प्रस्तावना आगे बढना प्रकृति का नियम है।प्रकृति एवं मनुष्य अपनी -अपनी नियति के अनुसार बढ़ते रहते है। उनका एक जीवन चक्र है जो निर्धारित समय के अनुसार चलता रहता है । *यहां हमारा विषय है *परवरिश बाल मन की* हल्के में मत लिजिए इस परवरिश को ,बहुत ही जिम्मेदारी का काम है यह परवरिश* परवरिश का पहला अध्याय घर -परिवेश की परवरिश से ही शुरू होता है । हमारा हिनदूस्तान सभ्यता ,संस्कृति और उच्च संस्कारों का देश है ,बच्चों के अभिवाकों को चाहिये की बाल्यकाल से ही उच्च नैतिक आदर्शों का ज्ञान दें । हमारे पौराणिक ग्रन्थ नैतिक कहानियों की पुस्तकें पंचतंत्र की कहानियां रामचरित्रमानस ,श्री राम सीता ,लक्ष्मण आदि ,भागवत गीता थ्रुव ,एकलव्य महात्मा बुदध् आदि के जीवन चरित्र आदि। हमारी पीढी तो परिवार के अपने बङों श्री राम,श्री कृष्ण ध्रुव प्रहलाद आदि के जीवन चरित्रों से प्रेरणा लेकर बङी हुई है। कौन भटकायेगा हमें हमारी राहों से ,हम श्रीराम श्री कृष्ण आदि के वंशज हैं । बच्चे किसको नहीं अच्छे लगते ,बच्चों की नटखट शरारतें सबको भाती हैं,क्योंकि उस...