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मोहब्बत से संसार

मोहब्बत के इजहार  की क्या खूब कहानी  बागवान की बागवानी  खाद- मिट्टी- पानी और  निगरानी  सूरज  की किरणों से पोषित सदाबहार राजरानी  समुंदर की लहरों में उठता उफान  है  चांद भी चांदनी पर मेहरबान  है .. मोहब्बत है तभी तो प्रकृति ने वसुन्धरा पर बसाया  पुष्पों का संसार  है ... पर्वतों से बहती झरनों की बेहद की धार है ..तालाबों  में कमलदल का प्यार  है ... प्रकृति का वसुन्धरा को मोहब्बत  का इकरार.  बागों में बहार... पुष्पा की मोहब्बत की हद का  सिलसिला बेहद की सीमाओं को करता पार .. खूबसूरती और  कोमलता का तालमेल  उस पर अपनी सुगंध  को वायुमंडल  में दिया फैला  पुष्पों का जीवन  हर - पल वसुंधरा को समर्पित   यही मोहब्बत  की निशानी  जीवन में खुशियां देकर ही  मोहब्बत  की लिखी हमने कहानी ... मोहब्बत से ही संसार  है  प्यार है ,इजहार है  मोहब्बत से ही जीवन  में जिन्दगी गुलजार  है  दिलों में बहार  है रिश्तों का संसार  है .. ...

मिठास

जब भी मीठे का मन करे  मीठा बोल लिया करो ... मीठी बोली में जो मिठास होती है वो दुनियां के किसी मीठे में नहीं .. मिठाई तो बस मुंह मीठा करती है .. मुंह में स्वाद का रस घोल देती हैं .. मीठी बातों की मिठास  कानों में भी रस घोल  चेहरे पर चमक ले आती हैं ह्रदय में प्रेम रस घोल देती है ... मिठास अगर जुबान में हौ तो मिठास का रस अपने पास है. कड़वाहट  मन में हो तो सब मीठे बेकार  हैं ..

गुलाबों से बहार है

गुलाब..सौंदर्य का गुल ..उस पर इत्र का आब प्रकृति का वसुन्धरा को  इजहार ए मोहब्बत का तोहफा ए खास. ... एक दिन गुलाब देकर.. मोहब्बत का इजहार करने वाले मजनूओं . स्वीकार करेगें मोहब्बत तुम्हारी तब ही .. जो वादा करो ,कि बागों के सारे गुलाबों का बागवान बन हरपल  संरक्षण करोगे .. गुलाबों की इत्र से महकेगी बगिया सारी  हर एक गुलाब का दिल से सम्मान  करोगे . महकते रहेगें बागवान गुलाबों के इत्र से  बगीचों की शान है इन्हीं सुकोमल पुष्पों  की बागवानी से मोहब्बत ए इजहार ..है संरक्षण इनका  

सुनहरी तितलियां

*खूबसूरती को खूबसूरती से आंखे चार  करते देखा  आकर्षक तितलियों को रंगीन पुष्पों से मधुरस पान  करते देखा ... कोमलता को सुकोमलता से लाड लङाते देखा  अप्सराओं रुपी तितलियों को पुष्प  वाटिका में विहार  करते देखा..  प्रकृति के रंगो को पुष्पों की कलाकृति में बसते देखा बला की खूबसूरत सुकोमल नन्हीं  परियों को मनभावन वातावरण में  कुछ पलों के जीवन को भरपूर जीते देखा  मैने सुनहरी तितलियों को पुष्प वाटिका में  श्रृंगार  करते देखा है .. आसमान  से उतरी परियां मानों  सुना रही थीं अपनी कहानीयां  धरा पर सब उन्हें कह रहे थे तितली रानीयां  रंग -बिरंगी सुनहरी चमकीली चित्रकार की अनुपम चित्रकारी का अद्भुत तालमेल सुन्दर, सुकोमल मनभावन .. स्वर्ग से उतरी अप्सराएं..मनभावन अदाएं  .. नयनों के केनवास  में कैद होती बला की खूबसूरती के हर पल  के चलचित्र  ..तितलियों तुम  कौन  जगत  से हो आती  फिर  कहां चली जाती ...तुम ही जीवन तो  जीने की कला सिखाती ...तुम्हरी छवि मन में बस जाती ... अगले फाल्गुन...

धर्म साकारात्मक ऊर्जा का संसार

शाश्वत सनातन  सभ्यता भारत की  अंतरिक्ष साक्षी हिन्दमहासागर हिन्दुस्तान  हिन्दुत्व  भारत  की शान   धर्म अनन्त अथाह आकाश की गूंज धर्म  को ना जातिवाद  में ढूंढ  धर्म  परस्पर प्रेम  का आधार  सच्चा धर्म  स्वयंमेव सिद्ध चमत्कार  सेवा,दया,निस्वार्थ प्रेम परोपकार   सत्य धर्म का आधार.  धर्म  साकारात्मक  उर्जा का संसार  धर्म ना जातिवाद  में बसता  धर्म ह्दय प्रेम की मिठास   धर्म ना कोई  चमत्कार धर्म  का ना बनाओ बाजार   धर्म है ह्रदय  प्रेम  रसधार  ...

क्यों आती है नींद ?

  क्यों आती है नींद  ..फिर नींद  में क्यों आते हैं सपने  ... क्यों आती है नींद  ? नींद में सपने क्यों आते हैं ..? कई बार हम सपनों की दुनियां में हम खो जाते हैं जैसे .. जब नींद  खुलती है तब कुछ  देर  के लिए  सोच में डूबे रहते हैं .. इस बारें में आप क्या कहना चाहेंगे क्यों आती है हमें नींद?

शुभागमन शुभारंभ

 मां शारदे दे रही आशीर्वाद है  बसंत की बहार है गणतंत्र की पुकार है  धैर्य,विवेक के संकल्प से  नव भारत को रचना नया संसार है .. भारतीयता ही सरोकार है माता के संस्कार  हैं  दे रही दुलार  ,प्रकृती भी प्यार  है  सर्वस्व  प्रेम.का संचार  है  भारत माता का आशीष है  मर्यादा से सम्भाल रखना  भारत  माता का सर्वस्व देश का भार है प्रेम से संचित  बागान हैं  बागवान भारत माता कर रही वसुन्धरा का हार श्रृंगार  है ...