूट गया। क्या हुआ, कुछ भी नहीं, सपनों का तो यही हाल होता है, नीद खुली, हकीकत की धरातल पर जब पैर पडे तो सब भूल गये, सपना यादों के किसी पिटारे में बंद हो गया।  हर सपना सच हो जाये सम्भव ही नहीं, मन के ख्यालों की उडान को पकड़ना इतना आसान भी नहीं,  मन के पंख तो सपनों की उड़ान भरेंगे ही, उड़ने दो मन परिंदे को, लौट कर तो यहीं वापिस आना पड़ेगा । लेकिन मन की उड़ान से कोई हीरो तो नहीं बनता,  प्रयासों का सिलसिला जारी रखना पड़ता है, प्रयास कुछ अधूरे कुछ पूरे. सफलता की राह दिखाते पर मंजिल का पता नहीं.. 

प्रेम का अमृत कलश

उद्देश्य से ही जीवन का अर्थ है, बिना उद्देश्य जीवन व्यर्थ है।  उद्देश्य ही जीवन का माध्यम है, उद्देश्य से जीवन सुगम्य है। उद्देश्य के रस ने जीवन में रस घोला  मन के सभी गुण दोष भीतर से बोला।  उद्देश्य जीवन को धारा प्रवाह देता है। उद्देश्य ही जीवन का औचित्य बताता है।  विषय का चयन मनुष्य जीवन के चरित्र को दर्शाता, विषय ही मनुष्य जीवन के अर्थ को बतलाता। शुभ विषय मनुष्य जीवन का उद्धार करता अशुभ विषय वहीं पाताल की ओर धकेलता।  शुभ विषय मनुष्य को सही राह दिखाता दुविधाओं से लड़ आगे बढ़ने की राह दिखाता। किस मनुष्य ने किस विषय का चयन किया  उसके चरित्र का दर्पण बोलता. फिर दर्पण ही जीवन के सच के रहस्य खोलता।