आज फिर जेब खर्च की खनक ने ली अंगड़ाई है सारे जहां की दौलत जेब खर्च में समायी है मन की उमंगों ने की दौङ लगाई है किसी ने मेहनताना तो, किसी ने नेक कमाया है चेहरे पर खुशियों की चमक रंग लाई है मानों खरीद लेगें सारा जहां सारा आसमान ही सिर पर उठाया है जेब खर्च का सरुर जो मन में छाया है मन में बेफिक्र सा गरुर है गरुर में अपनत्व का एहसास है मेहनताने में से बांटा जो जेब खर्च है उसमें में अपनेपन का एहसास है देकर खुशियां वो भी मुस्कराया दोनों का दिल भर - भर आया है जिसने जेब खर्च दिया है ,वही तो अपना खास है मेरे चेहरे की रौनक देख वो सूकून पाता है मुझे मुस्काते देख वो मन ही मन हर्षाता है जेब खर्च तो बहाना है ,वो मुझे और मैं उसे खुशियों रहने के देते बहाने हैं . वो मेरा अपना है यही मेरा सबसे बङा खजाना है .. जेब खर्च किसी अपने का दिया हुआ सबसे बङा तोहफा है उसी में तो छिपा सारे जहां के ...