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धारा प्रवाह

नदिया का किनारा  मन की शांति को सहारा    ए नदिया ले चल मुझे भी अपने बहाव संग  कहीं दूर मैं रह जाऊं इधर  मेरा मन चंचल निकल जाये कहीं दूर  मैं होकर भी ना रहूं, फिर भी रहूं यहीं पर  मुझे भी बना दे धारा बस तेरा हो इशारा  नित नूतन नयी नवेली बुझो कोई पहेली   बहते जल की तरह बढ़ते बस बढ़ते जाऊं निर्मल, निरंतर अग्रसर फिर भी एक ठहराव  तरलता और निर्मलता का भाव  हरी-भरी वसुन्धरा पर्वतों की कंदरा रुक ए मन रुक जरा मेघों का झुंड घिरा  मानों उतर रही हो कोई अप्सरा  धीमें से सुनहरी रंग-बिरंगी तितलियों का  झुंड कोमल पुष्पों से ले रहा हो पराग का  रस अमृत रस भरा ... फसलों की बालियां वृक्षों की कतार  जल है तो जीवन हैं,वृक्षों में प्राण भरे जल अमृत, जल पूजनीय है जल अमृत भण्डार  भरा जल का सदुपयोग करो जल ना होने से सूखे  में तड़फ कर मर जाओगे  जल की अधिकता प्रलयकारी सब जलमग्न कर जायेगी  जल ही जीवन ‌‌‌‌‌, जल से तरलता , जीवन में निर्मलता  पवित्र , पूजनीय जल देव अवतार जल से समृद्ध समस्त संसार ‌बड़ना और...

दस्तक एक आहट

एक दस्तक ,एक आहट मन की आवाज़  जिसमें छिपे होते हैं गहरे राज  इशारों की बात भी सुनना सीखो मेरे  अपनों उसमें छिपे होते हैं गहरे राज ‌ इशारा मन का आत्मा को  एक अनसुनी आवाज जो दिल को  हरपल दस्तक देती है इशारों में समझाती है  पर हम ही सुन कर अनसुना कर देते हैं  दिल की बात सुने या फिर दुनियां को देखें  कैसे ,कैसे अनदेखा कर दूं दुनियां को  जो हर पल मुझे ताकती है  गिरता हूं ठोकरें खाकर तो हंसी उड़ाती है  ऊपर उठता हूं तो भी बातें बनाती है  फिर भी मैं दुनियांदारी में उलझ जाता हूं  जिसे मेरे होने या होने से कोई फर्क नहीं पड़ता  जिसके लिए मैं हरपल एक किस्सा हूं  इशारा जो आत्मा का मन को होता  एक पहली अनकही आवाज जो  बस सवयं को ही समझ आती है  उस आवाज का इशारा हमेशा सही होता  जिसमें अच्छे -बुरे सही और ग़लत का विवेक भी होता है  समझना आवश्यक है इशारे का इशारा किधर होता  इशारे में भी गहरा राज छिपा होता है ।।

शिक्षक एक वरदान

शिक्षक समाज का वरदान ज्ञान का अक्षयपात्र  शिक्षक सभ्य सुसंस्कृत समाज निर्माता शिक्षा को ना व्यापार बनाओ संस्कारों की पहचान  शिक्षा सक्षमता का आधार  शिक्षा से पहचान बनाओ जग में ऊंचा नाम बनाओ  शिक्षक का करो सम्मान शिक्षक शिष्य का भगवान ।     संग अपने ज्ञान का दीपक हर पल रखता। शिक्षाओं से भटके हुओं का मार्गदर्शन करता।। शिक्षक एक वरदान देकर विद्यार्थियों को ज्ञान । विषय विशेष का दीप जलाता रहस्यों को सुलझाता ।। विषय विशेष का अद्भुत ज्ञान  अभ्यास  कसौटी परखता शिक्षक रचता नूतन आयाम ।। शिक्षक अमृत कलश अक्षय सम्पदा  जिसने जितना खोजा, रहस्य ज्ञान वो पाया।।  नींव सभ्यता की शिक्षक, पथ-प्रदर्शक      उजियारा वर्तमान समाज का दर्पण भविष्य का  शिक्षक पद सर्वोच्च, सर्वोपरि शिक्षक सदैव पूजनीय  शिक्षक सभ्य ,सुसंस्कृत समाज निर्माता शिक्षक स्थान सर्वोच्च,एवं सर्वोत्तम शिक्षक ज्ञान का दीपक लेकर चलता   मन में छिपे अंधकार को दूर भगाता भटके जो कोई शुभ संस्कारों के बीज डालकर अच्छे -बुरे की पहचान कराता  शिक्षक तराशता ज्ञ...

जीत का बिगुल

सदा-सर्वदा सृष्टि पर शाश्वत सत्य से जीवन चलता  परस्पर प्रेम के बीज डालकर अपनत्व की जो फसल उगाता धरा पर स्वर्ग बन जाता    मानव प्रकृति, उदार स्वभाव   दानव प्रवृत्ति ,राक्षस वृत्ति,पशु स्वभाव  पशु स्वतंत्रता, ‌‌‌‌‌हावी पशुता,मचाती उपद्रव  जंगल राज, पशुता मचाती हाहाकार,मानव संहार  सृष्टि प्रकृति का ताल-मेल, दैविय गुणों से रचता-बसता संसार , प्रकृति शाश्वत सत्य का आधार  जब -जब बढा क्रोध संग अहंकार  प्रकृति ने लिया प्रतिकार  देव अवतार मानव, वसुन्धरा पर करने को उपकार  धनुष बाण करके धारण, सुदर्शन चक्र धारी आते दिव्यता के करवाते दर्शन....  मानव जीत का बिगुल बजा  पशुता को सही राह दिखा  आत्मसम्मान जगा धरती पर हो  मनुष्य सम देवों का राज ऊंची कर आवाज  दैविय गुणों से ही है धरा पर फैलेगा सुख साम्राज्य ।।    

अच्छा लगता है

 उम्र की परतों ने मुझे बड़ा बना दिया  अभी कहां हुई हूं मैं बड़ी  बचपन का अल्हड़ पन  मौज मस्ती में रमता मन  आज भी अच्छा लगता है  सखियों संग लड़कपन आज भी लौट जाना चाहता है  जाने क्यों बचपन में मन  अभी भी जीता है मुझमें मेरा बचपन  मिलते-जुलते रहा करो सखियों तुमसे मिलकर लौट आता है मुझमें मेरा जीवन .... तुम्हारे- हमारे दिल की आपबीती एक जैसी  उम्र की ऐसी की तैसी...उम्र की लकीरें  खींचती हैं लक्ष्मण रेखायें....अनदेखा कर सब लकीरों को  हां बस एक खुशहाल जीवन जीना चाहते हैं हम  मरने से पहले तिल-तिल मरना नहीं मंजूर मुझको  उम्र की दहलीज पर नये खूबसूरत  रंग सजाना चाहते हैं हम    उम्र की आखिरी सांस तक मुस्कुराना चाहते है हम  और सारे जहां के लिए मुस्कुराने की वजह बनना चाहते हैं हम ,बस सवयं के लिये स्वयं की शर्तों पर जीवन जीना चाहते हैं हम  ।।

हम सरल हैं सरल ही रहने दो ..

सत्यम शिवम सुन्दरम  सत्य पर मुखौटे लगाना  आपना अस्तित्व मिटाना जैसे है  हम सरल हैं सरल ही रहने दो  चालाकियों का झूठा मुखौटा पहन  अपनी वास्तविकता छिपा स्वयं को कुरूप नहीं बनाना  सच को झूठ  .. झूठ को सच बनाना हमें नहीं भाता  सच को सच और गलत को गलत कहने की अदा ही  हमने नियति से सीखी है...  चालें चल अभी तो चल जायेगा . लेकिन जब ऊपर  वाला अपनी चाल चलेगा तो  सब बेहाल  हो जायेगा .. सत्य में सरसता ,सत्य में सरलता  सत्य ही शाश्वत ,सत्य हो सकता है आहत  किन्तु नहीं होता कभी पराजित  सत्य में निहित अदृश्य दिव्यता  पशुता का उपद्रव ,करता सब अस्त-वयस्त  मचती हाहाकार मानवता का तिरस्कार  चक्रधारी अवतरित होता  धनुष बाण तीर निशाना  विष का अंत होता  अमृत बरसता सत्य अमर है अमर रहता  शाश्वत सत्य ही जीवन आधार  सत्य से बंधा रचा-बसा समस्त संसार ..

भारत माता की जय

    *भारत माता की जय * *मेरा देश महान * *भारत भूमि *की आन में  और शान में   ये महज शब्द नहीं   मेरे मन के भाव हैं  देश प्रेम के प्रति   दिल में सुलगतीआग है   देश प्रेम की आग जो   मुझे भीतर ही भीतर   सुलगाती है आत्मा रोती है जब मेरे देश की जनता धर्म जाति और राजनीति के आड़ में हिंसा फैलाती है मेरे हृदय की आग मुझमें धधकती है जब किशोरियों की अस्मिताएं लूटी जाती हैं मेरे हृदय की आग ज्वाला बनकर मुझे मुझमें ही जलाती है जब सरहद पर तैनात भारत का वीर सपूत भारत भूमि की आन में शहीद हो जाता है मेरे भीतर देश प्रेम की आग मुझे मेरे देश की शान में कुछ लिखने को कुछ कहने को और भारत माता के सम्मान में भारत माता की जय बोलने को प्रेरित करती है । मेरे भीतर की आग मुझे भारत की आन में और शान में एक सभ्य सुशिक्षित मनुष्य  बनने को प्रेरित करती है ।