प्रस्तावना आगे बढना प्रकृति का नियम है।प्रकृति एवं मनुष्य अपनी -अपनी नियति के अनुसार बढ़ते रहते है,उनका एक जीवन चक्र है जो निर्धारित समय के अनुसार चलता रहता है । *यहां हमारा विषय है *परवरिश बाल मन की* हल्के में मत लिजिए इस परवरिश को ,बहुत ही जिम्मेदारी का काम है यह परवरिश* प्रकृति के संरक्षण के लिए परमात्मा ने स्वयं व्यवस्था की है ,मौसमों के रुप में ,वायु सूर्य मिट्टी खाद ,जल प्रकृति का पोषण करते हैं । प्रकृति ने मनुष्य पोषण की बहुत सुन्दर व्यवस्था की है । किन्तु अच्छे संस्कारों के बीज मनुष्य के मनोभाव में स्वतः ही निहित हैं ,आवयशकता है बाल मन की परवरिश के समय उनमें अच्छे संस्कारों रुपी बीजों को पोषित करने की । आज का मंहगाई का जमाना , परिवार का खर्चा चलाना , बिजली ,पानी दुनियां भर की आधुनिक सुविधाओं की आवयशकता ,बच्चों की शिक्षा के नये-नये कार्यक्रम उसके खर्चे ,कई परिवारों में आवयशकता हो जाती है ,पति -पत्नी दोनों का घर से बाहर निकल कर काम करना । क्यों ना हो , सबको समानता का अधिकार जो है ।अगर सामने वाले में काबिलियत है ,तो काम करने...