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रकम

 कर्मों की गुणवत्ता परखते रहिए   उसमें कर्मठता भरते रहिए   नित - नये अनुभव के साथ    ब्याज सहित नयी रकम हासिल  होगी   रकम से ज्यादा कर्म  महत्वपूर्ण हैं   अच्छे बीज अच्छी फसल ही देगी ..  वक्त  की कसौटी पर खरे उतरते रहिए   चाल- बाजों की चाल  पर जब वक्त  की  लाठी पङती है तो ,सारी चालाकियां  जाल बनकर  चालबाज  को ही फंसा देती हैं ..

मन की बात ..

मन की बात  ..  आदरणीय प्रधानमन्त्री जी से प्रेरित  होकर  हम भी शुरू करना चाहते हैं ..आपसे आपके मन की बात  ... माना की हमारा पद उतना बङा नहीं .. परन्तु कुछ  आप और  कुछ  मैं थोङा- थोङा सब जानते हैं .. आइये--- कहिए--  आप कुछ  कहना चाहतें हैं  तो कहिए  ... हम भी कोशिश करेगें ...  आपकी समस्याओं पर चर्चा  कर उसे सुलझाने की ... सच मानिये प्रेरित हूं ..माननीय  प्रधानमंत्री  की मन की बात से ... एक छोटा सा प्रयास  ..या ऐसे कई  छोटे- छोटे प्रयास  हम भी कर सकते हैं ...  हम सबके पास कुछ  ना कुछ  विशेष  जरुर है ... तो क्यों ना हम भी अपने- अपने मन की बात कर जीवन को आसान  बनाने की कोशिश  करें ... तैयार  हूं मैं आपके मन की पढने को ... बेझिझक  कहीए.. आप पूछ सकते हैं ..सवाल .. किन्तु सवालों में अभद्रता नहीं होनी चाहिए  .... क्या है आपके मन की बात ,जी मन ही मन मत दबाइयेगा मन की बात ,कहकर तो देखिये क्या पता कोई हल निकल जाये ?

जेब खर्च

 आज फिर जेब खर्च की खनक ने ली अंगड़ाई है   सारे जहां की दौलत जेब  खर्च  में समायी है   मन की उमंगों ने की दौङ लगाई है  किसी ने मेहनताना तो, किसी ने नेक कमाया है   चेहरे पर  खुशियों की चमक रंग लाई  है   मानों खरीद  लेगें सारा जहां  सारा आसमान ही सिर पर उठाया है जेब खर्च का सरुर जो मन में छाया है   मन में बेफिक्र सा गरुर है  गरुर में अपनत्व  का एहसास  है  मेहनताने में से बांटा जो जेब खर्च है उसमें में  अपनेपन का एहसास है देकर खुशियां वो भी मुस्कराया  दोनों का दिल भर - भर आया है  जिसने जेब खर्च दिया है ,वही तो अपना खास है  मेरे चेहरे की रौनक  देख वो सूकून  पाता है  मुझे मुस्काते देख वो मन ही मन हर्षाता है  जेब खर्च तो बहाना है ,वो मुझे और मैं उसे  खुशियों रहने के देते बहाने  हैं  . वो मेरा अपना है यही मेरा सबसे बङा खजाना है  .. जेब खर्च  किसी अपने का दिया हुआ सबसे बङा तोहफा  है  उसी में तो छिपा सारे जहां के ...

अर्जुन का लक्ष्य

कौन भटकायेगा हमें हमारी राहों से  हम सत्य प्रेम की करूणा की शिक्षा से शिक्षित हैं  श्रीकृष्ण के वंशज अर्जुन सा लक्ष्य रखते हैं  लक्ष्य हमारा सत्य धर्म है  ध्येय हमारा निस्वार्थ प्रेम है दुविधाओं से बचकर निकलना  हमारा नित नियम है .. लाख प्रलोभन मन को भटकाते  हैं .. कल किसने देखा भरमाते हैं .. हम भी बस मन ही मन मुस्कराते हैं  सत्य धर्म के रक्षक आज भी पूजे जाते हैं .. सुनकर  सबकी करते मन की हैं  विवेक की चाबी भी संग रखते हैं .. स्वार्थ  की राहें भरमाती हैं  हमें हमारे लक्ष्य  से डगमगाती हैं  हम भी द्रोणाचार्य के वंशज हैं  अर्जुन से शिष्य हैं एकलव्य से प्रेरित हैं कर्ण से दानवीर  हैं  भरें हैं कूट- कूट कर हम में भी  मर्यादापुरुषोत्तम, श्रीकृष्ण  भगवान के  चरित्र हैं .. कैसे टूट  जायेगें भीतर  है  बहुत  ठूके हैं ..तभी तो आज बाहर  से निखरे  हैं  कौन भटकायेगा हमें हमारी राहों से  सत्य  प्रेम की करूणार्द्र की शिक्षा से शिक्षित  हैं  प्राण जाये पर ...

शहजादे

हम शहजादे हैं  प्रकृति मां के प्यारे  वसुंधरा मां के लाडले  प्रकृति से पालित- पोषित हंसते -गाते हैं नील गगन तले जीवन का वैभव पाते हैं आकाश  में असंख्य  तारे टिमटिमाते हैं  चंदा की चांदनी में शीततलता का सुख पाते हैं  आंखो को कितने प्रिय लगते हैं सारे  वसुंधरा पर अद्भुत नजारे हैं  प्रकृति से हमारे प्रिय नाते हैं प्रकृति ने हमें जी भर के वैभव दिया हैं  रहने को वसुनधरा का आसन दिया उङने को खुला आसमान है  शुभ भावों के भव्य समुंद्र का ज्ञान  दिया  विचारों के ऊंचे शिखर हैं  इस पार  से उस पार को  जाने को है धरा का भव्य  वैभव है  हरी- भरी वसुन्धरा पर जीवन को जीवंत  करती  अन्न प्रसाद अमृत जल का आधार  है .. क्यों ना करें हम प्रकृति का सम्मान   प्रकृति से ही हमने जीवन  का भव्य वैभव पाया .. प्रकृति से हम जीवंत है प्रकृति से समृद्ध हैं  प्रकृति मां के लाडले हैं  प्रकृति का संरक्षण  हम करते हैं ..

गंगा अवतरण दिवस की बधाई

शक्ति अवतार  प्रकृति उद्धार   थन्य- धन्य  हुआ जीवन   मां गंगा धरती पर उतरी  संजीवनी अमृत जल लायी  भक्तों का उद्धार करने आयी ...    

नव दिवस नव आगमन

  नव दिवस का नव आगमन   तन- मन को करके पावन  जैसे  आज फिर खिली है धूप  आज फिर धरा का निखरा है रूप   मन में भर शुभ  भावनाओ  का  शुभ  स्वरूप  पत्ता - पत्ता  डाली -डाली  झूम  रहें हैं ..शीतल  समीर मधुर  संगीत   प्रकृति की है रीत .. निस्वार्थ  भाव से  हर पल देती रहती है ..निरंतर आगे की ओर  बढने की प्रीत  मन को पावन करता झरनों का संगीत   ऊंचे- ऊंचे वृक्ष  सफलता की जीत   मीठे रस से सरोबार  वृक्षों पर झूलते फल  बीजों का महत्व  जानों और मानों  जैसे बीज  वैसे वृक्ष   जैसी सोच वैसा संसार   हमारे ही विचारों से रचा-बसा संसार  ... शुभ  व्यवहार शुभ  संस्कार  जीवन की अमूल्य  सम्पदा मान .. प्रकृति का कर सम्मान   इसी से मनुष्य  जीवन  की शान ..